'मैं अपने बच्चों को भारत से ले जाना चाहता हूं'

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पासपोर्ट कार्यालय की देरी के चलते एक ब्रिटिश दंपत्ति भारत में ही फंसकर रह गए हैं. इस मसले पर ब्रिटेन सरकार से हस्तक्षेप की मांग की गई है.
ब्रिटेन के ग्रेटर मैनचेस्टर में रहने वाले दंपत्ति किरण और बीना साल्वी क़रीब तीन महीने पहले सरोगेसी यानी किराए की कोख से पैदा हुए अपने जुड़वां बच्चों को लेने भारत आए थे.
लेबर पार्टी सांसद जूली हीलिंग ने हाउस ऑफ कॉमंस की बहस के दौरान गृह मंत्री थेरेसा मई से इस मसले में हस्तक्षेप करने के लिए कहा.
इस बारे में गृह मंत्रालय का कहना है कि यह एक जटिल सरोगेसी आवेदन था, जिसके लिए कई तरह की जांच-पड़ताल की ज़रूरत थी.
बच्चों को ब्रिटेन की नागरिकता दी गई है, लेकिन यह प्रक्रिया पूरी करने में देरी के चलते यह परिवार अपने घर नहीं लौट सकता.
बोल्टन पश्चिम की सांसद हीलिंग ने हाउस ऑफ कॉमंस में इस दंपत्ति की समस्या को उठाते हुए कहा, "भारत में वो निराश हैं, उनके पैसे ख़र्च हो रहे हैं और वो होटल के एक गर्म कमरे में बंद हैं."
यह दंपत्ति अपने जुड़वां बच्चों जय और लीला को लेने भारत आया था, जिनका जन्म एक सरोगेट मां से हुआ था. मगर वो अभी तक घर वापस नहीं लौट सके हैं.
जटिल प्रक्रिया

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साल्वी ने बताया, "जब हम पासपोर्ट ऑफ़िस के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करते हैं, तो एक रेफ़रेंस नंबर दिया जाता है, लेकिन विदेशी आवेदकों को कोई रेफरेंस नंबर नहीं दिया जाता."
साल्वी ने बताया कि जब उन्होंने ऑनलाइन मदद लेनी चाही, तो भी उन्हें इसी समस्या का सामना करना पड़ा.
उन्होंने बताया, "लगभग कोई भी इस प्रक्रिया के बारे में नहीं जानता है. उनके मुक़ाबले इस प्रक्रिया के बारे में मैं अधिक जानता हूं."
साल्वी ने कहा कि उनके बच्चों को आवेदन के एक सप्ताह के भीतर ब्रिटेन की नागरिकता मिल गई.
उन्होंने कहा, "मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि पूरी प्रक्रिया को दोहराया क्यों जा रहा है..पासपोर्ट अधिकारियों ने कुछ जांच दोबारा क्यों कीं."
उन्होंने बताया, "हम पिछले 12 साल से परिवार के लिए इंतज़ार कर रहे थे. मुझे अपने दोनों बच्चों का पछतावा नहीं है- मैं बस घर जाना चाहता हूं और उनके साथ ब्रिटेन में खुशियां मनाना चाहता हूं."
गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि मंत्रालय ने फोन और ईमेल के ज़रिए दंपत्ति से संपर्क किया है और वो कुछ जानकारी उपलब्ध कराए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "हम तब तक पासपोर्ट जारी नहीं करेंगे जब तक सभी जांच संतोषजनक ढंग से पूरी न हो जाएं."
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