ड्रग-कॉकटेल की चपेट में दक्षिण अफ़्रीकी युवा

- Author, विल रॉस
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, स्वेटो
दक्षिण अफ़्रीकी शहर सोएटो में रेल की पटरियों से सटे खुले इलाके में कई लड़के-लड़कियां ड्रग्स का सेवन करते नज़र आते हैं.
इनमें ज़्यादातर की उम्र अभी 20 साल ही हुई है लेकिन ये सब एक नए ड्रग कॉकटेल 'न्याओपे' के दीवाने हो चुके हैं.
इस <link type="page"><caption> ड्रग के नशे </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/01/120127_un_drugs_da.shtml" platform="highweb"/></link>के बाद कुछ तो मतवाले होकर झूमते नज़र आते हैं.
महज 16 साल की थुली भी अत्यधिक नशे वाली ड्रग की लत में फंस चुकी हैं.
नशे से उनींदी आंखों के साथ थुली ने कहा, "मैं पहले पढ़ती थी लेकिन ड्रग्स के चलते मैंने पढ़ाई छोड़ दी. 14 साल की उम्र में स्कूल छूट गया."
थुली को अपना कोई भविष्य नज़र नहीं आ रहा है.
जानलेवा नशा
वैसे ये ड्रग पूरे दक्षिण अफ़्रीका को अपनी चपेट में ले चुकी है. हर दिन इस ड्रग की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है.
न्याओपे एक सफ़ेद पाउडर होता है जिसमें सस्ती हेरोइन के साथ कुछ चीज़ें मिली होती हैं- जैसे कि चूहे मारने की दवा और कई दफ़ा एचआईवी मरीज़ों की दवा को पीसकर इसमें मिला दिया जाता है.
जब इसे मारिजुआना पर छिड़का जाता है तो इसका नशा कहीं ज़्यादा गुलाम बनाने वाला होता है, ज़िंदगी को बर्बाद करने की हद तक.
एक दूसरे ड्रग एडिक्ट ने बिना अपना नाम बताए कहा, "मैं इस ड्रग का सेवन निश्चित तौर पर करता हूं क्योंकि यह हमारी दवा बन चुकी है. हम इसके बिना जी नहीं सकते. अगर मैं इस ड्रग को नहीं लूंगा तो बीमार पड़ जाऊंगा."
अत्यधिक नशे के लिए इस ड्रगका इस्तेमाल करने वाले भी इससे अपना पीछा छुड़ाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें ये महसूस होने लगा है कि ये ड्रग उन्हें मौत की मुंह में धकेल रही है.
न्याओपे का सेवन करने वाले 32 साल के केबेलो ने कहा, "जब हम युवा थे तब हाईस्कूल में मारिजुआना का सेवन किया था और उसके बाद उससे भी ज़्यादा नशे वाली ड्रग का. लेकिन आज के युवा न्याओपे जैसी अत्यधिक नशे वाली ड्रग से शुरुआत कर रहे हैं."
23 साल की नोमवुला अपनी गुलाबी नाखूनों वाली उंगलियों को आपस में फंसाते हुए कहती हैं, "मेरा परिवार मेरी मदद करना चाहता है और वे सोचते हैं कि नशे से छुटकारा पाने के लिए जेल जाना मेरे लिए बेहतर होगा."
बेहद सस्ती ड्रग
न्याओपे ड्रग की बढ़ती लोकप्रियता की एक वजह इसका सस्ता होना भी है.
इसकी कीमत करीब दो डॉलर के आसपास है. लेकिन इसका सेवन करने वालों का जीवन नष्ट होने लगता है.
लत को पूरा करने के लिए उनमें चोरी की आदत पड़ जाती है.
इस आदत के चलते वे अपने ही परिवार और जान पहचान के दायरे में रहने वालों के दुश्मन बन जाते हैं.
इफ्रेम राडेबे नशे से छुटकारा पाने की कोशिशों में जुटे हैं. वे कहते हैं कि एक बार उन्हें चोरी करते हुए पड़ोस की गली के लोगों ने पकड़ लिया.
वे कहते हैं, "उन लोगों ने मुझे ईंट-पत्थरों से पीटा और कहा कि मुझे मर जाना चाहिए. एक आदमी तो पेट्रोल ले आया, वो मुझे जलाना चाहता था."

राडेबे पिछले दो महीने से एक नई ज़िंदगी जी रहे हैं और इससे उनकी मां रोज़ राडेबे को सबसे ज़्यादा राहत मिली है. दो महीने पहले तक उनका जीवन नरक से कम नहीं था.
उन्होंने बताया, "मैंने एक दिन अपनी कान की बाली को बैग में रखा. अगली सुबह वो गायब थी. उसने इसे चुरा लिया था. वह मेरी मां और पड़ोसियों के घरों में भी चोरी करने लगा था."
रोज़ राडेबे के लिए ये दोहरी मुश्किल का समय था. वे बताती हैं, "माता-पिता के लिए स्थिति बेहद ख़राब हो जाती क्योंकि वे हर दिन सोचते हैं कि मुझसे क्या ग़लती हुई?"
न्याओपे में हेरोइन मौजूद होती है लेकिन इसे अब तक गैर कानूनी पदार्थ के वर्ग में शामिल करने की प्रक्रिया जारी है.
सरकार का कहना है कि इस नशे से जुड़े मामलों को सुलझाने में इससे बाधा आ रही है.
'पुलिस से मिलीभगत'
पुलिस अधिकारियों के ड्रग डीलर के साथ मिलकर इसे बेचने की ख़बरें भी सामने आ रही हैं.
न्याओपे ज़्यादातर जोहानिसबर्ग के नज़दीक स्थित ग्वातेंग प्रांत में मिलती है.
ठीक इसी तरह की एक दूसरी ड्रग कॉकटेल डरबन की गलियों में मिलती है जो वूंगा के नाम से जानी जाती है.
जबकि पश्चिमी केपटाउन में एक अन्य ड्रग क्रिस्टल मेथ स्थानीय लोगों को अपनी चपेट में ले रही है.
देश भर में ड्रग की बढ़ती लत को देखते हुए सरकार ने सभी नौ प्रांतों में नशा-मुक्ति केंद्र बनाने का वादा किया है.
राज्य के सामाजिक विकास विभाग के प्रवक्ता लूमका ऑलिफेंट ने कहा, "विभाग कई गैर सरकारी संगठनों को अनुदान दे रहा है जो ड्रग्स के मुद्दे पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा हम एक प्रचार अभियान भी चला रहे हैं ताकि लोगों को यह पता चले कि ड्रग्स के सेवन का क्या असर पड़ता है. इससे हमारे बच्चों की जागरूकता बढ़ेगी क्योंकि ड्रग डीलर उन्हें निशाना बना रहे हैं."
न्याओपे की लत जिस रफ़्तार से बढ़ी है उसे देखते हुए यही लग रहा है कि सरकार की कोशिशें पर्याप्त नहीं हैं.
नशा मुक्ति केंद्र
स्वेटो का प्रमुख नशा मुक्ति केंद्र लोगों को नशे की चपेट से छुटकारादिला रहा है.
दक्षिण अफ्रीकी नेशनल काउंसिल ऑन एल्कोहलिज्म एंड ड्रग डिपेंडेंस के निदेशक अनानिएस मेबेवे ने कहा, "स्वेटो काफी बड़ा इलाका है और यहां पर केवल चार सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद हैं."
मेबेवे ने कहा, "अगर मेरे पास पर्याप्त अनुदान होता तो हम नए कार्यकर्ताओं को नियुक्त करते और इन युवाओं को भी काम पर बनाए रखते. हमें इसके उन्मूलन के लिए मिलकर काम करना होगा. यह एक सामाजिक समस्या है. जो हर किसी पर असर डाल रही है. यह न रंगभेद मानती है न लिंगभेद."
हालांकि इस केंद्र में नशेड़ियों को रखने की व्यवस्था नहीं हैं. इससे नशामुक्ति अभियान पर असर पड़ रहा है.

एक नशेड़ी ने बताया, "आपको केंद्र में दवा दी जाती है और उसके बाद आपको घर लौटना होता है. जहां आपके ज़्यादातर दोस्त न्याओपे का सेवन कर रहे होते हैं. और आप भी फिर से नशा करने लगते हैं."
बदलाव संभव
नशा करने वालों को पर्याप्त मदद नहीं मिल रही है, ये समझते हुए राडेबे और अनवर जोंस जैसे लोग जो इस नशे से छुटकारा पा चुके हैं, वे दूसरे नशेड़ियों की मदद कर रहे हैं.
इसके लिए राडेबे और अनवर जैसे लोग उन इलाकों में जाते हैं जहां युवा नशा कर रहे होते हैं या फिर ड्रग खरीदने के लिए चोरी की योजना बना रहे होते हैं.
उदाहरण के लिए एक युवा एक बिजली के उपकरण से तांबे का तार निकाल कर उसे बेचने की कोशिश कर रहा है, तभी अनवर उसे ऐसा करने से रोकते हैं.
अनवर ने नशेड़ियों को सलाह मशिवरा देने के लिए उबुंतु अकादमी ऑफ़ कोचिंग एंड ट्रेनिंग (यू-एसीटी) से मुफ्त प्रशिक्षण लिया है.
इन युवाओं की कोशिशों से भी बदलाव दिख रहा है.
थुली कहती हैं, "मैं जेल नहीं जाना चाहती. समुदाय को हमारी मदद के लिए आगे आना चाहिए तभी लड़कियों के लिए नशा मुक्ति केंद्र बनेगा."
थुली ये भी कहती हैं कि वो ड्रग छोड़ना चाहती हैं लेकिन यह उनके लिए बेहद मुश्किल साबित हो रहा है.
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