सूरजमुखी के फूलों का दूसरे विश्वयुद्ध से रिश्ता

विन्सेंट वान गॉग की पेंटिग
इमेज कैप्शन, विन्सेंट वान गॉग की मशहूर पेंटिग 'वाज़ विद फाइव सनफ्लॉवर्स' का दुर्लभ फ़ोटो मुशाकोजी सानियात्सु मेमोरियल म्यूज़ियम

19वीं सदी के महान चित्रकार विन्सेंट वैन गॉग की गायब 'सनफ़्लावर पेंटिग' की दुर्लभ तस्वीर मिली है. इसे पहली बार प्रदर्शन के लिए रखा गया है.

इस तस्वीर से पता चलता है कि वैन गॉग अपने काम को किस तरीक़े से प्रस्तुत करना चाहते थे.

साल 1888 में वैन गॉग ने ये पेंटिंग बनाई थी. लेकिन साल 1945 में जापान में ये नष्ट हो गई थी.

इस पेंटिंग की एक तस्वीर एक जापानी संग्रहालय के पुराने आर्काइव से मिला है, इससे पता चलता है कि वैन गॉग चाहते थे कि उनकी पेंटिंग को नारंगी रंग के फ़्रेम में प्रस्तुत किया जाए.

दूसरा विश्वयुद्ध

वैन गॉग की तस्वीरों के विशेषज्ञ मार्टिन बेली कहते हैं, "वह नारंगी रंग के फ़्रेम को कलाकृति के अभिन्न हिस्से के रूप में देखते थे."

विन्सेंट वॉन गॉग
इमेज कैप्शन, विन्सेंट वान गॉग की गिनती 19वीं सदी के महान चित्रकारों में होती है.

इस पेंटिंग को 'वाज़ विद फ़ाइव सनफ्लॉवर्स' के रूप में भी जाना जाता है. जिसमें एक गुलदान में सूरजमुखी के पाँच फूल गहरी नीली पृष्ठभूमि में दिखाई देते हैं.

ये पेंटिंग एक जापानी संग्रहकर्ता को बेची गई थी और जहाज़ से साल 1920 में जापान भेजी गई थी.

लेकिन दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान ओसाका पर अमरीकी हमले में लगी आग से ये नष्ट हो गई थी.

एक कला अख़बार के संवाददाता और प्रबंधक मार्टिन बेली को यह तस्वीर अपनी पुस्तक 'द सन फ्लॉवर्स आर माइन: द स्टोरी ऑफ़ वैन गॉग्स मास्टरपीस' के लिए शोध के दौरान मिली.

ये किताब वैन गॉग की श्रेष्ठ कृतियों की कहानी कहती है.

सूरजमुखी के फूल

मार्टिन बताते हैं, "मैंने वैन गॉग के उन पत्रों को खोजा, जिसमें उन्होंने लिखा है कि वे जब सन फ्लॉवर्स की पेंटिंग बना रहे थे तो इसे नारंगी रंग के फ़्रेम में रखना चाहते थे. जो कभी नहीं देखा गया."

कला विशेषज्ञ मार्टिन मानते हैं कि वैन गॉग का अपनी पेंटिग्स को नारंगी रंग के फ़्रेम में रखने का विचार बहुत अपने समय में बहुत क्रांतिकारी था.

पेंटिंग और फ़्रेम

वह आगे कहते हैं, "इससे वैन गॉग की कल्पनाशीलता और विशिष्ट योग्यता का पता चलता है. परंपरागत रूप से पेंटिग्स को सुनहरे फ़्रेम में रखा जाता था और आधुनिक पेंटिंग्स को कभी-कभी सादे सफ़ेद फ़्रेम में रखा जाता है."

सन फ्लॉवर सीरीज़ की एक पेंटिंग साल 1987 में ढाई करोड़ पाउंड में बिकी थी, जिसने उस समय दुनिया की सबसे <link type="page"><caption> महंगी पेंटिंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2006/05/060504_picasso_portrait.shtml" platform="highweb"/></link> के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए नया रिकॉर्ड बनाया था.

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