पाँच तालिबान जिन्हें अमरीका ने मजबूरन छोड़ा

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अमरीका ने ग्वांतानामो में क़ैद जिन पांच तालिबान नेताओं अपने एक सैनिक के बदले रिहा किया है वे सभी तालिबान शासन में उच्च आधिकारिक पदों पर कार्यरत थे.
पहले व्यक्ति मोहम्मद फ़ज़ल 2001 में अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की कार्रवाई के समय तालिबानी शासन में उपरक्षा मंत्री की पद पर था. इन पर हज़ारो शिया मुस्लिमों की मौत और युद्द अपराध का आरोप है.
ख़िराउल्ला ख़ैरख्वा अफ़ग़ानिस्तान के तीसरे सबसे बडे शहर हेरात के गवर्नर रह चुके हैं. उनका ओसामा बिन लादेन से सीधा संबंध होने का आरोप है.
तीसरे अब्दुल हक़ वसिक तालिबानी ख़ुफ़िया विभाग में उपमंत्री थे. जानकारी के मुताबिक अमरीका और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ लडाई के लिए इस्लामी चरमपंथियों को साथ लाने में प्रमुख भूमिका थी.
मुल्ला नुरूल्लाह नूरी एक गवर्नर और तालिबान मिलिट्री में उच्च अधिकारी थे. उन्हें हज़ारों शियाओं की मौत का ज़िम्मेदार बताया जाता है.
मोहम्मद नबी ओमरी तालिबान शासन में चीफ़ सुरक्षा अधिकारी थे. इसके अलावा वो कई अन्य भूमिकाओं में सक्रिय थे. उनपर अमरीका और उसके सहयोगियों पर हमला करने का आरोप है.
अदला बदली का विडियो जारी
इस बीच तालिबान ने एक <link type="page"><caption> वीडियो</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/news/world-asia-27692636" platform="highweb"/></link> जारी किया है जिसमें अमरीकी सैनिक की रिहाई के वो क्षण मौजूद हैं जब उन्हें अमरीकी फ़ौज के हवाले किया गया. वो पांच साल से तालिबान की क़ैद में थे.
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वीडियो में रिहाई से पहले बोवे बर्गादी को एक ट्रक में बैठे दिखाया गया है. जिसके बाद उन्हें हेलीकॉप्टर की ओर ले जाया गया है.

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अमरीका सैनिक को ग्वांतानामो जेल में बंद पांच अफ़ग़ान कैदियों के बदले में रिहा किया गया है. इस अदला बदली को लेकर अमरीका में काफ़ी हंगामा हुआ है. विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी का मानना है कि इससे अमरीकियों की सुरक्षा ख़तरे में पड़ सकती है.

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खोस्त में मौजूद स्थानीय सूत्रों ने बीबीसी को बताया कि हक्क़ानी समूह ने सार्जेंट को पाकिस्तान के वज़ीरिस्तान इलाक़े से 40 किलोमीटर दूर बेतानी की घाटियों में रिहा किया. अमरीका सार्जेंट बोवे बर्गादी इकलौते अमरीकी सैनिक हैं जो अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की क़ैद में थे.
उस इलाके का नियंत्रण मुल्ला तज़मीर और उनके समूह के लोगों के हाथों में हैं. मुल्ला तज़मीर तालिबानी शासन में प्रमुख ख़ुफिया अधिकारी थे. इसके अलावा उनके सिराजुद्दीन हक्क़ानी और तालिबान नेता मुल्ला उमर के साथ भी बहुत अच्छे संबंध हैं.

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अमरीका ने बहुत पहले ही हक्क़ानी समूह को देश के लिए ख़तरा घोषित कर दिया था. हक्क़ानी नेटवर्क के अलक़ायदा से भी संबंध हैं. इस नेटवर्क ने अफ़ग़ानिस्तान में विदेशी फ़ौजियों को भी निशाना बनाया था.
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