बातचीत का मक़सद असद को हटाना: अमरीका

अमरीका ने दोहराया है कि जिनेवा में अगले वर्ष जनवरी में संयुक्त राष्ट्र के तहत होने वाली बातचीत का मक़सद सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद को उनके पद से हटाना होना चाहिए.
व्हाइट हाउस के एक प्रवक्ता जोश अर्नेस्ट ने कहा है कि ये बातचीत सीरया में नई सरकार के गठन और सीरियाई लोगों के कष्ट दूर करने का बेहतरीन मौका होगा.
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत लख़दर ब्राहिमी ने कहा है कि इस बातचीत में शामिल होने वाले भागीदारों की सूची को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है. उन्होंने सीरियाई पक्षों से इस साल के अंत से पहले अपने प्रतिनिधियों के नाम देने के लिए कहा है.
इस बातचीत का आयोजन अमरीका, रूस के साथ मिलकर कर रहा है जिसमें लख़दर ब्राहिमी भी शामिल होंगे.
संयुक्त राष्ट्र के साथ ही अमरीका और रूस, सीरिया में जारी संघर्ष पर दोनों पक्षों को किसी राजनीतिक समाधान के लिए राज़ी करने का कई महीनों से प्रयास कर रहे हैं.
लेकिन इस मुद्दे पर विवाद रहे हैं कि जिनेवा में होने वाली इस बैठक में कौन हिस्सा लेना और कौन हिस्सा नहीं लेगा.
सीरिया का विपक्ष अभी तय नहीं कर पाया है कि उसका कौन सा समूह इस बैठक में उसका प्रतिनिधित्व करेगा.
लेकिन विपक्ष इस बात पर ज़ोर देता रहा है कि राष्ट्रपति बशर अल असद को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
वहीं सीरिया की सरकार का कहना है कि बातचीत के लिए कोई पूर्व-निर्धारित शर्त नहीं होना चाहिए.
संयुक्त राष्ट्र के अनुमानों के मुताबिक़, साल 2011 में असद के ख़िलाफ़ आरंभ हुए घटनाक्रम के बाद से अब तक एक लाख से अधिक लोग मारे जा चुके हैं.
स्पष्ट नज़रिया

अमरीकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने सोमवार को एक बयान में कहा कि जिनेवा में होने वाली ये बैठक सीरिया के संघर्ष को ख़त्म करने में मददगार साबित हो सकती है.
साथ ही उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है, ''हम ये अच्छी तरह जानते हैं कि राजनीतिक समाधान की राह में कई बाधाएं हैं. हम जिनेवा बैठक में व्यापक दृष्टिकोण के साथ जाएंगे.''
उन्होंने ये भी कहा कि अमरीका, संयुक्त राष्ट्र और अन्य भागीदारों के साथ मिलकर इस बैठक के मुद्दों पर काम करता रहेगा.
इससे पहले, सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने पुष्टि कर दी कि सीरिया की सरकार और विपक्ष 22 जनवरी को होने वाली शांति बैठक में पहली बार हिस्सा लेंगे.
उन्होंने कहा, ''जिनेवा बैठक शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण का माध्यम है जो आज़ादी और गरिमा के लिए सीरियाई लोगों की वैधानिक आकांक्षाओं को पूरा करेगी.''
बेरुत में बीबीसी संवाददाता जिम म्यूर का कहना है कि सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद ने सत्ता से हटने का कोई संकेत नहीं दिया है.
बीते कुछ महीनों में राजधानी दमिश्क और दूसरे बड़े शहर एलेप्पो के आसपास के इलाक़ों को सैनिकों ने अपने नियंत्रण में ले लिया है जिन्हें सरकार समर्थिक लड़ाकों, लेबनान के शिया इस्लामी समूह हिज़्बुल्लाह और ईरानी रेवॉल्यूशनरी गार्ड्स का कथित रूप से समर्थन हासिल है.
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