अमरीकी निगरानीः ब्राजील मुखर, तो भारत चुप क्यों?

- Author, शोभन सक्सेना
- पदनाम, साओ पाअलो(ब्राज़ील) से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
अमरीका की नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (एनएसए) की ओर से विदेशी नेताओं की जासूसी के मसले पर ब्राज़ील का रुख़ रास्ता दिखाता है तो भारत ने चुप्पी सी साध ली है.
ब्रिटेन के अख़बार 'गार्डियन' में छपी ख़बर के अनुसार अमरीकी सुरक्षा एजेंसी ने दुनिया के 35 नेताओं के फ़ोन टैप किए हैं.
अमरीका की ओर से जासूसी कराए जाने के मुद्दे पर कुछ यूरोपीय नेताओं ने अपना गुस्सा ज़ाहिर किया था.
जर्मन चांसलर अंगेला मैर्केल मैर्केल ने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को फ़ोन करके एनएसए की गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की बात कही थी.
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान भारत की प्रतिक्रिया काफ़ी रोचक थी.
भारतीय प्रधानमंत्री के प्रवक्ता ने कहा, "प्रधानमंत्री मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल नहीं करते हैं और उनका ईमेल अकाउंट भी नहीं है. प्रधानमंत्री कार्यालय ईमेल का उपयोग करता है लेकिन उनके पास कोई व्यक्तिगत मेल नहीं है. हमारे पास ऐसी कोई सूचना नहीं है और यह हमारे लिए चिंता की कोई बात भी नहीं है."
ब्राज़ील का रुख
जासूसी के आरोप सामने आने के बाद ब्राज़ील की राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ़ ने सितंबर में अपनी अमरीकी यात्रा रद्द कर दी थी, वहीं भारत ने इन आरोपों को ही ख़ारिज कर दिया था.
जून में पहली बार गार्डियन ने एनएसए के जासूसी से जुड़े दस्तावेज़ सार्वजनिक किए थे. उस समय भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था, "यह जासूसी नहीं है."

मैंने सितंबर में सीआईए के पूर्व कॉन्ट्रैक्टर एडवर्ड स्नोडन की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ के आधार पर ग्लेन ग्रीन वाल्ड के साथ मिलकर 'द हिंदू' अख़बार के लिए अनके लेख लिखे.
उसमें मैंने यह बताया कि अमरीका में भारतीय दूतावासों, सरकार के नेताओं, देश की सेना, परमाणु कार्यक्रमों के साथ-साथ लाखों आम नागरिकों की जासूसी की बात कही गई थी. लेकिन भारत की सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी सी ओढ़ ली थी.
यह बेहद चौंकाने वाला था. यह इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि ब्रिक (ब्राज़ील, भारत, रूस, चीन) समूह के देश अमरीका की ख़ुफिया निगरानी कार्यक्रम के निशाने पर थे और इन देशों में भारत पहले नंबर पर था.
चुप्पी साधी
एनएसए के ख़ुफिया निगरानी कार्यक्रम में शामिल सभी देशों में भारत का पाँचवा स्थान था. यहाँ के टेलीफ़ोन और इंटरनेट नेटवर्क से 30 दिनों के भीतर अरबों सूचनाएं बटोरी गईं. रूस और चीन से भी ज़्यादा आँकड़े भारत से बटोरे जा रहे थे.

भारत की सरकार नागरिकों की निजता के अधिकार के सवाल पर केवल ज़ुबानी जमा ख़र्च कर रही है.
15 अक्तूबर को ब्राज़ील में संयुक्त प्रेस कांफ्रेस के दौरान भारत के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने जासूसी से जुड़े सवाल के जवाब में कहा, "अधिकांश देश मिलकर साथ काम करना चाहेंगे ताकि एक ऐसा तंत्र विकसित हो सके जिससे नागरिकों की निजता, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, देश की संप्रभुता और साइबर स्पेस की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.''
सलमान ख़ुर्शीद ने अमरीका का नाम तक नहीं लिया.
लेकिन इसके ठीक विपरीत एनएसए की जासूसी के जवाब में ब्राज़ील के विदेश मंत्री लुइस मैकाडो ने अपने जवाब में अमरीका का ज़िक्र किया.
उन्होंने कहा, "अमरीका पहले ही कह चुका है कि मित्र देशों के संदर्भ में जासूसी के तंत्र पर फिर से विचार करेगा. अब हम पुर्नविचार पर अमरीका की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहे हैं. इस समय गेंद उनके पाले में है."
ब्राज़ील के क़दम
ब्राज़ील भी भारत की तरह एक उभरती हुई अर्थव्यवस्था वाला देश है और ब्रिक्स का सदस्य है. उसने अमरीकी एजेंसी की जासूसी का आगे बढ़कर विरोध किया है. इस मुद्दे पर ब्राज़ील ने कई क़दम उठाए हैं:
1. सितंबर में अमरीका को कड़ा संदेश देते हुए ब्राज़ील की राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ़ ने अमरीका की यात्रा स्थगित कर दी थी.
2. 24 सितंबर को रूसेफ़ ने अमरीका के ख़ुफिया निगरानी कार्यक्रम के विरोध में दुनिया भर के नेताओं को एकजुट किया. उन्होंने इंटरनेट ट्रैफिक और नागरिकों की निजता की रक्षा के लिए नए नियमों का प्रस्ताव भी रखा.

3. ब्राज़ील की सरकार 'मैक्रो सिविल' के नाम से एक नया क़ानून बनाने की बात कह रही है, इससे दुनिया भर के इंटरनेट आंकड़ों पर अमरीकी दबदबे को ख़त्म किया जा सकेगा. यह क़ानून फ़ेसबुक और गूगल जैसी कंपनियों के लिए ब्राज़ील से संबंधित आंकड़ों को ब्राज़ील में ही इकट्ठा करने को अनिवार्य बना देगा.
4. ब्राज़ील अन्य दक्षिण अफ्रीकी देशों और इंटरनेट कंपनियों के साथ मिलकर "इंटरनेट का प्रसार करने वाली आधारभूत व्यवस्था के अंतरराष्ट्रीयकरण" और इसमें अमरीका की प्रमुख भूमिका को सीमित करने के लिए काम कर रहा है.
5. ब्राज़ील ने कैबिनेट स्तर के अधिकारियों, इंटरनेट उद्योग के प्रमुख प्रबंधकों और सिविल सोसायटी के समूहों को वैश्विक सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिया है. अगले साल 23-24 अप्रैल को वर्ल्ड वाइड वेब का एक सम्मेलन ब्राज़ील के साओ पाअलो शहर में होगा.
6. ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने इसके लिए कुछ महत्वाकांक्षी क़दम उठाने के सुझाव रखे हैं. उदाहरण के लिए ऐसी सबमरीन केबल का निर्माण, जो अमरीका से न गुज़रती हों, ब्राज़ील में इंटरनेट एक्सचेंज प्वाइंट बनाना और स्टेट पोस्टल सर्विस के माध्यम से ईमेल सर्विस की शुरूआत करना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अमरीका उनके इंटरनेट ट्रैफ़िक और डेटा की जासूसी न कर सके.
7. एक क़दम और आगे बढ़कर ब्राज़ील ने अपनी साइबर सुरक्षा क्षमताओं को बेहतर करने के लिए अर्जेंटीना के साथ हाथ मिलाया है.
'भारत का व्यवहार चौंकाने वाला'
अगर आप इसकी तुलना भारत के एनएसए की जासूसी से बचाव के लिए उठाए गए क़दमों से करें तो आपके सामने भारत के नर्म व्यवहार की एक चौंकाने वाली तस्वीर उभरती है.
'द हिंदू' अख़बार में प्रकाशित लेखों में यह बात सामने आई कि एनएसए की निगरानी का संबंध चरमपंथ से नहीं था जैसा कि भारत और अमरीका के अधिकारी दावा करते रहे हैं.
इसकी बजाय अधिकांश निगरानी भारत की घरेलू राजनीति, देश की रणनीति और व्यावसायिक हितों पर केंद्रित थी.

अमरीकी निगरानी कार्यक्रम (प्रिज़्म) के तहत लाइव कम्यूनिकेशन पर सीधे नज़र रखी गई और पहले से इकट्ठा की गई सूचनाओं का इस्तेमाल भी दुनिया के सबसे बड़े निगरानी तंत्र से किया गया.
इसमें भारत से जुड़े तीन मुद्दों भू-राजनैतिक और आर्थिक हित, न्यूक्लियर स्पेस और राजनीति से जुड़े आंकड़े बटोरे गए.
वास्तव में भारत ने जिस तरह से एनएसए की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया दी है, उससे लगता है कि भारत को अमरीका के ख़ुफिया निगरानी कार्यक्रम की कोई चिंता नहीं है.
यह भी हो सकता है कि सरकार अपने नागरिकों से कुछ गंभीर तथ्य छिपाने की कोशिश कर रही है.
<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> यहां</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> क्लिक करें. आप ख़बरें पढ़ने और अपनी राय देने के लिए <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> पन्ने पर भी आ सकते हैं और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












