जब जल्लाद ने घबराकर नौकरी छोड़़ी

फांसी का फंदा

श्रीलंका में जेल अधिकारी एक नए जल्लाद या फांसी लगाने वाले की खोज कर रहे हैं.

इसकी वजह ये है कि कुछ समय पहले ही नियुक्त हुए <link type="page"><caption> जल्लाद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/12/111230_hangman_bangla_ac.shtml" platform="highweb"/></link> ने जब पहली बार फांसी का तख़्ता देखा तो उसने घबराकर नौकरी छोड़ दी.

अधिकारियों ने उस व्यक्ति को फांसी से जुड़े उपकरण दिखाने से पहले एक हफ़्ते का प्रशिक्षण दिया था. अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही जल्लाद ने वे उपकरण देखे, वे उत्तेजित हो गया और वहां से चला गया.

जेल विभाग ने तय किया है कि अब वे नए रंगरूटों को प्रशिक्षण से पहले ही फांसी का तख़्ता दिखाएंगे.

नया फ़ैसला

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक पिछले साल विभाग ने दो जल्लादों की नियुक्ति की थी लेकिन जब वे महीनों तक काम पर नहीं आए, तब पिछले सप्ताह जेल विभाग ने नए जल्लाद को नियुक्त किया. ये व्यक्ति 176 आवेदकों की सूची में तीसरा सबसे योग्य आवेदक था.

जेल विभाग के कमीश्नर जनरल चंद्ररत्ना पलेगामा ने रॉयटर्स को बताया, "हमने इस व्यक्ति को एक हफ़्ते का प्रशिक्षण दिया लेकिन फांसी का तख़्ता देखने के बाद उसने ये कहकर इस्तीफ़ा दे दिया कि उसे ये नौकरी नहीं करनी है."

पलेगामा ने आगे बताया, "उसने मुझे बताया कि फांसी का तख़्ता देखकर वो घबरा गया. अगली बार हम सभी नए रंगरूटों को बुनियादी प्रशिक्षण देने से पहले ही फांसी का तख़्ता दिखाएंगे."

श्रीलंका में साल 1976 से किसी भी क़ैदी को फांसी नहीं दी गई है.

रॉयटर्स के अनुसार वहां कम से कम 405 क़ैदियों को मौत की सज़ा सुनाई जा चुकी है. ऐसे में मुमकिन था कि फांसी लगाने की जगह उस कर्मचारी का ज़्यादा समय प्रशासनिक कामों में ही बीतता.

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