सीरिया: रासायनिक हथियारों की पहली खेप रवाना

सीरिया के रासायनिक हथियारों से जुड़ी सामग्री की पहली खेप देश के उत्तरी बंदरगाह लाटकिया से मंगलवार को रवाना हो गई है.
रासायनिक हथियारों से लदे डेनमार्क के जहाज़ को रूस और चीन के जंगी जहाज़ सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं.
सीरिया के ये रासायनिक हथियार, संयुक्त राष्ट्र समर्थित एक समझौते के तहत हटाए जा रहे हैं. उन्हें अब नष्ट किया जाना है.
वैसे इन हथियारों की पहली खेप को बीते साल 31 दिसम्बर की तय समयसीमा के भीतर सीरिया से हटाया जाना था.
लेकिन अधिकारी इस अवधि के दौरान हथियारों को लाटकिया बंदरगाह तक नहीं पहुंचा पाए थे.
इटली है मंज़िल
डेनमार्क के इस जहाज़ की मंज़िल इटली है जहां से इन रासायनिक हथियारों को एक अमरीकी नौसैनिक जहाज़ पर चढ़ाया जाएगा.

अमरीकी जहाज़ से इन हथियारों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ले जाने की योजना है जहां टाइटेनियम से बने एक विशेष टैंक में इन्हें नष्ट किया जाएगा.
ये पूरी कवायद संयुक्त राष्ट्र और ऑर्गेनाइज़ेशन फ़ॉर प्रोहिबिशन ऑफ़ कैमिकल वैपंस (ओपीसीडब्ल्यू) की संयुक्त मुहिम है.
सीरिया के रासायनिक हथियारों को हटाने का समझौता बीते साल अमरीका और रूस की मध्यस्थता में हुआ था. उससे पहले 21 अगस्त को सीरिया की राजधानी दमिश्क के निकट घोउटा के आसपास के इलाक़ों में ज़हरीली गैस सारिन से भरे रॉकेट दागे गए थे.
तब इन हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए थे. पश्चिमी देशों का कहना था कि सिर्फ़ सीरिया की फौज़ ही इस तरह का हमला कर सकती थी, लेकिन राष्ट्रपति बशर अल असद इसके लिए विद्रोही लड़ाकों को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं.
बस जून तक का वक्त
ओपीसीडब्ल्यू ने ये नहीं बताया है कि पहली खेप में सीरिया के कितने हथियारों को हटाया गया है. सीरिया के पास इस तरह के लगभग 1,300 टन हथियारों का ज़ख़ीरा है.
इन तमाम हथियारों को इसी वर्ष जून महीने तक पूरी तरह से नष्ट करना है.
इन सबसे घातक हथियारों में लगभग बीस टन ऐसे रासायनिक हथियार भी हैं जिनमें ज़हरीली सल्फर-मस्टर्ड गैस का इस्तेमाल किया गया है.
सीरिया के इस ज़ख़ीरे में ऐसे हथियार भी हैं जिनमें ज़हरीली सरीन गैस और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने वाला वीएक्स एजेंट शामिल है.
अमरीका का मानना है कि इन हथियारों को हवाई जहाज़, बैलिस्टिक मिसाइल और रॉकेट के ज़रिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
सीरिया ने बीते साल सितम्बर में रासायनिक हथियारों की रोकथाम संबंधी संधि को स्वीकार कर लिया था.
हालांकि कई वर्षों पहले साल 1972 में सीरिया ने जैविक और ज़हरीले हथियारों की रोकथाम संबंधी संधि पर भी दस्तख़त किए थे लेकिन उसने कभी इस पर अमल नहीं किया था.
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