कैसा होता है सैकड़ों लाशों को पानी से निकालना?

"समुद्र में 30 मीटर नीचे, जहाज़ में हर तरफ़ शव पड़े हुए थे. हर खिड़की, हर कोने, जगह पर लोग एक दूसरे से लिपटे हुए थे. उस मंज़र को याद कर मैं कांप जाता हूँ. उन्हें मरे हुए कुछ दिन हो गए थे, शव अकड़ गए थे. शवों को बाहर निकालने के लिए इन्हें एक दूसरे से अलग करना चुनौतीपूर्ण थे, जैसे वे ख़ुद ही अलग न होना चाहते हों. ये बहुत दुखदायी था और मेरे कुछ सहयोगी तो रो पड़े थे."
ये अनुभव थे गोताखोर एन्टोनियो डेमुको के, जिनकी टीम को इस साल अक्तूबर में दक्षिणी इतालवी द्वीप लैंपादूसा के तट के निकट डूबे समुद्री जहाज़ से 350 से अधिक मृतकों को पानी से बाहर निकालने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी.
अफ़्रीकी प्रवासियों को ले जा रहे इस <link type="page"><caption> समुद्री जहाज़ पर </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/10/131004_italy_boat_mishap_sb.shtml" platform="highweb"/></link> लगभग 500 लोग सवार थे जिनमें से तटरक्षक लगभग 150 लोगों को ही बचा पाए. यह समुद्री जहाज़ लीबिया के मिस्राता से आ रहा था और मोटर बंद हो जाने के बाद उसमें पानी भरना शुरू हो गया और जहाज़ डूब गया.
एन्टोनियो डेमुको के गोताखोरों की टीम को 350 से अधिक लाशों को समुद्र से बाहर निकालना था. उन्होंने अपने दर्दनाक अनुभवों को बीबीसी के आउटलुक कार्यक्रम के साथ साझा किया.
भयावह
डेमुको बताते हैं, ''हादसे के बाद हमें बचाव अभियान के लिए सूचना दी गई. हमने टीवी और रेडियो पर हादसे के बारे में सुना था. लेकिन हमें स्थिति का सही अंदाजा घटनास्थल पर पहुँचने के बाद ही हुआ. मौसम के बहुत ज्यादा खराब होने की वजह से बचाव अभियान में हमें दो दिन की देरी हुई. ''
उनके अनुसार, ''हादसे में बचाए गए लोगों से हमें पता चला था कि समुद्री जहाज़ पर लगभग 500 लोग सवार थे और 300 से ज्यादा लोग लापता थे. परिस्थितियाँ बहुत खराब और चुनौतीपूर्ण थीं. गोता लगाने के बाद पानी के अन्दर रहने के लिए दस मिनट के दौरान सांस लेना, शवों को ढूंढना, और बाहर निकालकर सतह पर लाना बहुत ही मुश्किल था.''

डेमुको के मुताबिक जब उन्होंने पहली बार डूबे हुए जहाज़ को देखा, तो वो बहुत दुःखी हो गए. वे कहते हैं, "जहाज पर हर जगह, यहाँ तक कि खिड़कियों में भी शवों के ढेर थे. शव एक दूसरे से लिपटे हुए थे. जहाज पर अधिकतर युवा लोगों के शव थे. पूरा मंजर बहुत ही भयावह था."
'हर दिन और शव मिल जाते'
ख़ुद के डर जाने का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया, ''एक युवा लड़के के शव को निकालना मेरे लिए सबसे कठिन था, और इस दौरान मुझे थोड़ा डर भी लगा. हमें लग रहा था कि हम ऐसे लोगों को एक-दूसरे से अलग कर रहे हैं, जो वाकई में कभी एक दूसरे से अलग होना ही नहीं चाहते थे.''
डेमुको के अनुसार उनकी पूरी टीम के लिए यह भावनात्मक रूप से बहुत ही कठिन समय था. ये काम करते समय कई साथियों की आँखों में आँसू भर रहे थे और पूरी टीम के लिए यह करियर का सबसे भयावह और दर्दनाक अनुभव था.
डेमुको बताते हैं, ''हमने शवों को खोजने के एक सप्ताह के अभियान के अंतिम दिन तक 366 शवों को बाहर निकाला. हमें दो-तीन दिनों के बाद लगता था कि शायद अगले दिन और शव नहीं मिलेंगे, लेकिन हर दिन जब हम शुरुआत करते तो हमें शव मिलने शुरु हो जाते. शवों की गिनती खत्म ही नहीं हो रही थी. मेरे अब तक के मिशनों में लैंपादूसा सबसे भयावह और दर्दनाक रहा है.''
कैसे बने गोताखोर?
इतालवी पुलिस गोताखोर बनने का करियर अपनाने पर एंटोनियो डेमुको कहते हैं, ''मुझे बचपन से ही गोताखोरी का जुनून था. मेरा जन्म समुद्र तट पर स्थित एक शहर में हुआ था. इसलिए मैं बचपन से ही गोताखोरी करता था. बड़े होने पर मैं मिलिट्री से जुड़ गया. जब गोताखोर बनने के लिए पूछा गया तो मैंने अपनी इच्छा जताई. फिर बाद में मैं एक पुलिस गोताखोर बन गया.''
गोताखोरी के लिए विशेष प्रशिक्षण लेने पर डेमुको कहते हैं, ''हाँ मुझे इसके लिए बहुत ही कठिन प्रशिक्षण दिया गया. पुलिस गोताखोर बनने के लिए भर्ती हुए लगभग 100 लोगों में से सिर्फ़ कुछ ही लोगों को प्रशिक्षण के बाद गोताखोरी का लाइसेंस मिला.''
अपने अब तक के करियर में अलग-अलग ऑपरेशन में भाग लेने पर डेमुको कहते हैं, ''मैंने अभी तक कई अलग-अलग तरह के ऑपरेशन में काम किया है. इतालवी पुरातत्व विभाग के लिए हथियारों की खोज, पुलिस के लिए ड्रग्स खोजने से लेकर मछुआरों के शवों या कोई जहाज़ डूबने पर लोगों के शवों की खोज की है लेकिन ताज़ा अनुभव बहुत ही दर्दनाक था.''
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