''अच्छी बच्ची'' अब नहीं रही 'अच्छी'!

- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
अमरीका में इन दिनों दो ही बातों पर चर्चा हो रही है - सीरिया पर या फिर सायरस पर—सायरस यानि पॉप स्टार माइली सायरस.
जवान होने का हक़ सबको है लेकिन दो साल पहले तक अमरीकी घरों में टीवी शो हैना मोंटाना की ''अच्छी बच्ची'' के किरदार के ज़रिए लोगों के दिलों पर राज करने वाली किशोरी इस हक़ को हासिल करने के लिए जो करतब दिखा रही हैं वो अमरीका को हज़म नहीं हो रहा.
पिछले हफ़्ते एमटीवी के वीडियो म्यूज़िक अवार्ड समारोह में माइली अपनी त्वचा के रंग वाले रबर के बने ऐसे दो वस्त्र पहनकर आईं, जो उन्हें निर्वस्त्र ज़्यादा कर रहे थे.
जो डांस उन्होंने किया उसमें वो ख़ुद को पॉप स्टार से ज़्यादा पोर्न स्टार की तरह पेश कर रही थीं. अमरीका मुंह फाड़े देख रहा था अपनी चहेती हैना मोंटाना का ये रूप.
टीशर्ट पर हैना मोंटाना, लंच बॉक्स पर हैना मोंटाना, स्कूल बैग पर हैना मोंटाना, जुराबों और जूतों पर भी हैना मोंटाना- अमरीकी मध्यम वर्ग अपनी बेटियों के इस दीवानेपन पर फूला नहीं समाया करता था.
एक डरावना सपना

कहीं न कहीं उम्मीद थी कि किशोरावस्था की दहलीज़ लांघ रही उनकी बेटियां भी हैना मोंटाना की मासूमियत में लिपटी रहेंगी.
बहुत सारे मां-बाप अपने बेटे-बेटियों के साथ ये शो देख रहे थे और शो के बाद तो मानो भूचाल आ गया.
ट्विटर, फ़ेसबुक, यूट्यूब हर जगह माइली के लिए ''सस्ता और बाज़ारू'' से जुड़े जितने भी विशेषण आप सोच सकते हैं, उनका इस्तेमाल हो रहा था. हर मिनट तीन लाख से ज़्यादा संदेश ट्विटर पर जारी हो रहे थे.
कुछ मां-बाप तो इतने आहत हुए कि उन्हें काउंसलिंग की ज़रूरत महसूस होने लगी. एक सज्जन तो यहां तक कह बैठे कि माइली की वजह से महिलाओं के हक़ का आंदोलन 50-60 साल पीछे चला गया है.
मगर देखा जाए तो माइली ने वही किया जो इस तरह के अवार्ड्स में पहले भी होता रहा है. वीएमए अवार्ड्स ही थे जिसमें लेडी गागा ग़ुलाबी कच्चे गोश्त से बना लिबास पहनकर आईं थीं. मैडोना ने ब्रिटनी स्पीयर्स के होठों का बरसों से बिछड़ी प्रेमिका की तरह रसपान किया और इसी स्टेज पर वो लाईक एक वर्जिन के प्रदर्शन से मशहूर हुईं.
माइली ने भी उसी सेलिब्रिटी मंत्र को अपनाया - जो दिखता है वही बिकता है. चर्चा होती रहनी चाहिए- अच्छी या बुरी. उनके नज़रिए से देखें तो वो कामयाब रहीं. इस प्रदर्शन के बाद शायद ही किसी को संदेह रह जाएगा कि माइली अब पंद्रह की नहीं बीस की हो चुकी हैं.
अमरीकी मध्यम वर्ग की मुश्किल ये है कि कल तक माइली में वो अपनी बेटियों को देखते थे. अब वही चेहरा उन्हें डरावने सपने की तरह लग रहा है.
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