चीन में खेती की बीस फ़ीसदी ज़मीन हुई प्रदूषित

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चीन की कुल ज़मीन का क़रीब पांचवां हिस्सा प्रदूषित हो चुका है. वहां एक सरकारी अध्ययन में यह बात सामने आई है.
साल 2005-2013 के बीच किए गए इस अध्ययन के मुताबिक चीन की कुल भूमि का 16.1 फ़़ीसदी और कृषि योग्य भूमि का 19.4 फ़ीसदी हिस्सा प्रदूषित हो गया है.
पर्यावरण रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में कैडमियम, गिलट और आर्सेनिक को प्रदूषण की मुख्य वजह बताया गया है.
सरकार और आम लोग, दोनों में ही इस बात को लेकर चिंताएं बढ़ती जा रही हैं कि चीन का तीव्र औद्योगिकीकरण पर्यावरण को बहुत अधिक नुक़सान पहुंचा रहा है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती है.
शोध में 63 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र से नमूने लिए गए, जो चीन की ज़मीन का दो तिहाई हिस्सा है.
मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा, "सर्वेक्षण से पता चला है कि देश भर में भूमि की स्थिति बहुत आशाजनक नहीं है."
बयान में कहा गया है, "लंबे समय से व्यापक औद्योगिक विकास और भारी उत्सर्जन के कारण कुछ इलाक़ों में भूमि की गुणवत्ता में बहुत अधिक गिरावट हो रही है और गंभीर मृदा प्रदूषण हो रहा है."
विरोध

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इस "डरावनी स्थिति" को देखते हुए सरकार ने कुछ आवश्यक क़दम उठाने का फैसला किया है, जिनमें "मृदा प्रदूषण योजना" और बेहतर कानून शामिल हैं.
समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने इस रिपोर्ट के हवाले से कहा कि करीब 82.8 फ़ीसदी प्रदूषण भूमि अजैविक पदार्थों की वजह से संक्रमित हुई है, जिनका स्तर 1986 से 1990 तक के सर्वेक्षणों के मुक़ाबले बेहद ज़्यादा है.
शिन्हुआ के अनुसार, "मुख्य औद्योगिक इलाकों में प्रदूषण की स्थिति गंभीर है. इनमें उत्तरी चीन में यांगज़ी नदी का डेल्टा, दक्षिण चीन और उत्तर पूर्वी इलाके में पर्ल नदी का डेल्टा शामिल है जो बड़े औद्योगिक केंद्र हुआ करते थे."
इस रिपोर्ट की गंभीरता की वजह से पहले सरकार ने इसे एक गुप्त दस्तावेज़ की तरह रखा था. चीन में यह डर बढ़ता जा रहा है कि आधुनिकता देश की हवा, पानी और मिट्टी की क़ीमत पर आई है.
चीन की सरकार ने इस मामले से निपटने को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है, लेकिन निहित स्वार्थों और स्थानीय स्तर पर कानूनों के पालन में ढिलाई की वजह से ये मसला चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
दूसरी ओर जनता धुंध और कई मामलों में अपने शहरों में रासायनिक प्लांट लगाए जाने के विरोध में खुलकर सामने आने लगी है और सड़कों पर प्रदर्शन कर रही है.
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