तीन हक्कानी नेटवर्क 'सदस्यों' की संपत्ति फ़्रीज़

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- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
ओबामा प्रशासन ने चरमपंथी संगठन हक्कानी नेटवर्क से कथित रूप से जुड़े तीन लोगों की संपत्ति फ़्रीज़ करने का एलान किया है.
किसी अमरीकी नागरिक को भी इन के साथ किसी तरह के वित्तीय लेन देन की इजाज़त नहीं होगी.
अमरीकी वित्त मंत्रालय का कहना है कि सैदुल्लाह जान, याहया हक्कानी और मोहम्मद ओमर ज़दरान को “स्पेशली डेज़िग्नेटेड ग्लोबल टेररिस्ट्स” का दर्जा दे दिया गया है यानि आतंकवादियों की उस खास विश्व सूची में शामिल कर लिया गया है जिससे उनकी वित्तीय संपत्ति पर ताला लग जाएगा.
अमरीका के लिए ख़तरा

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वित्त मंत्रालय के अधिकारी डेविड एस कोहेन का कहना है कि <link type="page"><caption> हक्कानी नेटवर्क</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/11/121106_international_others_haqqani_un_ia.shtml" platform="highweb"/></link> अमरीकी नागिरकों, सैनिकों और अफ़गानिस्तान-पाकिस्तान इलाके में अमरीका के लिए एक बड़ा ख़तरा है.
उनका कहना था, “इस नेटवर्क को तोड़ने का या उसे मिलने वाली आर्थिक मदद पर रोक लगाने का हमें जहां भी मौका मिलेगा हम वहां कार्रवाई करेंगे.”
अमरीका का मानना है कि <link type="page"><caption> हक्कानी नेटवर्क</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130906_haqqani_commander_killed_pakistan_ar.shtml" platform="highweb"/></link> का ठिकाना पाकिस्तान के उत्तरी वज़ीरिस्तान में है और वहां से ही वो अफ़गानिस्तान में हमले करता है.
इन तीनों व्यक्तियों में से मोहम्मद ओमर ज़दरान पर अफ़गान तालिबान के साथ संबंध रखने का भी आरोप है.
मंत्रालय का कहना है कि अफ़गानिस्तान में खोश्त सूबे में 100 से भी ज़्यादा चरमपंथियों की कमान ज़दरान के हाथों में थी.
उनका ये भी कहना है कि सिराजुद्दीन हक्कानी और बदरूद्दीन हक्कानी के नेतृत्व में 2011 में काबुल के इंटरकॉंटिनेंटल होटल पर हुए हमले के बारे में याहया हक्कानी को पहले से पता था. उस हमले में 18 लोग मारे गए थे और 12 से ज़्यादा घायल हुए थे.
'गहरे ताल्लुकात'

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उनका कहना है कि याहया <link type="page"><caption> ह्क्कानी नेटवर्क</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/pakistan/2012/09/120907_us_haqqani_sanction_sm.shtml" platform="highweb"/></link> के कमांडरों तक पैसे पहुंचाने का भी काम करते रहे हैं.
अमरीका का ये भी आरोप है कि हक्कानी नेटवर्क और पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई के गहरे ताल्लुकात हैं और 2011 में अमरीकी फ़ौज के सर्वोच्च अधिकारी माइक मलेन ने इस नेटवर्क को आईएसआई का ही एक धड़ा करार दिया था.
पाकिस्तान इन आरोपों से इंकार करता है.
अमरीकी कांग्रेस ने अपने बजट दस्तावेज़ में ये शर्त भी रखी है कि अगर पाकिस्तान हक्कानी नेटवर्क पर रोक लगाने में अमरीका की मदद करता है तभी उसे आर्थिक मदद जारी की जाए.
हक्कानी नेटवर्क के ख़िलाफ़ ओबामा प्रशासन ने ये एलान ऐसे वक्त पर किया है जब अमरीका वहां से अपनी फ़ौज की वापसी की तैयारी कर रहा है.
'अटकलबाज़ी'
राष्ट्रपति ओबामा के साथ बातचीत के बाद कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने पत्रकारों को बताया है कि ओबामा 2017 के बाद अफ़गानिस्तान में एक भी अमरीकी सैनिक रखने के हक़ में नहीं हैं.
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इसकी पुष्टि तो नहीं की है लेकिन इतना ज़रूर कहा, “कुछ सिनेटर एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहां अमरीकी फ़ौज बरसों तक अफ़गानिस्तान में रहें. लेकिन राष्ट्रपति ओबामा ऐसी दुनिया नहीं चाहते.”
ओबामा 2014 के अंत तक अफ़गानिस्तान से फ़ौज वापस लाने का एलान कर चुके हैं लेकिन कुछ फ़ौजी वहां बने रहेंगे. उनकी संख्या क्या होगी इस पर अभी भी अटकलबाज़ी चल रही है और माना जा रहा है कि वो तस्वीर तभी साफ़ होगी जब अफ़गानिस्तान अमरीका के साथ दोतरफ़ा सुरक्षा समझौते पर दस्तखत कर लेगा.
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