चीन में जन विरोध के बाद परमाणु संयंत्र बंद

चीन में सरकार ने लोगों के भारी विरोध के कारण दक्षिणी शहर जियांगमेन में बनने वाले परमाणु संयंत्र की योजना फ़िलहाल रद्द करने का फ़ैसला किया है.
लगभग चार अरब पाउंड के इस संयंत्र से <link type="page"><caption> चीन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130708_china_death_sentence_sk.shtml" platform="highweb"/></link> की आधी परमाणु ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा किया जाना था.
ये प्रस्तावित संयंत्र <link type="page"><caption> कोयला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/07/130709_china_coalpolicy_ss.shtml" platform="highweb"/></link> पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की चीन की राष्ट्रीय योजना का एक अहम हिस्सा था.
संयंत्र के विरोधियों ने पहले ऑनलाइन रैली का आयोजन किया था जिसका नाम उन्होंने 'इन्नोसेंट स्ट्रॉल' यानि कि मासूम चहल क़दमी रखा था.
लेकिन इसको देखकर लगभग एक हज़ार लोग जियांगमेन की सड़कों पर उतर आए और संयंत्र के विरोध में नारे लगाने लगे.
जियांगमेन शहर हॉंग कॉंग से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर है.
'हमें बच्चे चाहिए'

प्रदर्शनकारी अपने हाथों में बैनर लिए हुए थे जिस पर लिखा था, ''हमें बच्चे चाहिए परमाणु(बम)नहीं''
इस प्रस्तावित संयंत्र से पर्यावरण को होने वाले ख़तरे के बारे में एक रिपोर्ट चार जुलाई को प्रकाशित हुई थी.
उसके बाद लगभग 10 दिनों तक इस बारे में विचार विमर्श होता रहा. लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इतने बड़े परमाणु संयंत्र से होने वाले फ़ायदे या नुक़सान के बारे में इतने कम समय में कोई फ़ैसला करना संभव नहीं.
लोगों के विरोध प्रदर्शन के केवल 24 घंटों बाद स्थानीय सरकार ने एक लाइन का बयान जारी कर कहा कि परियोजना को रद्द किया जा रहा है.
सरकारी बयान में कहा गया था, ''हेशान शहर की सरकार ने जन भावना का सम्मान करते हुए सीएनएनसी के लॉगवान इंडस्ट्रियल पार्क परियोजना को रद्द करने का फ़ैसला किया है.''
सोल स्थित बीबीसी संवाददाता जॉन सुडवर्थ के अनुसार सरकार ने आर्थिक कारण के बजाए शांति और स्थायित्व को ज़्यादा अहमियत दी.
उनके अनुसार चीन में विरोध प्रदर्शन इतना आसान नहीं लेकिन कभी-कभी वो भी प्रभावी हो सकते हैं.
इससे पहले 2007 में भी शियामेन में बन रहे एक केमिकल प्लांट को भी विरोध प्रदर्शन के बाद बंद करना पड़ा था.
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