अमरीका में समलैंगिकों को ज्यादा आज़ादी

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समलैंगिक विवाहों को ज्यादा वैधानिक मान्यता देने के लिए अमरीका अपनी न्यायिक व्यवस्था में बदलाव करने जा रहा है.

न्यूयॉर्क में समलैंगिक अधिकारों पर भाषण देते हुए अटार्नी जनरल एरिक होल्डर ने कहा है कि न्याय विभाग पहले से ही भेदभाव के ख़िलाफ़ भूमिका निभाता रहा है.

नए बदलावों को तहत समलैंगिक जोड़ों को अदालत में एक दूसरे के ख़िलाफ़ गवाही की बाध्यता से मुक्त किया जाएगा.

इसके अलावा संघीय कारागारों में प्रवेश के लिए उन्हें बराबरी का अधिकार होगा.

वर्तमान में अमरीका के 17 राज्यों और वॉशिंगटन डीसी में समलैंगिक विवाह को क़ानूनी वैधता है.

अन्य राज्यों में पुरूष समलैंगिक जोड़ों को कुछ हद तक वैवाहिक छूट हासिल है जबकि कुछ राज्यों में ऐसे विवाहों पर प्रतिबंध है.

हालांकि नई व्यवस्था संघीय मामलों में सभी राज्यों में लागू होगी, चाहे वे समलैंगिकों को मान्यता देते हों या नहीं.

भेदभाव

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शनिवार को मानवाधिकार अभियान के तहत आयोजित रात्रि भोज के दौरान अपने भाषण में होल्डर ने कहा कि वो सोमवार को एक ज्ञापन जारी करेंगे.

''इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि न्याय विभाग के कर्मचारियों को औपचारिक रूप से निर्देश दिया जाएगा कि वे समलैंगिक विवाहों को पूरी और बराबर मान्यता दें.''

उन्होंने कहा कि यह निर्देश प्रत्येक अदालत, प्रत्येक कार्यवाही और हर उस जगह लागू होगा जहां संयुक्त राज्य अमरीका की ओर से न्याय विभाग का एक भी सदस्य मौजूद है.

समलैंगिक जोड़े अब दिवालिया होने की संयुक्त घोषणा कर सकेंगे और ड्यूटी के दौरान मारे गए पुलिस अधिकारियों के साथियों को संघीय मुआवज़ा पाने का बराबरी का अधिकार लाभ मिलेगा.

समलैंगिकों को अपने साथी से मिलने के लिए संघीय कारागारों में प्रवेश का बराबर अधिकार होगा.

साथ ही जेल में बंद किसी समलैंगिक को अपने साथी की देखभाल के लिए या अंतिम संस्कार में जाने के लिए सहानुभूति के आधार पर बाहर आने की इजाज़त होगी.

अदालत में एक दूसरे के ख़िलाफ गवाही देने की अनिवार्यता से मुक्ति के लिए ''दंपति विशेषाधिकार'' का सिद्धांत भी उन पर लागू.

होल्डर ने कहा कि भेदभाव से लड़ने के लिए न्याय विभाग को आज ज्यादा सजग होना होगा.

कानूनी अड़चनें

समलैंकि विवाह के विरोधियों का कहना है कि परम्परागत विवाह खतरे में पड़ जाएगा.

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इमेज कैप्शन, समलैंकि विवाह के विरोधियों का कहना है कि परम्परागत विवाह खतरे में पड़ जाएगा.

ह्यूमन राइट कैंपेन के अध्यक्ष शाड ग्रिफिन कहते हैं कि इस घोषणा से असंख्य महिला और पुरूष समलैंगिक जोड़ों का जीवन बदल जाएगा.

एएफपी समाचार एजेंसी ने ग्रिफन के हवाले से कहा, ''आज हमारा राष्ट्र सभी के लिए बराबरी और निष्पक्षता के आदर्श के नजदीक पहुंच रहा है.''

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने पुरूष समलैंगिक जोड़ों को संघीय छूट देने से इनकार करने वाले एक कानून को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था. इसके बाद यह घोषणा सामने आई है.

वह फैसला केवल उन्हीं राज्यों पर लागू था जहां समलैंगिकों को कानूनी अधिकार प्राप्त हैं.

विरोधियों का कहना है कि नया निर्देश इस फैसले की बड़े ढीले ढंग से व्याख्या करता है.

केंजर्वेटिव लॉबी समूह ''फेमिली रिसर्च काउंसिल'' के पीटर स्प्रिंग का कहना है कि इस कदम से राज्य और संघीय कानूनों में टकराव की स्थित पैदा हो गई है.

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