इराक़ संकट: ईरान से सीधे बातचीत कर सकता है अमरीका

इराक़ी सुरक्षा बल का एक जवान

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एक अमरीकी अधिकारी ने बीबीसी को बताया है कि अमरीका इराक़ के मसले पर ईरान से सीधी बातचीत पर विचार कर रहा है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से इराक़ में कार्रवाई के विकल्पों पर विचार करने के बाद यह पहल हुई है.

इस बीच अमरीका ने सुन्नी चरमपंथियों की ओर से इराक़ी सैनिकों की सामूहिक हत्या से संबंधित 'खौफ़नाक़ तस्वीरें' इंटरनेट पर डालने की निंदा की है.

चरमपंथी संगठन आईएसआईएस यानी इस्लामिक स्टेट इन इराक़ एंड दी लेवांट के सैकड़ों जिहादियों ने पिछले हफ़्ते मोसूल और तिकरित के साथ कुछ और शहरों पर नियंत्रण कर लिया था.

बाद में इराक़ी सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुछ क़स्बों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है. लेकिन मोसूल और तिकरित पर अब भी आईएसआईएस के जिहादियों का ही क़ब्ज़ा है.

सीधी बातचीत

वॉशिंगटन में मौज़ूद बीबीसी संवाददाता रजनी वैद्यनाथन का कहना है कि हालांकि अमरीका और ईरान पुराने विरोधी हैं लेकिन दोनों ही इराक़ में आईएसआईएस की ओर से बढ़ते ख़तरे को रोकना चाहते हैं. दोनों ही इराक़ सरकार को सैनिक सहायता देने पर विचार कर रहे हैं.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी

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अमरीका ने कहा है कि वह ईरान के साथ सीधी बातचीत पर विचार कर रहा है, जो कि इस हफ़्ते के शुरू में हो सकती है.

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों की वियना में बैठक होने वाली है.

ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा है कि अगर अमरीका इराक़ में कार्रवाई करता है तो वो उसमें सहयोग करने पर विचार करेंगे.

अमरीकी विमानवाहक पोत यूएसएस जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश को पहले ही खाड़ी में तैनात किया जा चुका है. उस पर दर्जनों लड़ाकू विमान तैनात हैं. उसके साथ दो जंगी जहाज़ भी हैं. लेकिन अमरीका ने कहा है कि इराक़ की ज़मीन पर कोई अमरीकी सैनिक तैनात नहीं किया जाएगा.

हालांकि इस बात की भी ख़बरें हैं कि प्रशिक्षण और सहायता के लिए ईरान के 130 से अधिक रिवोल्यूशनरी गार्ड इराक़ में हैं.

आईएसआईएस सुन्नी मुसलमानों का एक जिहादी संगठन है, जो इराक़ और सीरिया में सक्रिय है. अबु बकर अल बग़दादी इसके प्रमुख हैं.

फ़ोटोग्राफ पर विवाद

आईएसआईएस की ओर से इंटरनेट पर डाली गई तस्वीरों में इराक़ी सैनिकों को ले जाते हुए दिखाया गया है. इन तस्वीरों में हत्या से पहले और बाद में इन सैनिकों को एक गड्ढे में लेटा हुआ दिखाया गया है.

इराक़ी सेना ने इन तस्वीरों को असली बताया है. लेकिन अभी उनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.

उत्तरी इराक़ में मौजूद बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि ये तस्वीरें असली हैं. उनके मुताबिक़ 2003 में अमरीका के नेतृत्व में हुए सैन्य हमले के बाद से यह अब तक की क्रूरता की सबसे बड़ी घटना हो सकती है.

इंटरनेट पर आईएसआईएस की ओर से पोस्ट की गई सैनिकों की सामूहिक हत्या वाली तस्वीरों से पता चलता है कि तिकरित में जब एक समूह ने सैनिक अड्डे पर कब्ज़ा कर लिया तो सैनिकों के साथ क्या हुआ.

इराक़ की सेना में शामिल होने वाले युवक

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अभी हाल में फ़िल्माए गए वीडियो में सैकड़ों सैनिकों को मार्च करते हुए दिखाया गया है. इसमें सैनिकों को यह कहते हुए दिखाया गया है कि उन्होंने स्पीचर सैन्य अड्डे पर आत्मसमर्पण किया.

वहीं कुछ फ़ोटोग्राफ़ में बहुत बड़ी संख्या में नौजवान लड़कों को ट्रकों में लादकर ले जाते हुए दिखाया गया है.

आईएसआईएस की ओर से जारी इन तस्वीरों के कैप्शन में कहा गया है कि उन्हें मारने के लिए ले जाया जा रहा है.

इराक़ी सैनिकों को ले जाते आईएसआईएस के लड़ाके

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कुछ दूसरी तस्वीरों में आईएसआईएस के लड़ाकों को इन बंधकों पर गोलियां चलाते हुए भी दिखाया गया है.

इस विद्रोही आंदोलन के सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि क़रीब एक हज़ार कर्मियों का मार डाला गया था. ये सूत्र आईएसआईएस के सदस्य नहीं हैं.

अभी हाल में इराक़ी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल क़ासिम अता ने कहा था कि सेना ने कुछ इलाक़ों में चरमपंथियों पर सफलता हासिल की है और 279 विद्रोहियों को मार डाला है. इस संख्या की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है.

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