चालीस साल बाद जंगल से निकले पिता और पुत्र

वियतनाम में अधिकारियों ने 40 साल पहले युद्ध के दौरान जंगल में भाग गए एक <link type="page"><caption> पिता और पुत्र</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2010/11/101125_bathroom_oldlady_ap.shtml" platform="highweb"/></link> को वहां से बाहर निकलने के लिए मना लिया गया है.
बताया जाता है कि बारुदी सुरंग से परिवार के तीन सदस्यों की मौत के बाद हो वान लांग और उनके 82 साल के पिता ने बाहरी दुनिया से संपर्क ख़त्म कर दिया था.
इन दोनों ने जंगल में जितना समय बिताया गया उसमें से ज़्यादातर समय उनका अता-पता मालूम नहीं था.
जब ये दोनों मध्य कुआंग नगाई प्रांत के घने जंगलों में मिले, उस वक्त ये ठीक से बातचीत भी नहीं कर सकते थे. अधिकारियों का कहना था कि हो को स्थानीय कोर बोली के कुछ ही शब्द आते हैं.
जंगल में ज़िंदगी
वियतनामी मीडिया की ख़बरों के मुताबिक हो वान लांग के भाई ने 20 साल पहले उनका ठिकाना ढूंढ लिया था लेकिन वे उन्हें वापस लौटने के लिए तैयार नहीं कर पाए.
जंगल में पिता और पुत्र सिर्फ़ लंगोटी पहनते थे और पेड़ काटने के लिए घर में बनी कुल्हाड़ी का इस्तेमाल करते थे. इस दौरान उन्होंने जंगल में उगने वाले फल, मकई और कसावा की जड़ें खाकर गुज़ारा किया.

ये दोनों ज़मीन से पांच मीटर ऊपर पेड़ पर बने एक घर में रह रहे थे जहां उन्होंने शिकार के लिए धनुष बाण और जानवरों को मारने के लिए चाकू रखे हुए थे.
झोपड़ी में एक तरफ़ सलीके से तह की गई खाकी पतलून और वो छोटा लाल कोट मिला है जो माना जा रहा है कि भागते वक्त उनके बेटे ने पहना हुआ था.
सदमा
कहा जा रहा है कि ये दोनों स्थानीय लोगों के एक समूह को मिले जो इनके अजीबोग़रीब हाव-भाव और शक्ल-सूरत देखकर भौंचक्के रह गए. इन लोगों ने पिता-पुत्र की ख़बर एक स्थानीय समुदाय के नेता को दी जिसने इन्हें ढूंढने के लिए एक दल बनाया.
गुरुवार को पांच घंटे की खोज के बाद ये दोनों उस दल को पेड़ पर बनी अपनी झोपड़ी में मिले.
अधिकारियों का कहना है कि बारुदी सुरंग से हुए धमाके के सदमे के बाद हो जंगल में भाग गए.
इन दोनों की बाहरी दुनिया में वापसी पर सबसे पहले उनकी मेडिकल जांच की जा रही है.
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