अमरीका में समलैंगिक शादी पर ऐतिहासिक फ़ैसला

अमरीका में समलैंगिक शादी
    • Author, ब्रजेश उपाध्याय
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन

अमरीकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फ़ैसले में समलैंगिक शादियों को वही दर्जा देने का ऐलान किया है, जो एक मर्द और औरत के बीच हुई शादी को मिलता है.

सुप्रीम कोर्ट ने उस संघीय क़ानून को असंवैधानिक करार दिया है जिसके तहत शादी सिर्फ़ एक मर्द और औरत के बीच ही हो सकती है.

अमरीका में राजधानी वॉशिंगटन के अलावा कुल बारह राज्य हैं जहां समलैंगिक शादियों को क़ानूनी रूप से वैध माना जाता है. लेकिन इन राज्यों की सीमाओं से बाहर जाते ही समलैंगिक शादीशुदा ज़ोड़ों के अधिकार ख़त्म हो जाते हैं.

इसके अलावा अगर वो सरकारी नौकरी में हैं तो उन्हें टैक्स, स्वास्थ्य, पेंशन जैसे अन्य फ़ायदों से भी वंचित रहना पड़ता है.

मंगलवार की रात से ही सुप्रीम कोर्ट के बाहर डेरा डाले समलैंगिक ज़ोड़ों ने फ़ैसला आते ही तालियां बजाकर, एक दूसरे को गले लगाकर खुशी का इज़हार किया. वहां उत्सव सा माहौल था.

अपनी जोड़ीदार सैंडी के साथ वहां मौजूद क्रिस का कहना था, "अब हम भी शादी करेंगे और जो हक़ एक अमरीकी परिवार को मिलता है उसी हक़ के साथ यहां रहेंगे."

ऐतिहासिक क़दम

बराक ओबामा

राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ट्विटर पर जारी एक बयान में इस फ़ैसले को ऐतिहासिक क़दम कहा है. बाद में उनकी ओर से जारी एक लिखित बयान में कहा गया है- सुप्रीम कोर्ट ने एक ग़लती को सही किया है और आज हम एक बेहतर स्थिति में है.

अमरीका में समलैंगिकता एक संवेदनशील मामला रहा है और बराक ओबामा भी समलैंगिक शादी के ख़िलाफ़ रहे थे. पिछले साल उन्होंने इसके हक़ में बयान दिया और वो पहले राष्ट्रपति हैं जिन्होंने सत्ता में रहते हुए समलैंगिक शादी की वकालत की है.

माना जा रहा है कि देश की बदलती राजनीतिक सोच भी इस बदलाव की वजह है. हाल ही में हुए एक सर्वेक्षण में पाया गया कि 55 प्रतिशत अमरीकी समलैंगिक शादियों के समर्थन में हैं जबकि 44 प्रतिशत इसके विरोध में.

विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी समलैंगिक शादियों के ख़िलाफ़ रही है. कांग्रेस के निचले सदन में उनका बहुमत है और वहां स्पीकर जॉन बॉयनर ने इस फ़ैसले पर निराशा ज़ाहिर करते हुए कहा, "इस मामले पर एक राष्ट्रीय बहस जारी रहेगी और मेरी उम्मीद है कि आख़िरकार शादी को एक मर्द और औरत के रिश्ते के तौर पर ही परिभाषित किया जाएगा."

1996 के संघीय क़ानून के तहत समलैंगिक शादीशुदा जोड़ों में से एक की अगर मौत हो जाती थी तो दूसरे को अपने जोड़ीदार की संपत्ति या सरकार की ओर से मिलने वाले मुआवज़े मे हिस्सा नहीं मिलता था. सुप्रीम कोर्ट के इस फ़ैसले के बाद ये बदल जाएगा.

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