चार दशकों तक मौत का इंतज़ार, मुक़दमे पर अब फिर से सुनवाई

इवाओ हाकामादा

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जापान के एक अदालत ने चार दशकों से मौत की सज़ा पाए एक व्यक्ति के मुक़दमे पर फिर से सुनवाई की इजाज़त दी है.

इवाओ हाकामादा को अपने बॉस, उसकी पत्नी और उसके दो बच्चों की हत्या के लिए 1968 में मौत की सजा सुनाई गई थी .

अब 78 साल के हो चुके हाकामादा ने उस वक़्त 20 दिनों की पूछताछ के बाद अपना गुनाह क़बूल कर लिया था.

वह कहते हैं कि पूछताछ के दौरान उनको पीटा गया था. बाद में वह अदालत में इक़बालिया बयान से मुकर गए थे.

जापान की पुलिस पारंपरिक रूप से मुक़दमा चलाने के दौरान बयान पर भरोसा करती है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि अक्सर ये बयान जोर ज़बरदस्ती कर के लिए जाते हैं.

एक बयान में, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया कि हाकामादा को दुनिया के सबसे लंबे समय तक मौत का सज़ा पाए क़ैदी के रूप में माना जाता है.

एमनेस्टी इंटरनेशनल के पूर्वी एशिया अनुसंधान निदेशक रोसीअन राइफ़ ने कहा, " अगर कोई मुक़दमा जो फिर से सुनवाई की मांग करता है वह यह मुक़दमा है. हाकामादा एक मजबूर इक़बालिया बयान के आधार पर दोषी पाया गया था और हाल ही में डीएनए सबूत से उठे सवालों का अनुत्तरित रहना भी एक वजह थी.

बेगुनाही की संभावना

हीदेको

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इमेज कैप्शन, हाकामादा की 81 वर्षीय बहन हीदेको कई सालों से यह मुकदमा लड़ रही है.

इस पूर्व पेशेवर बॉक्सर पर 1966 में सिजुओका में सोयाबीन प्रोसेसिंग कारख़ाने में अपने बॉस और उसके परिवार की हत्या का आरोप लगाया गया था. उसके परिवार के लोग आग लगने के बाद चाक़ू से मारे पाए गए थे.

क्योदो समाचार एजेंसी के रिपोर्ट के मुताबिक़ अदालत का यह फ़ैसला उस वक़्त आया जब बचाव पक्ष के वकीलों ने दिखाया कि कथित तौर पर हत्यारे द्वारा पहने गए कपड़ों पर पाए गए ख़ून के धब्बों के डीएनए हाकामादा डीएनए से मेल नहीं खाता.

न्यायाधीश ने उनकी रिहाई का आदेश देते हुए कहा, "उनकी बेगुनाही की संभावना एक सम्मानजनक हद तक स्पष्ट हो गई है, इसलिए अब प्रतिवादी को गिरफ़्तार करे रखना अन्याय है "

मामले की सुनवाई कर रहे तीन जजों में से एक ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि वह अभियुक्त को बेगुनाह मानते है. आम तौर पर सार्वजनिक रूप से इस तरह बयान देने का प्रचलन नहीं है.

हाकामादा की 81 वर्षीय बहन हीदेको कई वर्षों यह मुक़दमा लड़ रही है.

एएफ़पी समाचार एजेंसी ने अदालत के बाहर समर्थकों और मीडिया को उनके हवाले से कहा, "यह आप सब की मदद से हो पाया. आप सब को धन्यवाद. मैं बस बहुत ख़ुश हूँ ".

जापान की न्याय प्रणाली संदिग्ध लोगों के बयान पर काफ़ी हद तक आधारित है.

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