अभी तक ऑपरेशन ब्लू स्टार में भूमिका के सबूत नहीं: कैमरन

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ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि अभी तक ऐसे कोई सबूत नहीं हैं जो ये बताएँ कि ब्रिटेन के स्पेशल फोर्स ने 1984 के ऑपरेशन ब्लू स्टार में कोई भूमिका निभाई थी.
हालाँकि उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि वो इस मामले पर कोई फ़ैसला नहीं देना चाहते.
ब्रितानी संसद में उन्होंने कहा, "मैं इसके निष्कर्ष पर पहले ही कोई फ़ैसला नहीं देना चाहता. लेकिन मैंने यही देखा है कि अभी तक इसके कोई सबूत नहीं जो भारत के उस समय के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के दावे का विरोध करते हैं, जिन्होंने ये कहा है कि ये ऑपरेशन भारतीय सेना ने अकेले ही किया था."
कैमरन ने ट्विटर पर भी इस बारे में लिखा है. उन्होंने लिखा है, "भारत के अमृतसर में 30 साल पहले जो हुआ, उसे भुलाया नहीं जा सकता. मैं इस मामले पर चिंताओं को समझता हूँ. ऑपरेशन ब्लू स्टार से ब्रिटेन के संबंध में बारे में जाँच से ही सच सामने आ पाएगा."
ब्रितानी प्रधानमंत्री का बयान ऐसे समय आया है, जब ऐसा दावा किया जा रहा है कि ब्रिटेन के स्पेशल एयर सर्विसेज़ यानी एसएएस के कमांडरों ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से सिख चरमपंथियों को निकालने के लिए भारतीय सेना के अभियान में मदद की थी.
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कैमरन ने कहा, "इस मामले में तह तक जाने की आवश्यकता है. इस मामले की आधिकारिक जाँच को सार्वजनिक किया जाएगा."
कैमरन ने कैबिनेट सेक्रेटरी जेरेमी हेवुड को इस मामले की जाँच के आदेश दिए हैं.
दरअसल पिछले दिनों सार्वजनिक हुए ख़ुफ़िया दस्तावेज़ के सामने आने के बाद ये विवाद उठ खड़ा हुआ है. इस दस्तावेज़ में कथित रूप से दावा किया गया है कि ब्रितानी स्पेशल फोर्स के एक अधिकारी ने भारतीय सेना को इस कार्रवाई में सलाह दी थी.
ब्रिटेन की लेबर पार्टी के सांसद टॉम वाटसन का दावा है कि उन्होंने इन दस्तावेज़ों को देखा है. उनके मुताबिक ये दस्तावेज़ उस वक्त की सरकार की भूमिका पर कई सवाल खड़े करते हैं.
वाटसन ने कहा, "गोपनीयता नियम की 30 साल की सीमा पूरी होने के बाद सामने आए दस्तावेज़ों के मुताबिक ब्रिटेन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की योजना बनाने और कार्रवाई में भारत सरकार की मदद की थी."
भारत सरकार के श्वेत पत्र के मुताबिक ऑपरेशन ब्लूस्टार में चरमपंथियों समेत 554 नागरिक मारे गए थे. हालाँकि सिख संगठनों का दावा है कि इस कार्रवाई में कई हज़ार लोग मारे गए थे.
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