'बदले की भावना में' खाया दुश्मन का मांस

सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक (सीएआर) में जातीय हिंसा में एक आदमी का मांस खाने वाले व्यक्ति ने बीबीसी को बताया है कि वह अपने परिजनों की मौत का 'बदला' लेना चाहता था.
ख़ुद को 'मैड डॉग' कहने वाला यह व्यक्ति ईसाइयों की उस भी़ड़ में शामिल था जिसने राजधानी बेंगुई में एक मुस्लिम व्यक्ति पर हमला किया था.
उसने कहा कि वह बहुत 'ग़ुस्से' में था क्योंकि मुसलमानों ने उसकी गर्भवती पत्नी, साली और उसके बच्चे को मार दिया था.
ईसाई बहुल देश सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में पिछले साल दिसंबर में शुरू हुई हिंसा में कम से कम 1,000 लोग मारे जा चुके हैं.
इस जातीय संघर्ष में हज़ारों लोगों को विस्थापित होना पड़ा है.
संवाददाताओं का कहना है कि फ्रांसीसी सेना की मध्यस्थता के बाद विभिन्न लड़ाकू गुटों ने हथियार डाल दिए हैं जिसके बाद बेंगुई में स्थिति में सुधार आया है.
अपने मुसलमान राष्ट्रपति के इस्तीफ़ा देने से खुश ईसाइयों ने सड़कों पर जश्न मनाया था. कभी इस संघर्ष में ईसाई पीड़ित थे लेकिन जब उन्हें सत्ता मिली तो मुसलमानों की मुश्किल बढ़ती चली गई.
'ज़िंदा जला दिया'
'मैड डॉग' ने बीबीसी के पॉल वुड को बताया कि उसने उस व्यक्ति को एक मिनीबस में बैठे देखा और फिर उसका पीछा करने का फ़ैसला किया.
उसने बताया कि जैसे-जैसे वह आगे बढ़ते गया उसके साथ भीड़ जुटती गई और फिर वह क़रीब 20 युवकों की अगुवाई कर रहा था.
उन्होंने बस ड्राइवर को बस रोकने के लिए मजबूर किया और फिर उस व्यक्ति को बस से उतारकर सड़क पर ले आए. उसकी जमकर पिटाई की गई, उसे चाकू मारा गया और फिर उसे ज़िंदा जला दिया गया.
हमारे संवाददाता के मुताबिक़ इस घटना के फ़ुटेज में 'मैड डॉग' आदमी का पैर खाते हुए दिखाई दे रहा है.

'किसी ने नहीं रोका'
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक़ किसी ने भी 'मैड डॉग' को ऐसा करने से रोकने की कोशिश नहीं की.
हमारे संवाददाता का कहना है कि सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक में नरमांस भक्षण विरले ही होता है और देश में जातीय संघर्ष हाल ही में उभरा है.
लेकिन उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि कई ईसाई लड़ाके जादू-टोने में विश्वास करते हैं.
उनमें से कई लड़ाके ऐसे तावीज़ पहनते हैं जिनमें नरमांस होता है. यह उन लोगों का मांस होता है जिन्हें इन लड़ाकों ने मारा है. उनका विश्वास है कि ऐसा करने से उनसे कोई जीत नहीं सकेगा.
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