अलक़ायदा की वापसी अब नामुमकिन: करज़ई

हामिद करज़ई

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अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने अलक़ायदा से जुड़े समूहों की इराक़ की तरह देश में वापसी की आशंकाओं को ख़ारिज कर दिया.

काबुल में बीबीसी संवाददाता लीस डूसे ने उनसे सवाल पूछा था कि जो कुछ हो रहा था, क्या वह अफ़ग़ानिस्तान में हो सकता है?

इसके जवाब में हामिद करज़ई ने कहा, "कभी नहीं, यह बिल्कुल भी संभव नहीं है."

इस साल अपना कार्यकाल पूरा कर रहे राष्ट्रपति ने कहा कि अलक़ायदा अफ़ग़ानिस्तान में नहीं है.

साल 2014 के आख़िर तक नेटो की सेनाएं अफ़ग़ानिस्तान से वापस लौटेंगी. कुछ विश्लेषकों का कहना है कि इससे हिंसा में वृद्धि होगी.

'अंतरराष्ट्रीय समर्थन की जरूरत'

राष्ट्रपति करज़ई ने कहा कि वह तालिबान के साथ लगातार बातचीत कर रहे थे. उन्होंने कहा, "वे मेरे साथ संपर्क में हैं. उनके साथ पत्रों का लेन-देन, मीटिंग और शांति स्थापना की इच्छा के बारे में चर्चा हो रही है."

उन्होंने आगे कहा, "लेकिन वे खुद से शांति स्थापित करने में सफल नहीं थे. जैसे मैं, अफ़ग़ानी लोग और सरकार खुद से शांति लाने में सक्षम नहीं थे."

अफ़ाग़ानिस्तान के लोगों ने <link type="page"><caption> 14 जून को राष्ट्रपति चुनाव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2014/06/140618_afghanistan_election_allegations_aj.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए मतदान किया. अगस्त में करज़ई अगले राष्ट्रपति को सत्ता सौंप सकते हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में चुनाव

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उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को उन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय समर्थन की ज़रूरत है, जहां उसके पास ख़ुद को सहारा देने वाले संसाधनों का अभाव है.

उत्तराधिकार का संघर्ष

करज़ई ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान की सुरक्षा अफ़ग़ानी लोगों का काम है. हमारे संवाददाता ने बताया है कि अफ़ग़ानिस्तान सरकार ने 2014 के बाद अमरीका के साथ किसी रणनीतिक समझौते से इनकार किया है.

हालांकि राष्ट्रपति पद की दौड़ में शामिल पूर्व विदेश मंत्री अब्दुल्ला अब्दुल्ला और विश्व बैंक के पूर्व अर्थशास्त्री अशरफ़ ग़नी दोनों का कहना कि वे इस तरह के मसौदे पर हस्ताक्षर करेंगे.

संवाददाताओं का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान को इससे इराक़ जैसे हालात टालने में मदद मिल सकती है.

राष्ट्रपति ने कहा कि वह इस बात से सहमत थे कि पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज डब्लू बुश की ओर से 9/11 के हमलों के बाद चलाया गया 'चरमपंथ से युद्ध' अफ़ग़ानिस्तान के गांवों और घरों में नहीं लड़ा जाना चाहिए था.

पाकिस्तान का संदर्भ लेते हुए उन्होंने कहा कि इस युद्ध को हमारी 'सीमाओं के बाहर' चलाना चाहिए था.

उन्होंने कहा, चरमपंथ से युद्ध "पूरी ईमानदारी और सही ढंग से नहीं लड़ा गया. इसके नतीजे पूरे क्षेत्र में महसूस किए जा सकते हैं."

साल 2001 में तालिबान के सत्ता से बेदखल होने के बाद हामिद करज़ई अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति बने थे और ताज़ा चुनाव के बाद अपने उत्तराधिकारी को पद सौंपने वाले हैं

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