पुरुष के 'हित' में दी नसबंदी को मंज़ूरी

इंग्लैंड में एक ऐतिहासिक फैसले में कोर्ट ने 36 वर्षीय पुरुष के हित में नसबंदी कराने के फ़ैसले को मंज़ूरी दे दी है. इस व्यक्ति को चीज़ें समझने और परखने में दिक्कत होती है और गर्लफ्रेंड से उन्हें एक बच्चा भी है.
अदालत ने इस व्यक्ति की 'भलाई' के लिए इंग्लैंड और वेल्स के इतिहास में अपने तरह का पहला फैसला दिया है.
व्यक्ति के दूसरी बार पिता बनने पर ‘मनोवैज्ञानिक नुकसान’ पहुंचने की दलील को स्वीकार करने के बाद हाई कोर्ट की जज जस्टिस एलियानोर किंग ने यह फैसला सुनाया. इस व्यक्ति को डीई नाम से पुकारा जा रहा है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुरुष शारीरिक संबंध बनाने में सक्षम है लेकिन गर्भनिरोधक उपाय अपनाने के बारे में वह फैसला नहीं कर पाता है.
विशेषज्ञों के मुताबिक इस पुरुष की समझ पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि वो वह कंडोम और गर्भ निरोध के अन्य उपाय अपनाएगा ताकि उनकी गर्लफ्रेंड गर्भवती न हो.
रिश्ते पर असर
लंदन के कोर्ट ऑफ प्रोटेक्शन को सुनवाई के दौरान दलील दी गई थी कि यह व्यक्ति फिर से पिता बनना नहीं चाहता.
दरअसल इस व्यक्ति के अपनी नसबंदी के बारे में फैसला नहीं कर पाने के कारण ही यह मामला अदालत पहुंचा है. जज को तय करना था कि नसबंदी करवाई जाए या नहीं.
फैसले में जस्टिस किंग ने कहा है कि ये व्यक्ति अपने माता-पिता के साथ रहता है, लेकिन गर्लफ्रेंड के साथ उनका प्यार भरा रिश्ता था. उनकी गर्लफ्रेंड को भी नई चीजें सीखने में परेशानी होती है.
पहले बच्चे के जन्म से दोनों परिवारों पर गहरा असर पड़ा था और तब से यह कोशिश की जा रही है कि गर्लफ्रेंड फिर से गर्भवती न हो. इस कारण डीई पर हमेशा नज़र रखी जाती है.
जज ने कहा कि तनाव के कारण इस दंपति का संबंध टूटने के कगार पर पहुंच गया था लेकिन दोनों ने इसे संभाल लिया. उन्होंने कहा कि यह कानूनी रूप से सही और पुरुष के हित में है कि नसबंदी कर दी जाए.
नसबंदी का यह आवेदन पुरुष के माता-पिता के सहयोग से स्थानीय एनएचएस ट्रस्ट और डॉक्टर ने किया था. इससे पहले 1999 में एक आदमी की नसबंदी के लिए आवेदन दाखिल किया गया था लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया था.
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