अमरीका में ख़ुफिया निगरानी पर लगाम की सिफारिश

अमरीका में ख़ुफिया निगरानी कार्यक्रम पर सलाह देने वाली समिति ने इस विवादास्पद कार्यक्रम को खत्म करने का सुझाव तो नहीं दिया है लेकिन इस पर लगाम कसने और इसे पारदर्शी बनाने पर बल दिया है.

बीबीसी संवाददाता ब्रजेश उपाध्याय ने बताया, "समिति का सुझाव है कि भविष्य में विदेशी नेताओं की ख़ुफिया निगरानी के लिए उच्चतम स्तर पर अनुमति लेनी होगी. यानी अमरीकी राष्ट्रपति की अनुमति के बगैर ये निगरानी नहीं की जा सकती है."

इसके अलावा इसमें सुझाव दिया गया है कि अमरीकी नागरिकों के टेलीफोन, ईमेल और टेक्स्ट मैजेस से जुटाई जानकारी <link type="page"><caption> एनएसए</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131205_washington_post_nsa_survellience_ar.shtml" platform="highweb"/></link> के पास न रहें. इसे किसी तीसरी पार्टी या जिस टेलीफोन कंपनी के जरिए ये जानकारी आई है, उसके पास रहने दिया जाए.

इस समिति का गठन राष्ट्रपति ओबामा ने किया था. इस समिति ने अपनी 308 पन्नों की रिपोर्ट में 46 सिफारिशें की है.

अदालत की मंजूरी

स्नोडेन से मिली जानकारी के मुताबिक अमरीका अपने मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्षों की निगरानी भी करता रहा है.
इमेज कैप्शन, स्नोडेन से मिली जानकारी के मुताबिक अमरीका अपने मित्र देशों के राष्ट्राध्यक्षों की निगरानी भी करता रहा है.

राष्ट्रपति ओबामा ने इस समिति का गठन उस समय किया था जब एनएसए के लिए काम करने वाले एडवर्ड स्नोडेन ने यह जानकारी लीक कर दी कि किस तरह अमरीका अपने मित्र देशों समेत अपने नागरिकों की भी निगरानी करता है. फिलहाल स्नोडन रुस में शरण लिए हुए हैं.

इस सिफारिशों में कहा गया है कि किसी एक व्यक्ति की टेलीफोन बातचीत की जानकारी लेने से पहले संघीय अदालत की मंजूरी लेनी होगी.

इसमें ये भी कहा गया है कि अदालत को यह बताता होगा कि यह जानकारी आतंकवाद से जुड़ी है या फिर किसी दूसरे ख़ुफिया कार्यक्रम से.

अमरीका के इस <link type="page"><caption> निगरानी कार्यक्रम</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/12/131217_nsa_surveillance_ra.shtml" platform="highweb"/></link> को संघीय जज द्वारा असवैंधानिक बताए जाने के बाद इसकी समीक्षा की गई.

एनएसए का कहना है कि इस कार्यक्रम से वो केवल यह आंकड़ा जुटाते थे कि किन नंबरों पर बातचीत की जा रही है. किन नंबरों पर अधिक बात की जा रही है और फिर शक होने पर गहराई से जांच की जाती थी.

विशेषज्ञों की राय

पूर्व खूफिया अधिकारियों का कहना है कि एनएसए पर लगाम लगाने की कोशिश से सुरक्षा-व्यवस्था कमजोर होगी.
इमेज कैप्शन, पूर्व खूफिया अधिकारियों का कहना है कि एनएसए पर लगाम लगाने की कोशिश से सुरक्षा-व्यवस्था कमजोर होगी.

पूर्व <link type="page"><caption> ख़ुफिया अधिकारियों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130622_us_nsa_leaks_snowden_sp.shtml" platform="highweb"/></link> का कहना है कि एनएसए पर लगाम लगाने की जो कोशिशें हो रही हैं, उससे देश की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होगी और इस कार्यक्रम का मकसद किसी की निजी जिंदगी में ताकझांक करना नहीं है.

कुछ दूसरे जानकारों का कहना है कि ये सुधार कांग्रेस और ओबामा प्रशासन को एनएसए में ज़रूरी सुधार के लिए प्रोत्साहित करेंगे.

राष्ट्रपति बराक ओबमा ने बुधवार को पहले ख़ुफिया और संचार तकनीक पर बने समीक्षा समूह के पांच सदस्यों से मुलाकात की.

व्हाइट हाउस के प्रवक्ता जे कार्ने का कहना था इस समीक्षा बैठक में जो कुछ सिफारिशें की गई हैं उसका प्रकाशन जनवरी में होना था लेकिन मीडिया में इसके बारे में 'गलत' रिपोर्ट आने के कारण इसका प्रकाशन अभी किया जा रहा है.

निजता का भरोसा

अमरीका में आम नागरिकों ने इस निगरानी कार्यक्रम का पुरजोर विरोध किया है.
इमेज कैप्शन, अमरीका में आम नागरिकों ने इस निगरानी कार्यक्रम का पुरजोर विरोध किया है.

व्हाइट हाउस ने एक वक्तव्य जारी कर कहा है कि ओबामा ने समिति की सिफारिशों से आगे जा कर इस मुद्दे पर विचार किया है और ''ये माना है कि इस समूह ने आमराय से फैसला किया है, और इस समिति में शामिल लोग आंतकवाद निरोधी, ख़ुफिया, समान नागरिक, निजता जैसे क्षेत्रों में काम कर चुके हैं.''

ओबामा ने इस समूह से कहा, ''अमरीका अपनी <link type="page"><caption> ख़ुफिया जानकारी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/11/131031_us_spy_leaks_ssr.shtml" platform="highweb"/></link> का इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए करता है और वो ये काम विदेश नीति, निजता और सामान नागरिकता, लोगों के भरोसे को ध्यान में रखकर करता है.''

ये माना जा रहा है कि समिति की तरफ से जो सिफारिशों की गई है उसका ख़ुफिया अधिकारी जोर-शोर से विरोध करेंगे. ऐसे में इनमें से कितनी सिफारिशें ओबामा प्रशासन मंजूर करेगा वो अभी अस्पष्ट है.

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