फ़िज़ूलख़र्ची मंहगी पड़ी पादरी को!

कैथोलिक ईसाइयों के मुख्यालय वेटिकन ने जर्मनी के एक वरिष्ठ पादरी को उनकी तथाकथित फ़िज़ूलख़र्ची के लिए निलंबित कर दिया है.
मीडिया ने लिंबुर्ग के बिशप, फ्रांज़-पीटर टेबार्ट्ज़-वान एल्स्ट को 'बिशप ऑफ़ ब्लिंग' का ख़िताब दिया है.
वान एल्स्ट पर अपने ख़र्च के बारे में शपथ लेकर भी झूठ बोलने का आरोप लगने के बाद उनसे इस्तीफ़ा देने के लिए कहा गया था.
वेटिकन का कहना था कि उसके हिसाब से बिशप टेबार्ट्ज़-वान एल्स्ट के लिए 'चर्च से कुछ समय की छुट्टी लेना सही था'.
कैथोलिक ईसाइयों के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस मार्च में पद संभालने के बाद से मितव्ययिता की बात करते रहे हैं.
ख़बरों के मुताबिक लिंबुर्ग के बिशप ने शहर में अपने मकान पर लगभग तीन करोड़ दस लाख यूरो या चार करोड़ बीस लाख डॉलर ख़र्च किए जबकि साल 2010 में इस काम के लिए 55 लाख यूरो की कीमत आंकी गई थी. भारत में ग़रीबों से मिलने जाने के लिए फ़र्स्ट क्लास से हवाई यात्रा करने के लिए भी बिशप की आलोचना हुई थी.
लिंबुर्ग के बिशप पर लगे इन इल्ज़ामों से जर्मनी में कैथोलिक ईसाइयों के बीच विवाद पैदा कर दिया है क्योंकि पांच सदी पहले मार्टिन लूथर ने वेटिकन में, उनके शब्दों में, 'ज़्यादतियों और दुर्व्यवहार की वजह से जर्मनी में यूरोप में रिफ़ॉर्मेशन की स्थापना की थी'.
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