नहीं लगता भारत ने मदद ली होगी: मार्क टली

इमेज स्रोत, Satpal Danish
- Author, मार्क टली
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार
'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के दौरान भारत को ब्रिटेन से मदद मिलने की ख़बरें आ रही हैं. अगर यह सच है तो मेरे लिए ये बहुत अजीब बात है क्योंकि उस ज़माने में भारत और ब्रिटेन के रिश्ते बहुत ख़राब थे.
इंदिरा गांधी ब्रिटेन सरकार से बहुत नाराज़ थीं क्योंकि वे सोचती थीं कि ब्रितानी पुलिस वहाँ मौजूद खालिस्तानी मूवमेंट को काबू में रखने के लिए कोई कोशिश नहीं कर रही थी.
इंदिरा चाहती थीं कि ब्रितानी पुलिस खालिस्तानियों को गिरफ़्तार कर के भारत भेजे. लेकिन ऐसा हुआ नहीं.
ऐसे में सवाल उठता है कि वे तत्कालीन ब्रितानी प्रधानमंत्री मार्गेरेट थैचर से कैसे 'ऑपरेशन ब्लूस्टार' के लिए मदद माँग सकती थीं.
एक और अहम बात यह है कि ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान भारतीय सेना समूचे इलाक़ों में तैनात थी और सेना की मौज़ूदगी साफ़ देखी जा सकती थी. मैंने देखा दो दिन पहले से ही पूरा इलाक़ा फ़ौज़ के कब्ज़े में था.
इसलिए इस ऑपरेशन के गुप्त या अचानक होने का सवाल नहीं था. लेकिन फिर भी यह ऑपरेशन पूरी तरह गुप्त रहा और अचानक किया गया.
नए उद्घाटन का असर

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी शुरू में 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' करना नहीं चाहती थीं. इसलिए ही ऑपरेशन करने के लिए इतना वक़्त लगा. ऑपरेशन से पहले उन्होंने भारतीय फ़ौज़ से बात की और इसकी ज़िम्मेदारी दी.
सवाल यह भी उठ रहा है कि इस नए उद्घाटन का क्या असर हो सकता है. मुझे लगता है कि ब्रिटेन की अंदरूनी राजनीति पर इसका कुछ असर हो सकता है लेकिन इसका भारत और ब्रिटेन के रिश्तों पर कोई असर नहीं होगा.
दो महीने पहले ही मैंने सेना में रहे एक बड़े अधिकारी से बात की थी, जो जनरल बराड़ नहीं थे, उन्होंने बताया था कि इस ऑपरेशन को पूरी तरह भारत ने ही अंजाम दिया था.
अपनी किताब 'अमृतसरः मिसेज़ गांधीज़ लास्ट बैटल' लिखने के दौरान मैं ब्रितानी उच्चायोग के एक फ़ौजी सलाहकार से भी मिला था. उन्होंने मुझे बताया था कि वे भारत को चरमपंथ के मुद्दे पर सलाह देने की कोशिश कर रहे थे क्योंकि ब्रिटेन के पास उत्तरी आयरलैंड का अनुभव था.
लेकिन हर बार भारत ने सुरक्षा मामलों में किसी भी प्रकार की सलाह लेने से इनकार किया था.
(बीबीसी संवाददाता वर्तिका से बातचीत पर आधारित)
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