इंग्लैंड में जबरन शादी: 'आत्महत्या ही रास्ता नज़र आता है'

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- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
ब्रिटेन में रहने वाली समीम अली महिलाओं के हक़ के लिए काम करती हैं. एक समय था जब वह 12 साल की उम्र में जबरन शादी का शिकार हुई थीं. उन दिनों को याद करते हुए समीम कहती हैं कि 12 साल की उम्र में उन्हें स्कूल से निकाल लिया गया और ब्रिटेन से पाकिस्तान भेज दिया गया.
13 साल में उनकी जबरन शादी कर दी गई, एक अनजान व्यक्ति से ज़बरदस्ती शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया गया और 14 साल की उम्र में उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया.
आँकड़ों के मुताबिक़ इंग्लैंड और वेल्स में हर साल लगभग आठ हज़ार युवकों और युवतियों की ज़बदस्ती शादी की जाती है. यानी उन लोगों की मर्ज़ी के ख़िलाफ़. ब्रिटेन में बसे दक्षिण एशियाई समुदाय से जुड़े लोगों में ऐसे कई मामले सामने आते रहे हैं.
लेकिन अब नया क़ानून लागू हो रहा है जिसके तहत इंग्लैंड और वेल्स में जबरन शादी करवाना अपराध माना जाएगा.
नेशनल सोसायटी फ़ॉर प्रिवेंशन ऑफ़ क्रूएलिटी टु चिल्ड्रेन नाम की संस्था ब्रिटेन में बच्चों के लिए काम करती है. संस्था के मुताबिक़ उसकी हेल्पलाइन नंबर पर ऐसे कई बच्चे कॉल करते हैं जिन्हें डर होता है कि उनकी ज़बरदस्ती शादी कर दी जाएगी और इनमें एक चौथाई की उम्र 12 से 15 साल के बीच होती.
सरकार की फोसर्ड मैरिज यूनिट के मुताबिक पिछले साल उसके सामने 1302 ऐसे मामले आए जिसमें जबरन शादी की आशंका की सूरत में उसने लोगों की मदद की. इन मामलों में 42.7 फ़ीसदी मामले पाकिस्तानी मूल के लोगों के थे 10.9 फ़ीसदी भारतीय मूल के लोगों के और 9.8 बांग्लादेशी मूल के लोगों के. 82 फ़ीसदी मामलों महिलाओं से जुड़े हुए थे. 2012 में उसके सामने 1485 ऐसे मामले आए थे.
एशियाई समुदाय में राय बँटी

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संस्था ने बताया है कि ऐसी फ़ोन कॉल्स की संख्या पिछले तीन सालों में तिगुनी हो गई है.
एक ब्रितानी लड़की ने आपबीती कुछ यूँ सुनाई, "मेरी ज़बरदस्ती शादी कर दी गई है. मैं इस सबसे भागना चाहती हूँ. मैं अपने परिवार से नफ़रत करती हूँ. कभी-कभी लगता है आत्महत्या कर लूँ. इस सबसे छुटकारा पाने की यही रास्ता नज़र आता है मुझे."
ब्रिटेन में बसे दक्षिण एशियाई समुदाय में नए क़ानून को लेकर राय बँटी हुई है. इस्लामी स्कॉलर शेख़ अमीर जमील क़ानून से ज़्यादा जागरूकता बढ़ाने को बेहतर ज़रिया मानते हैं.
वे कहते हैं, "ज़ाहिर है कड़े क़ानून ज़रूरी हैं लेकिन समस्या का हल लोगों को शिक्षित और जागरूक करके ही निकल सकता है. जब मानसिकता बदलेगी तो स्थितियाँ अपने आप बदल जाएँगी."
क्या खुलकर सामने आएँगी महिलाएँ?
वैसे स्कॉटलैंड में जबरन शादी रोकने के लिए तीन साल पहले नियम बनाया गया था. इसके तहत अगर कोई शिकायत करता है तो उसे संरक्षण दिया जाएगा. महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाली रजनी पंधार ऐसे क़दमों का समर्थन करती हैं लेकिन उन्हें आशंका भी है.
रजनी कहती हैं कि नियम ज़्यादा कड़े होने से बहुत सी पीड़ित महिलाएँ आगे आने से डरेंगी क्योंकि उनके परिवार वाले इससे नाराज़ हो सकते हैं.
बीबीसी की जानकारी के मुताबिक़ स्कॉटलैंड में जब से जबरन शादी को लेकर संरक्षण क़ानून लागू हुआ है, तब से केवल 10 संरक्षण देने के मामले सामने आए हैं.
अब इंग्लैंड में जबरन शादी को क़ानूनन अपराध माना जाएगा. विशेषज्ञ इसे अहम क़दम तो मान रहे हैं लेकिन बहस इस बात को लेकर छिड़ी हुई है कि परिवार के ख़ौफ़ के साए में आख़िर कितनी बच्चियाँ और युवतियाँ खुलकर सामने आएँगी और शिकायत दर्ज कराएँगी."
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