ब्रदरहुड के तेवर तीखे, सेना ने ओबामा को आंखें दिखाईं

मिस्र हिंसा

मिस्र की राजधानी काहिरा में अपदस्थ राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों ने जुमे की नमाज़ के बाद प्रदर्शनों का आह्वाहन किया है.

मुस्लिम ब्रदरहुड के समर्थकों के कैंपों को हटाने की सैन्य सरकार की जद्दोजहद में अभी तक कम से कम 638 लोगों की मौत हो चुकी है, हालाँकि मुस्लिम ब्रदरहुड के मुताबिक मरने वालों की तादाद बहुत ज़्यादा है.

मिस्र में आपातकाल लागू है और पुलिस को अधिकार दिए गए हैं कि वो अपनी सुरक्षा के लिए हथियारों का प्रयोग कर सकते हैं. इससे मिस्र में और खून-खराबा होने की आशंका बढ़ गई है.

उधर मिस्र की अंतरिम सरकार के नेताओं ने अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के मिस्र पर दिए बयान की आलोचना की है.

गुरुवार को राष्ट्रपति ओबामा ने मिस्र के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास रद्द कर दिया था. मिस्र की सैन्य सरकार का विरोध कर रहे लोगों के खिलाफ़ सैनिकों के इस्तेमाल की ओबामा ने आलोचना की थी.

ओबामा ने कहा कि मिस्र की सड़कों पर नागरिक मारे जा रहे हैं, ऐसे में मिस्र के साथ अमरीका के रिश्ते सामान्य नहीं रह सकते.

उन्होंने कहा, "मिस्र की अंतरिम सरकार और सेना ने जो क़दम उठाए हैं, अमरीका उसकी कडी़ आलोचना करता है. हमे नागरिकों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा पर अफ़सोस है. हम मानव गरिमा के लिए ज़रूरी सार्वभौमिक अधिकारों का समर्थन करते हैं जिनमें शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार भी शामिल हैं. सुरक्षा के नाम पर हम व्यक्तिगत स्वतंत्रता को छीनने वाले मार्शल लॉ का विरोध करते हैं. इसके तहत नागरिकों से उनके अधिकार छीन लिए जाते है."

मुश्किलें

अमरीका मिस्र का क़रीबी सहयोगी रहा है. लेकिन मौजूदा हालात में मिस्र के साथ संबंध बनाए रखना अमरीका के लिए मुश्किल हो रहा है.

शुक्रवार को मिस्र सरकार की ओर से जारी एक बयान में कहा गया कि ओबामा के शब्द 'तथ्यों पर आधारित नहीं' हैं और इससे 'सशस्त्र गुटों के हौंसले बुलंद होंगे'.

सरकार ने कहा कि मिस्र को 'आतंकवादी गतिविधियों' का सामना है.

उधर मुस्लिम ब्रदरहुड ने अपने समर्थकों से कहा है कि वो जुमे की नमाज़ के लिए मस्जिदों में जमा हों और उसके बाद काहिरा की सड़कों पर प्रदर्शन करें.

इसके जवाब में सरकार का समर्थन कर रहे एक गुट ने लोगों से कहा कि वो पूरे देश में अपने पड़ोसियों और गिरिजाघरों की रक्षा करें.

मिस्र में कुछ इस्लामी गुटों ने कॉप्टिक ईसाई समुदाय को निशाना बनाया है. इन गुटों ने समुदाय पर पिछले महीने राष्ट्रपति मुर्सी को अपदस्थ किए जाने के समर्थन करने का आरोप लगाया है.

काहिरा में मौजूद बीबीसी संवाददाता बेथनी बेल ने कहा कि आम लोग नज़र बनाए हुए हैं कि क्या बुधवार की घटनाओं के बाद ब्रदरहुड की कार्रवाइयों में तेज़ी आएगी या फिर सैन्य सरकार सत्ता पर अपने पकड़ मज़बूत करेगी.

रिपोर्टों के मुताबिक गुरुवार को सुरक्षा बलों पर नए हमले हुए जिसमें सिनाई प्रायद्वीप में कम से कम सात सैनिक और एक पुलिसकर्मी मारे गए.

इस बीच अमरीका में रिपब्लिकन पार्टी के सेनेटर जॉन मैक्केन ने बीबीसी न्यूज़नाइट कार्यक्रम से बातचीत में कहा कि राष्ट्रपति मुर्सी को सत्ता से बाहर करना 'सैन्य विद्रोह' है और राष्ट्रपति ओबामा को मिस्र को दिए जाने वाली सहायता को रोक देना चाहिए.

अमरीका ने इसे अभी तक सैन्य विद्रोह नहीं कहा है क्योंकि अमरीकी कानून के मुताबिक ऐसा करने पर मिस्र को दी जारी सभी अमरीकी सहायता पर रोक लग जाएगी.

उधर मिस्र में हुई सैन्य कार्रवाई पर चर्चा के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक हुई.

बैठक के बाद जारी एक संक्षिप्त बयान में सुरक्षा परिषद ने हिंसा में हुई मौतों पर खेद प्रकट किया और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की.

बैठक का उद्देशय मिस्र को यह संकेत देना था कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नज़र वहां के घटनाक्रम पर है.

एक बंद कमरे में होने वाली इस बैठक को ब्रिटेन, फ़्रांस और ऑस्ट्रेलिया के कहने पर बुलाया गया था. इन देशों की सरकारों ने मिस्र में हुई हिंसा की <link type="page"><caption> कड़ी आलोचना</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130815_world_reactions_on_egypt_rns.shtml" platform="highweb"/></link> की है. तुर्की ने मिस्र से अपने राजदूत को वापस बुला लिया है.

राजधानी क़ाहिरा और अन्य शहरों में लगातार दूसरे दिन रात का कर्फ्यू लगाया गया है. गुरुवार को दिन के वक़्त अपदस्थ राषट्रपति मोहम्मद मुर्सी के समर्थकों और सैन्य बलों के बीच अलेक्ज़ेंड्रिया में हिंसक झड़पें होती रहीं. क़ाहिरा के पश्चिमी उपनगर गीज़ा में सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया गया.

अंतिम संस्कार

इस बीच सैन्य कार्रवाई में मारे गए मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थकों को दफ़न किया जाना शुरू हो गया है. क़ाहिरा के नस्र शहर में एक मस्जिद में रखे कुछ शवों की पहचान अभी की जानी है. कई शव गलने भी लगे हैं.

मिस्र हिंसा

एक ब्रदरहुड समर्थक ने कहा, "शव इस तरह ज़मीन पर पड़े हैं और हम उन्हें दफ़ना नहीं पा रहे हैं. कुछ अधिकारी आए थे और लोगों से अपने संबंधियों को दफ़नाने के लिए कहा था. जो लोग मारे गए हैं वे मुसलमान थे. जो हुआ है वह नरसंहार था जिसके बारे में मिस्र के हर नागरिक को सवाल करना चाहिए."

ग़ैरक़ानूनी मौतें

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच भी बुधवार को हुई हिंसा की जाँच कर रहा है. संगठन की मिस्र इकाई की निदेशक हेबा मोरायेफ़ ने ये जानकारी दी.

उन्होंने कहा, "हम बुधवार को विरोध प्रदर्शनों को हटाने के लिए सेना द्वारा की गई कार्रवाई की जाँच करने की प्रक्रिया में हैं. हम इस बात की जाँच कर रहे हैं कि सेना द्वारा किया गया बल प्रयोग किस हद तक ज़रूरत से ज़्यादा और ग़ैरक़ानूनी था. हम जानते हैं कि मुस्लिम ब्रदरहुड की ओर भी कुछ हथियार थे. अकेले रबा अल अदविया में ही कम से कम 235 लोग मारे गए हैं. यह संख्या बहुत ज़्यादा भी हो सकती है. हम यह स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कितनी ग़ैरक़ानूनी मौतें हुईं."

मिस्र हिंसा

मिस्र के उपराष्ट्रपति मोहम्मद अल बारादेई ने हिंसा के बाद अंतरिम <link type="page"><caption> सरकार से इस्तीफ़ा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/08/130814_egypt_clash_ra.shtml" platform="highweb"/></link> दे दिया है.

अंतिम विकल्प

लेकिन दूसरी तरफ़ मिस्र की सोशल डेमेक्रेटिक पार्टी के मुखिया मोहम्मद अबुलग़ार का मानना है कि विरोध प्रदर्शनों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के अलावा प्रशासन के पास कोई विकल्प नहीं था.

उन्होंने कहा, 'कोई देश यह बर्दाश्त नहीं करेगा कि हज़ारों की तादाद में हथियारों से लैस लोग शहर के मुख्य चौराहों पर इकट्ठा हों. यूरोप का कोई भी देश इस तरह के जमावड़े को कभी भी बर्दाश्त नहीं करेगा. उन्होंने प्रयास किया और वे नाकाम हो गया और उन्होंने कहा कि वे नाकाम हो गए. हम यूरोप से मिले, हम अमरीकियों से मिले और हम जानते थे कि वे कुछ भी हासिल नहीं कर सकते. हमने मुस्लिम ब्रदरहुड से बात करने की हर संभव कोशिश की. उन्होंने हमसे बात करने या कोई भी समझौता करने से साफ़ इंकार कर दिया.'

हिंसक कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए मिस्र की अंतरिम सरकार ने कहा है कि पुलिस को आत्मरक्षा में फॉयरिंग करने की अनुमति दी गई थी.

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