जब एक किताब बनी सीआईए का ख़ुफिया मिशन

इमेज स्रोत, BBC World Service
बोरिस पास्टरनाक का मशहूर उपन्यास ‘डॉक्टर जिवागो’ 1988 तक सोवियत संघ में प्रकाशित नहीं हो पाया था, क्योंकि इसमें सोवियत व्यवस्था की कड़ी आलोचना की गई थी, लेकिन इसी वजह से अमरीका चाहता था कि सोवियत नागरिक इस उपन्यास को पढ़ें.
शीत युद्ध के दौर में ये काम सौंपा गया अमरीकी खुफिया एजेंसी सीआईए को जिसने पहली बार किसी उपन्यास को रूसी भाषा में छपवा कर सोवियत नागरिकों तक पहुंचाने की योजना बनाई.
बात 1958 की है. योजना यह थी कि इस उपन्यास की प्रतियां ब्रसेल्स में एक प्रदर्शनी को देखने के लिए आने वाले सोवियत नागरिकों को दी जाएं.
हाल में एक किताब ‘द ज़िवागो अफ़ेयर..’ में उल्लिखित सीआईए के गोपनीय दस्तावेजों के मुताबिक, “हम चाहते थे कि सोवियत नागरिक जानें कि उनकी सरकार क्या गड़बड़ कर रही है और जिसे रूसी भाषा का सबसे महान जीवित लेखक माना जाता है, उसी की रचनाएं उनके अपने देश में पढ़ने को नहीं मिलतीं.”
‘डॉक्टर जिवागो प्रोजेक्ट’

इमेज स्रोत, BBC World Service
प्रदर्शनी देखने आए हज़ारों सोवियत नागरिकों को इस उपन्यास की प्रतियां दी गईं. ‘जिवागो अफेयर’ में कहा गया है, “कुछ लोगों ने किताब का आवरण फाड़ दिया, उसके पन्ने कई हिस्सों में बांट दिए ताकि आसानी से जेब में छिपा सकें.”
इसकी प्रतियां 1959 में वियना में हुए विश्व युवा सम्मेलन में सोवियत और पूर्वी यूरोप के छात्रों को भी दी गई थीं. लेकिन सोवियत छात्रों के साथ आए ‘शोधकर्ताओं’ ने बार-बार उनसे कहा, “ले लो, पढ़ लो लेकिन इसे घर मत ले कर जाना.”
सीआईए के इस ‘डॉक्टर जिवागो’ प्रोजेक्ट का मकसद उन उपन्यासों को सोवियत संघ और पूर्वी देशों में पहुंचाना था जिन्हें प्रतिबंधित किया गया था.
इनमें जॉर्ज ऑरवेल, जेम्स जॉयस, व्लादिमीर नाबोकोव और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे लेखकों की रचनाएं शामिल थीं.

इमेज स्रोत, BBC World Service
पास्टरनाक को अक्टूबर 1958 में साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, लेकिन सोवियत अधिकारियों के दबाव में उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया. हालांकि सोवियत प्रेस में उन्हें काफी बुरा भला भी कहा गया लेकिन जब 1960 में फेफड़े के कैंसर से उनका निधन हुआ तो उनकी शवयात्रा में हज़ारों लोग उमड़े थे.
‘डॉक्टर जिवागो’ की दुनिया भर में करोड़ों प्रतियां बिकी हैं और 1965 में इस पर फिल्म भी बनीं जिसने ऑस्कर जीता. लेकिन सोवियत संघ में ये किताब 1988 में हुए सुधारों के बाद ही प्रकाशित हो पाई. इसके तीन साल बाद सोवियत संघ का विघटन हो गया था.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)












