क्या हो अगर नैरोबी जैसा हमला ब्रिटेन में हो जाए!

 केन्या, नैरोबी, अल-शबाब, चरमपंथी हमला
इमेज कैप्शन, केन्या की राजधानी नैरोबी एक वेस्टगेट शॉपिंग सेंटर में चरमपंथियों ने हमला किया था.
    • Author, फ्रैंक गार्डनर
    • पदनाम, बीबीसी सुरक्षा संवाददाता

नैरोबी के वेस्टगेट शॉपिंग मॉल में हुए चरमपंथी हमले ने कुछ लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इस तरह का हमला ब्रिटेन में भी हो सकता है ?

सैंद्धांतिक रूप से इसका जवाब होगा, हाँ क्योंकि हर भीड़ वाली जगह पर चौबीसो घंटे शत प्रतिशत सुरक्षा प्रदान करना संभव नहीं है.

मुंबई में 2008 में हुए हमले के बाद <link type="page"><caption> ब्रिटेन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130926_interpol_notice_against_white_widow_dil.shtml" platform="highweb"/></link> की पुलिस, सुरक्षा एजेंसियों और सेना ने पिछले पाँच सालों में अपनी क्षमता में काफी सुधार किया है.

<link type="page"><caption> मुंबई</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130924_nairobi_mumbai_comparison_aj.shtml" platform="highweb"/></link> में हुआ हमला तीन दिन तक चला था जिसमें 166 लोग मारे गए थे. इस हमले के बाद पूरी दुनिया में आतंकवाद-निरोधक दस्तों को सतर्क कर दिया था.

हर किसी को यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा कि अगर मुंबई जैसा हमला उनके शहर में हुआ तो वो क्या करेंगे.

इस घटना के बाद ब्रिटेन की पुलिस के सचल सशस्त्र दस्ते को यह एहसास हुआ कि उनके पास हथियारों की कमी है.

अभ्यास

ताज होटल, मुंबई
इमेज कैप्शन, 2008 में मुबंई में चरमपंथी हमला हुआ था.

व्यावहारिक रूप से इसका अर्थ यह हुआ कि अगर ये पुलिस वाले किसी इमारत में अत्याधुनिक हथियारों से लैस चरमपंथियों से घिर जाएँ तो उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

बहुत संभावना है कि ऐसी स्थिति में पुलिस वालों को घटनास्थल से हटना पड़े और सेना के विशेष बल का इंतजार करना पड़े.

इस घटना के बाद ब्रिटेन की पुलिस ने एसएएस और एसबीएस के साथ मिलकर कई बार इस तरह के संभावित हमलों का मुक़ाबला करने के लिए अभ्यास किया ताकि ऐसी स्थिति आने पर जान और माल के न्यूनतम नुकसान के साथ कम से कम समय में नियंत्रण पाया जा सके.

ब्रिटेन पुलिस की हथियार क्षमता भी पहले से काफी बेहतर हो गई है.

तो क्या <link type="page"><caption> नैरोबी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130925_kenya_twitter_militants_vr.shtml" platform="highweb"/></link> में हमला करने वाला सोमालिया का अल-शबाब समूह ब्रिटेन में वैसा ही हमला कर सकता है ?

2011 में सोमालिया में मारे गए अल-शबाब के सदस्यों के पास बरामद हुई पेनड्राइव में ब्रिटेन में कई ठिकानों पर हमला करने की योजना का पता चला था.

मंसूबा

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इमेज कैप्शन, नैरोबी के एक शॉपिंग सेंटर में हुए चरमपंथी हमले में 60 से ज़्यादा लोग मारे गए.

बुधवार को ब्रितानी सरकार के अधिकारियों ने कहा कि ब्रिटेन में हमले की योजना इन चरमपंथियों के लिए सिर्फ मंसूबा है क्योंकि इस समूह के पास ब्रिटेन स्थित ठिकानों पर हमला करने की कोई ज़मीनी योजना नहीं है.

अधिकारियों का कहना है कि नैरोबी में स्वचालित हथियारों, हथगोलों और भारी मात्रा में अन्य हथियारों का प्रयोग किया गया. इस समूह के लिए ब्रिटेन में ऐसी चीजें पाना बहुत मुश्किल होगा.

इसके अलावा यह समूह पूर्वी अफ्रीका में स्थित है और अपने देश से सटे देशों में यह आसानी से प्रवेश पा सकता है.

अपने इलाके में इसे आर्थिक मदद भी आसानी से मिल जाती है.

नैरोबी जैसी जगहों पर हमला करने के लिए अपने क्षेत्र में इन्हें नए लोग भी आसानी से मिल जाते हैं.

अल-शबाब 2012 से आधिकारिक तौर पर अल-कायदा से जुड़ चुका है.

इस समूह का प्राथमिक उद्देश्य सोमालिया से संयुक्त राष्ट्र समर्थक अफ्रीकी शक्तियों को बाहर करना है ताकि उसके बाद सोमालिया को इस्लामिक राष्ट्र बनाया जा सके.

ब्रितानी चरमपंथी

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इमेज कैप्शन, नैरोबी में चरमपंथियों को काबू करने में चार दिन लगे.

अल-शबाब समूह का वैश्विक एजेंडे के साथ ही एक क्षेत्रिय एजेंडा भी है.

इस समूह से सहानुभूति रखने वाले और इसकी आर्थिक मदद करने वाले लोग <link type="page"><caption> ब्रिटेन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/09/130923_kenya_nairobi_anjali_vt.shtml" platform="highweb"/></link> में भी हैं लेकिन सोमालियाई समुदाय का बड़ा तबका इस समूह के हिंसक हमलों की निंदा करता है.

एक अनुमान के मुताबिक सोमालिया में प्रशिक्षित करीब 50 ब्रितानी जेहादी अल-शबाब के लिए काम कर रहे हैं.

इनमें से करीब आधे तो सोमालियाई मूल के हैं बाकी दक्षिण एशिया एवं अन्य क्षेत्रों के हैं.

अधिकारियों को चिंता है कि इनमें से कुछ अपना नया 'आतंकी' प्रशिक्षण प्राप्त करके ब्रिटेन वापस आ सकते हैं.

ब्रिटेन के आतंकवाद-निरोधक दल के अधिकारी नैरोबी में हुई घटना का अध्ययन कर रहे हैं ताकि उससे कुछ सबक सीखा जा सके जो ब्रिटेन में ऐसा कोई हमला होने की स्थिति में काम आएगा.

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