चीन में तिब्बती बौद्ध की हत्या

पश्चिमी जगत में पहला बौद्ध विहार स्थापित करने वाले तिब्बती बौद्ध भिक्षु की चीन के सिचुआन प्रांत में हत्या कर दी गई है. उनके साथ ही दो और तिब्बती भी मरे हुए पाए गए.
73 साल के शोजे अकॉन्ग रिन्पोछे ने 1967 में स्कॉटलैंड में 'इंटरनेशनल सेंटर ऑफ़ बुद्धिस्ट लर्निंग' और 'सामये लिंग विहार' की स्थापना की थी.
इसकी स्थापना में उनके साथ दूसरे धर्मगुरु भी शामिल थे.
जापान की समाचार एजेंसी क्योदो की ख़बर के मुताबिक़ सिचुआन की राजधानी चेंगदू में हुए इस हत्याकांड में रिन्पोछे के अलावा उनके भतीजे लोगाह और दूसरे भिक्षु जिग्मे वानग्याल की भी हत्या कर दी गई.
एकॉन्ग रिन्पोछे के भाई लामा येशे रिन्पोछे के मुताबिक़ ये हत्याएं हैं.
'बुद्धिस्ट सेंटर' की वेबसाइट पर उन्होंने लिखा, "मैं बहुत दुख के साथ बताना चाहता हूं कि दुर्भाग्य से मेरे भाई शोजे एकॉन्ग रिन्पोछे, मेरे भतीजे और एक और भिक्षु जो उनके साथ यात्रा कर रहे थे, सभी की चेंगदू में हत्या कर दी गई."
उनके मुताबिक़, "रिन्पोछे के शव को अस्पताल ले जाया गया जहां उनका पोस्टमॉर्टम किया जाएगा."
तीन संदिग्ध गिरफ़्तार
ब्रितानी मीडिया ने चीनी पुलिस के हवाले से लिखा है कि तीन तिब्बती संदिग्धों को गिरफ़्तार किया गया है जिन्होंने पैसे के लेनदेन को लेकर रिन्पोछे की हत्या कर दी.
इस हत्याकांड की ख़बर ब्रितानी मीडिया में छाई रही मगर इसका चीनी मीडिया में उल्लेख नहीं किया गया है.
एकॉन्ग रिन्पोछे रोकपा ट्रस्ट नाम की एक दान संस्था चलाते थे और ट्रस्ट की तरफ़ से चलाए जाने वाले स्कूल और मेडिकल प्रोजेक्ट्स की देखरेख के लिए अक्सर तिब्बत जाया करते थे.
तिब्बती न्यूज़ पोर्टल फायुल के मुताबिक़ जब हमला हुआ तो वो अपने एक प्रोजेक्ट की देखरेख के लिए गए थे.
1959 में तिब्बत पर चीन के क़ब्ज़े के बाद एकॉन्ग रिन्पोछे भारत आ गए थे. वे 1963 से ब्रिटेन में रहते थे और 1967 में उन्होंने बौद्ध विहार की स्थापना की.
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