रूस और चीन के बीच गैस आपूर्ति समझौता

रूस और चीन के बीच गैस आपूर्ति समझौता

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चीन के साथ कई अरब डॉलर का गैस-आपूर्ति समझौता किया है जो अगले 30 वर्षों तक जारी रहेगा.

रूस की गैस कंपनी गैजप्रोम और चीन के नेशनल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (सीएनपीसी) के बीच अगले 10 वर्षों के लिए गैस निर्माण समझौता हुआ है. आधिकारिक तौर पर इस समझौते का मूल्य नहीं बताया गया है लेकिन एक अनुमान के आधार पर यह 400 अरब डॉलर से भी ज्यादा का है.

यूक्रेन संकट के कारण यूरोपीय प्रतिबंधों से गुजर रहा रूस दबाव में होने के कारण अपने गैस की खपत के लिए वैकल्पिक ऊर्जा का नया बाजार चाहता था.

खबरों के मुताबिक गैजप्रोम की हिस्सेदारी दो फीसदी बढ़ गई है.

मतभेद

शंघाई के एक सम्मेलन में हुए इस समझौते के मुताबिक रूस और चीन के बीच 38 अरब घनमीटर गैस की आपूर्ति होने की संभावना है.

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन

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दोनों देशों के बीच हुआ ये समझौता काफी दिन से रुका हुआ था क्योंकि पहले गैस की कीमत पर सबसे ज्यादा मतभेद थे और माना जा रहा था कि मोलभाव में चीन का पक्ष ज्यादा मजबूत है.

चीन को पिछले दस वर्षों में कई अन्य गैस आपूर्तिकर्ता मिले हैं. तुर्कमेनिस्तान, चीन के लिए सबसे बड़ा विदेशी गैस आपूर्तिकर्ता बन चुका है. पिछले साल चीन ने म्यांमार से प्राकृतिक गैस का आयात भी शुरू किया था.

ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स में इमर्जिग मार्केट के प्रमुख रेन न्यूटन स्मिथ कहते हैं, "रूस और चीन के बीच हुए इस समझौते का एक खास प्रतीकात्मक महत्व भी है. समझौता कहता है कि दोनों देश अब एक दूसरे के साथ काम करने के लिए तैयार हैं. जैसे कि रूसी यातायात के बुनियादी ढांचे और ऊर्जा निर्माण में चीन की भागीदारी."

बीबीसी रक्षा और राजनयिक संवाददाता जोनाथन मार्कस का कहना है कि रूस और पश्चिमी देशों के बीच केवल यूक्रेन मामले को लेकर ही तनाव नहीं है, बल्कि सीरिया मसले पर भी बुनियादी मतभेद हैं.

गैजप्रोम गैस कंपनी

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इसके अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन देश को जिस दिशा में ले जा रहे हैं, उस पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं.

वह कहते हैं, "आर्थिक और भू-राजनीतिक दोनों नजरिए से रूस की गैजप्रोम कंपनी पश्चिम देशों की ओर देखने की बजाय अब पूरब के देशों की ओर देखने लगी है. इस संदर्भ में यह समझौता व्यापार के क्षेत्र में प्रतीकात्मक महत्व रखता है."

इकलौता कारोबारी साझेदार

समझौते में विलंब का एक और कारण रहा, चीन में पाइपलाइन के निर्माण का मसला.

वर्तमान में रूस के सूदूर पूर्व से चीन की सीमा तक एक ही पाइपलाइन मौजूद है. इसे 'साइबेरिया की ताकत' कहा जाता है.

इसकी शुरूआत साल 2007 में हुई थी. साल 2004 में गैजप्रोम और सीएनपीसी के बीच पहला समझौता हुआ था.

चीन में प्राकृतिक गैस शुद्धिकरण प्लांट

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मगर गैस को चीन तक पहुंचाने में आ रही 22 से 30 अरब डॉलर की लागत ताजा विवाद की वजह रही.

चीन, रूस का सबसे बड़ा और इकलौता कारोबारी साझेदार है. साल 2013 में दोनों के बीच 90 अरब डॉलर की कीमत का दो-तरफ़ा कारोबार हुआ.

अब दोनों देश 10 वर्षों में इस व्यापार को दोगुना कर 200 अरब डॉलर करना चाहते हैं.

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