चालीस लाख से ज़्यादा में बिकी हिटलर की आत्मकथा

माइन कैंप्फ

इमेज स्रोत, AFP

जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर की आत्मकथा "माइन काम्फ़" की दो खंडों वाली एक प्रति लॉस एंजलिस में नीलामी के दौरान 64,850 अमरीकी डॉलर यानि 40 लाख रुपए से ज़्यादा क़ीमत में बिकी.

दरअसल इसकी ख़ास बात यह थी कि इस पर एडोल्फ <link type="page"><caption> हिटलर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/05/120508_hitler_health_skj.shtml" platform="highweb"/></link> के हस्ताक्षर हैं.

नीलामीकर्ता नाते सैंडर्स ने कहा कि ये पुस्तकें वर्ष 1925 और 1926 के दौर की है जिन्हें किसी अज्ञात अमरीकी ने ख़रीदा है.

कपड़े वाले कवर वाली इस किताब की एक प्रति पहले संस्करण और दूसरी प्रति दूसरे संस्करण की है जिस पर हिटलर ने नाज़ी पार्टी के एक सदस्य और एसएस अधिकारी जोसेफ़ बावर के नाम के साथ कुछ लिखा था.

'नीलामी के लायक'

नाज़ी नेता ने बावर को इस किताब पर अपनी लिखावट के ज़रिए क्रिसमस की शुभकामनाएं दी थीं.

इस किताब के लिए ऑनलाइन बोली लगाने की प्रक्रिया 20,000 डॉलर से शुरू हुई और यह नीलामी गुरुवार की रात ख़त्म हुई. इस किताब के लिए 11 बोलियां लगीं.

1923 में अवैध तरीके से सरकार गिराने की कोशिश पर हिटलर को जेल हुई थी सज़ा दे दी गई. उन्होंने इस किताब उसी समय लिखा था. माइन काम्फ़ (मेरा संघर्ष) में यहूदी धर्म और साम्यवाद के ख़िलाफ़ विचार हैं.

हिटलर के जर्मनी का चांसलर बनने से पहले इस किताब के दो खंड वर्ष 1925 और 1926 में प्रकाशित हुए थे.

सैंडर्स जो ख़ुद को यहूदी बताते हैं, उन्होंने एक स्थानीय टेलीविज़न स्टेशन से कहा, "मुझे लगता है कि यह भले ही अच्छा न हो लेकिन फिर भी यह नीलामी के लायक है. इसे एक यादगार स्मृति चिन्ह और इतिहास का हिस्सा कहा जा सकता है."

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