फ़ुकुशिमा: रेडियोधर्मी पानी से ख़तरा बढ़ा

फुकुशिमा
    • Author, मैट मैकग्रॉ
    • पदनाम, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी विश्व सेवा

जापान ने फ़ुकुशिमा परमाणु संयंत्र से रेडियोधर्मी पानी रिसने के ख़तरे के अंतरराष्ट्रीय स्तर को एक से बढ़ाकर तीन कर दिया है.

पिछले सोमवार को पता चला था कि पानी एकट्ठा करने वाले एक टैंक से रेडियोधर्मी पानी रिस कर ज़मीन में जा रहा था.

अंतरराष्ट्रीय परमाणु और रेडियोधर्मी घटना के पैमाने (आईएनईएस-इनेस) ने पहले इस घटना को प्रथम दर्जे की घटना क़रार दिया था.

लेकिन जापान के परमाणु नियंत्रण प्राधिकरण ने सात बिंदुओं के पैमाने पर इसका स्तर तीन तक बढ़ाने को कहा है.

लेकिन इस <link type="page"><caption> संयंत्र से पानी रिसने</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130820_radioactive_water_leak_fukushima.shtml" platform="highweb"/></link> की यह पहली घटना नहीं है. लगातार पानी रिसने की वजह मुख्यतः ख़राब ढंग से पानी के टैंकों का निर्माण है. इससे कई सवाल उठते हैं.

रेडियोधर्मिता का स्तर कितना ख़तरनाक है?

अधिकारियों का कहना है कि ताज़ा रिसाव को देखते हुए रेडियोधर्मिता का स्तर बेहद ख़तरनाक है.

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इमेज कैप्शन, अधिकारियों को सोमवार को परमाणु संयंत्र में ताज़ा रिसाव का पता चला

पीने के पानी के सुरक्षित स्तर से यह अस्सी लाख गुना ज़्यादा ख़तरनाक है.

इनेस में इसका स्तर एक से तीन तक बढ़ाना इसे सबसे गंभीर परमाणु दुर्घटना बना देता है.

सात में से हर एक स्तर ख़तरे को दस गुना बढ़ा देता है. तीसरे स्तर का मतलब है कि ख़तरा अभी दुर्घटना स्थल पर ही है और इससे लोगों को प्रत्यक्ष रूप से कोई ख़तरा नहीं है.

क्या पानी को जमा करना ही एकमात्र विकल्प है?

<link type="page"><caption> फ़ुकुशिमा संयंत्र</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/07/120704_fukushima_japan_psa.shtml" platform="highweb"/></link> की जगह भी एक समस्या है.

आस-पास की पहाड़ियों से भूमिगत जल आकर संयंत्र के रेडियोधर्मी इलाक़े में मिल जाता है.

इसलिए संयंत्र को चलाने वाली कंपनी टेपको चाहती है कि पानी में रेडियोधर्मिता का स्तर कम करके उसे समुद्र में मिला दिया जाए. लेकिन स्थानीय मछुआरे इसके सख़्त ख़िलाफ़ हैं.

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इमेज कैप्शन, संयंत्र भूकंप प्रभावित क्षेत्र में है. झटके लगने से फिर रिसाव हो सकता है

चूंकि संयंत्र समुद्र के इतना नज़दीक है इसलिए टेपको रेडियोधर्मी पानी को समुद्र में जाने से रोकने के कई उपाय कर रही है.

लेकिन क्योंकि यह संयंत्र एक भूकंप संवेदी क्षेत्र में है इसलिए ख़तरा यह है कि अगले झटकों से जमा किया गया पानी फैल सकता है.

जापानी सरकार ने दख़ल क्यों नहीं दिया?

देखा जाए तो सरकार पहले ही हरकत में आ चुकी है.

जापानी सरकार ने आठ खरब से ज़्यादा रुपए में कंपनी के आधे से ज़्यादा शेयर ख़रीदे हैं. यह 10 वर्षीय पुनर्निर्माण योजना का एक हिस्सा है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस परमाणु दुर्घटना के निशान मिटने में एक सदी लग सकती है
इमेज कैप्शन, विशेषज्ञों का कहना है कि इस परमाणु दुर्घटना के निशान मिटने में एक सदी लग सकती है

उद्योग और व्यापार मंत्री युकिओ एडानो का कहना है कि यह पैसा यह सुनिश्चित करने के लिए लगाया गया है कि कंपनी बिजली की आपूर्ति जारी रख सके और मुआवज़ा भुगतान के साथ भी बंदी के ख़र्चे उठा सके.

यह सब कब ख़त्म होगा?

हर छोटे से अंतराल के बाद टेपको को पानी जमा करने के मज़बूत टैंकों में निवेश करना होगा और भूमिगत पानी की समस्या से निपटना होगा.

कंपनी की अंतिम उम्मीद यही है कि इस पानी का शोधन कर इसे साफ़ किया जा सके और फिर समुद्र में छोड़ा जा सके.

इसके बाद टेपको को ईंधन की छड़ों को निपटाना होगा, जो कि एक धीमा और जटिल काम है.

आईएईए के अनुसार इसमें 40 साल लग सकते हैं.

लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले को पूरी तरह निपटने में एक सदी लग सकती है.

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