दिमाग़ बताना भूल जाता है कि साँस लेना है

ब्रिटेन में रहने वाली क़रीब तीन साल की मेसी हैरिस चौबीसों घंटे वेंटिलेटर पर रहती हैं. दरअसल दिक्क़त ये है कि मेसी का दिमाग़ उनके फ़ेफड़ों तक सही संदेश नहीं पहुँचा पाता यानी दिमाग़ मेसी को ये बताना भूल जाता है कि उन्हें साँस लेना है.
इसे सेंट्रल हाइपोवेंटिलेशन सिन्ड्रोम कहते हैं. इस वजह से मेसी जब तीन महीने की थीं तभी से अस्पताल में हैं. लेकिन अब ज़िंदगी में पहली बार वो घर जा रही हैं क्योंकि उनका वेंटीलेटर अब पोर्टेबेल हो गया है जिसे कहीं भी ले जाया जा सकता है.
इस वेंटीलेंटर में बैटरी है और सामान रखने के लिए जगह भी. अब मेसी अपने परिवार के साथ बाहर घूमने जा सकेंगी और बड़ी होने पर स्कूल भी.
नया वेंटीलेटर ये समझ पाता है कि कब मेसी ख़ुद ब ख़ुद साँस ले पा रही हैं और कब उन्हें साँस लेने में मदद की ज़रूरत हो सकती है. वो 23 अक्तूबर को तीन साल की हो जाएगी.
अस्पताल से जाने से पहले कर्मचारियों ने मेसी के लिए विशेष पार्टी भी रखी.
उनकी माँ रेचल ब्रिडजर कहती हैं, “मैं इंतज़ार नहीं कर सकती कि कब हम सामान्य परिवार की तरह रहें. ऐसा लग रहा है कि हम ज़िंदगी भर से अस्पताल में थे. अस्पताल में सब परिवार जैसे हो गए थे. वे लोग मेसी को पूरी तरह जानते हैं.”
'अपने खिलौने से खेलेगी'

मेसी का इलाज करने वाली एक नर्स ने कहा कि वो बहुत भावुक महसूस कर रही हैं लेकिन ख़ुश भी हैं कि मेसी घर जा रही है.
मेसी के बारे में उनकी माँ कहती हैं कि वो काफ़ी ख़ुश रहती हैं और बेहद कम नाराज़ होती है.
मेसी के घर आकर माहौल में ढलने पर रेचल कहती हैं, “मुझे नहीं लगता कि उसे ज़्यादा वक़्त लगेगा कि वो अपने घर आकर खिलौनों से खेले या अपने बिस्तर में सोए.”
सलाहकार कॉलिन वैलिस कहती हैं, “हम कोशिश कर रहे हैं कि लंबे समय से वेंटीलेटर पर रहने वाले बच्चों को घर भेज सकें. बच्चों के विकास के लिए घर सबसे अच्छी जगह होती है. मेसी अब बाहर जा सकेगी, नए दोस्त बना सकेगी.”
डॉक्टर कॉलिन वैलिस ने मेसी की माँ का भी इलाज किया था जब वो छोटी थी. उन्हें भी यही बीमारी थी लेकिन समस्या इतनी गंभीर नहीं थी.
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