नेपाल: संविधान सभा के लिए मतदान ख़त्म

नेपाल में संविधान सभा के लिए चुनाव
    • Author, संजय ढकाल
    • पदनाम, संवाददाता, बीबीसी नेपाली सेवा

नेपाल में संविधान सभा के चुनाव के लिए मतदान ख़त्म हो गया. इसी के साथ माओवादी चरमपंथ के ख़ात्मे के सात साल बाद नए संविधान को लिखे जाने का रास्ता साफ़ हो गया है.

नेपाल के चुनाव आयोग ने मतदान को शांतिपूर्ण क़रार दिया है और कहा है कि लोगों ने बढ़-चढ़कर इसमें हिस्सा लिया.

इससे पहले नेपाल की राजधानी काठमांडू में एक बम फटा जिसमें तीन लोग ज़ख्मी हो गए. घायलों में आठ साल का एक लड़का भी शामिल है. इससे पहले चुनाव प्रचार के दौरान हमलों की कई घटनाएं देखने में आईं थीं. पार्टियों ने इसके लिए विरोधियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

यह दूसरा मौक़ा है कि नेपाल में संविधान सभा के लिए मतदान हुआ है. इससे पहले पिछले साल राजनीतिक पार्टियों में आंतरिक झगड़ों के कारण संविधान सभा भंग हो गई थी.

काठमांडू में धमाका मतदान शुरू होने के कुछ घंटे बाद हुआ. धमाके में ज़ख़्मी बच्चे के पिता दान हाजडी खादगी ने इस पर ग़ुस्सा ज़ाहिर किया.

उनका कहना था, ''क्या उन्हें (हमलावरों को) यह पता नहीं कि सार्वजनिक स्थानों पर बम लगाने से वहां खेल रहे बच्चों की जान जा सकती है. इस घटना की सभी को तहेदिल से निंदा करनी चाहिए.''

दूसरी बार मतदान

नेपाल में संविधान सभा के लिए हुआ यह दूसरा मतदान है, जिससे देश में नई सरकार बनने का रास्ता साफ होगा.

देश में एक करोड़ 20 लाख रजिस्टर्ड मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया. 601 सदस्यीय संविधान सभा के लिए 'फर्स्ट पास्ट दी पोस्ट' प्रणाली के तहत 240 सदस्य सीधे चुने जाने हैं.

इसके अलावा 335 सदस्यों को समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत चुना जाएगा, जबकि शेष 26 सदस्यों को मंत्रिपरिषद राजनीतिक पार्टियों से सलाह मशविरे के बाद नामांकित करेगी.

<link type="page"><caption> नेपाल को चीन की मदद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/06/130626_nepal_china_money_support_vs.shtml" platform="highweb"/></link>

चुनावों में सौ से ज़्यादा राजनीतिक पार्टियों के 16 हज़ार से ज़्यादा उम्मीदवारों ने भाग लिया, जिनमें क़रीब छह हज़ार महिलाएँ हैं और कुछ उम्मीदवार निर्दलीय थे.

साल 2006 के जनांदोलन में नेपाल में राजशाही का तख्ता पलट दिया गया था. इन्हीं परिस्थितियों में 'नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी' दशक भर से चल रहे अपने सशस्त्र संघर्ष को खत्म कर मुख्यधारा की राजनीति पार्टियों के साथ हाथ मिलाते हुए इस आंदोलन में शामिल हुई थी.

नेपाल में संविधान सभा के लिए चुनाव

'नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी' को अब 'एकीकृत नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी' के नाम से जाना जाता है.

अंतरिम संसद

मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों और माओवादियों के बीच समझौते के तहत जिन मुद्दों पर सहमति बनी थी, उनमें संविधान सभा के लिए चुनाव कराना था.

मगर चुनाव से पहले राजनीतिक पार्टियों और माओवादियों ने एक अंतरिम संसद का गठन किया और नेपाल को एक धर्मनिरपेक्ष गणतंत्र घोषित कर दिया.

सियासी धड़ों ने एक अंतरिम संविधान की भी घोषणा की, जिसके तहत प्रस्तावित संविधान सभा की शर्तें और तौर-तरीक़े तय किए गए.

<link type="page"><caption> प्रचंड ने माना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/institutional/2013/04/130430_nepal_pachanda_ap.shtml" platform="highweb"/></link>

आख़िरकार 10 अप्रैल 2008 को नेपाल में चुनाव हुए और इनमें एकीकृत नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी-माओवादी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनकर उभरी, लेकिन साधारण बहुमत से पीछे छूट गई.

अंतरिम संविधान के तहत शुरुआत में संविधान सभा की अवधि दो साल तय की गई थी, लेकिन इस अवधि को बार-बार बढ़ाया गया, फिर भी इससे कोई फ़ायदा नहीं हुआ.

नेपाल में संविधान सभा के लिए चुनाव

माना जाता है कि संघीय सूबों के नाम और उनके आकार को लेकर प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के बीच पैदा हुए मतभेद की वजह से नतीजे नहीं निकले. 27 मई 2012 को संविधान सभा का अवसान हो गया.

महीनों की राजनीतिक उठा पटक के बाद सियासी पार्टियों ने संविधान सभा के लिए दूसरी बार चुनाव कराने का फ़ैसला किया. उसके बाद राजनीतिक पार्टियों में इस बात को लेकर झगड़ा शुरू हो गया कि चुनाव की अगुवाई करने वाली सरकार का नेतृत्व किसे करना चाहिए.

इस साल मार्च के महीने में राजनीतिक पार्टियां वर्तमान मुख्य न्यायाधीश खिल राज नेगमी की अगुवाई में अंतरिम चुनावी सरकार के गठन को लेकर सहमत हो गईं. अंतरिम सरकार ने बाद में नए सिरे से चुनाव कराने के लिए 19 नंवबर 2013 की तारीख़ तय कर दी.<link type="page"><caption> </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130220_international_others_nepal_sm.shtml" platform="highweb"/></link>

<link type="page"><caption> मुख्य न्यायाधीश को प्रधानमंत्री पद की पेशकश</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130220_international_others_nepal_sm.shtml" platform="highweb"/></link>

अब क्या?

मोहन बैद्य की अगुवाई वाले माओवादी धड़े ने इन चुनावों को ख़ारिज कर दिया है. फ़िलहाल 33 छोटी-छोटी पार्टियों के गठजोड़ का नेतृत्व कर रहे मोहन बैद्य ने ट्रांसपोर्ट हड़ताल का आह्वान किया था. मोहन बैद्य के धड़े पर छिटपुट हिंसक घटनाएं अंजाम देने के आरोप भी हैं.

संविधान सभा के सामने संविधान बनाने के अलावा इन प्रतिक्रियावादी पार्टियों की चिंताओं को जगह देना भी एक चुनौती है. इसके अलावा सरकार और संघीय ढाँचे के स्वरूप को लेकर मुख्य पार्टियों के बीच फ़ासले पाटना भी है.

<bold><italic>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</italic></bold>