सीरिया मसले पर सुरक्षा परिषद में चर्चा शुरू

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सीरिया को रासायनिक हथियारों से मुक्त करने के प्रस्ताव के मसौदे पर चर्चा शुरू हो गई है.
प्रस्ताव के बुनियादी मसौदे पर अमरीका और रूस की सहमति के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई है.
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों के अनुसार इस मसौदे पर 15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद में शुक्रवार को मतदान हो सकता है.
इस समझौते से साथ ही सीरिया मसले पर <link type="page"><caption> सुरक्षा परिषद</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130918_syria_un_ia.shtml" platform="highweb"/></link> में ढाई सालों से चल रहा गतिरोध समाप्त हो जाएगा.
रूस और <link type="page"><caption> अमरीका</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130916_syria_un_report_aj.shtml" platform="highweb"/></link> ने संबंध में एक योजना तैयार की थी जिसके तहत सीरिया साल 2014 के मध्य तक अपने रासायनिक हथियारों को सार्वजनिक करके नष्ट करने के लिए सहमत हो गया था.
सुरक्षा परिषद में सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ पश्चिमी देशों के समर्थन से तीन बार प्रस्ताव लाया गया था लेकिन रूस और चीन ने तीनों बार इसे पारित नहीं होने दिया था.
सुरक्षा परिषद की बैठक से पहले रूस और अमरीका के बीच इसकी शब्दावली को लेकर मतभेद हो गया था.
मतभेद

ब्रिटेन और फ्रांस द्वारा समर्थन प्राप्त अमरीका इस प्रस्ताव में सीरिया के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई करने की धमकी को जोड़ना चाहता था. रूस ने इसका विरोध किया. संयुक्त राष्ट्र के पाँच स्थाई सदस्य देशों के पास किसी भी प्रस्ताव पर वीटो करने की शक्ति होती है.
लेकिन गुरुवार को इस मसले पर एक सहमति बन गई.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीका की राजदूत सामंथा पॉवर ने ट्वीट में कहा, "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीरिया को क़ानूनी रूप से रासायनिक हथियार समाप्त करने के लिए बाध्य करने वाले प्रस्ताव पर सहमति बन गई है. सीरिया ने अपनी ही जनता पर रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया था."
सामंथा ने यह भी कहा कि इस मसौदे से यह पुष्ट होता है कि "सीरिया द्वारा रासायनिक हथियारों के प्रयोग से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को ख़तरा है और इसके बाद रासायनिक हथियारों के प्रयोग संबधी नए मानदंड निर्धारित होंगे."
संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत लियाल ग्रांट ने भी इस मसौदे को "बाध्यकारी और लागू कराया जाने वाला" बताया.
सैन्य कार्रवाई
<link type="page"><caption> रूस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130917_france_russia_syria_aj.shtml" platform="highweb"/></link> के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी इस बात की पुष्टि की है कि समझौते पर सहमति बन गई है.
लावरोव ने कहा कि इस प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय सात के तहत तत्काल सैन्य कार्रवाई की बात नहीं शामिल है. ऐसी किसी भी कार्रवाई के लिए संयुक्त राष्ट्र में एक अलग प्रस्ताव की ज़रूरत होगी.
अमरीकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि यह प्रस्ताव एक 'नई शुरुआत' है और "इससे यह पूरी तरह स्पष्ट होता है कि अगर असद सरकार इस मसले पर सहयोग नहीं करती तो उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे."
अमरीका और रूस के अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार शाम तक इस प्रस्ताव पर मतदान हो सकता है.
इस महीने की प्रारंभ में अमरीका और रूस के बीच सीरिया को लेकर एक योजना पर सहमति बन गई थी.
धमकी

21 अगस्त को दमिश्क के घौटा इलाक़े में हुए रासायनिक हमले के बाद अमरीका ने सीरिया पर सैन्य कार्रवाई करने की धमकी दी थी.
संयुक्त राष्ट्र के जाँच दल ने अपनी रिपोर्ट में घौटा में हुए हमले में घातक रासायनिक गैस सारिन के प्रयोग की पुष्टि की थी. हालाँकि जाँच दल ने इस हमले के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया था.
अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने कहा था कि यह रिपोर्ट उनके आरोपों की पुष्टि करती है क्योंकि रासायनकि हमला करने की क्षमता केवल सरकार के पास ही हो सकती है.
रूस ने इन देशों के इस तर्क को ख़ारिज कर दिया था. इस मसले पर लावरोव ने कहा था, "रूस के पास यह मानने के 'गंभीर आधार' हैं कि यह हमले सीरिया सरकार के विरोधियों की कार्रवाई थी."
<link type="page"><caption> सीरिया</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130920_syria_rebels_ceasefire_ssr.shtml" platform="highweb"/></link> के राष्ट्रपति बशर अल-असद ने भी इन हमलों के लिए विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया था.
राष्ट्रपति असद के ख़िलाफ़ 2011 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों में अब तक एक लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
सीरिया के लाखों लोग देश छोड़कर पड़ोसी देशों में चले गए हैं जबकि लाखों नागरिक आंतरिक विस्थापन का शिकार हुए हैं.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहाँ क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












