23 साल बाद गिरफ़्त में आए रूसी जासूस दंपत्ति

जर्मनी में एक दंपति को करीब 23 साल तक रूस के लिए जासूसी करने का दोषी ठहराए जाने के बाद जेल भेजा गया है.
यह दंपति आंद्रियास और हाइडंरून अनश्लाग के नकली नाम से जर्मनी में रह रही थी. माना जा रहा है कि ये लोग क़रीब 25 साल पहले नकली पासपोर्ट के आधार पर उस समय के पश्चिमी जर्मनी में बसे थे.
स्टुटगार्ट की एक अदालत ने आंद्रियास को साढ़े छह साल और हाइडंरून अनश्लाग को साढ़े <link type="page"><caption> पांच साल</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/rolling_news/2012/02/120210_russia_spy_rn.shtml" platform="highweb"/></link> की सज़ा सुनाई.
इस शादीशुदा जोड़े को अक्तूबर 2011 में जर्मनी के पश्चिमी शहर मारबर्ग स्थित उनके आवास से गिरफ़्तार किया गया था. इन लोगों ने एक डच <link type="page"><caption> जासूस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/10/121013_international_others_southpole_spying_fma.shtml" platform="highweb"/></link> की सहायता की थी.
बेटी को भी खबर नहीं
पुलिस का मानना है कि इस दंपति के ऑस्ट्रियाई पासपोर्ट में दर्ज नाम नकली थे. माना जाता है कि ये रूसी नागरिक हैं और दोनों ही 50 वर्ष की उम्र को पार कर चुके हैं.
इन लोगों ने नीदरलैंड्स के विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के संदेश वाहक के रूप में काम किया. इनकी नेटो की ख़ुफ़िया जानकारी तक पहुँच थी. इस डच अधिकारी को बेनकाब कर उसे 12 साल के जेल की सजा सुनाई गई.
इस डच अधिकारी की गिरफ़्तारी के बाद ही इस दंपति का पता चला, जिसने खुफ़िया जानकारियां रूस की विदेशी ख़ुफ़िया सेवा एसवीआर तक पहुँचाईं.
बर्लिन में मौज़ूद बीबीसी संवाददाता स्टीफ़न इवांस के मुताबिक़ इस दंपति की बेटी जर्मनी में ही पैदा हुई और वहीं पली-बढ़ी. लेकिन उसे अपने माता-पिता की गतिविधियों की जानकारी नहीं थी. उसे उनके जासूस बनने से पहले की पहचान के बारे में भी कुछ नहीं पता था.
अभियोजकों के मुताबिक़ गिरफ़्तारी के समय अनश्लाग अपने स्टडी रूम में एक वायरलेस ट्रांसमीटर के सामने बैठी थीं, जिस पर शार्ट वेव फ्रिक्वेंसी पर कूट संदेश आ रहे थे. यह ट्रांसमीटर तार के जरिए एक कंप्यूटर से जुड़ा था.
अभियोजको के मुताबिक इस दंपति ने 1988 और 1990 में जर्मनी आने पर ख़ुद को दक्षिण अमरीकी मूल के ऑस्ट्रियाई नागरिक बताया था.
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