चॉकलेट नहीं काला सोना है ये...

- Author, इरने कासाली
- पदनाम, एस्मेरालड्स प्रांत, इक्वाडोर
कोलंबिया से लगती <link type="page"><caption> इक्वाडोर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/08/120816_assange_equador_pa.shtml" platform="highweb"/></link> की उत्तरी सीमा पर स्थित एस्मेरालड्स प्रांत के किसानों को इस बात का गर्व हैं कि वे काला सोना उगाते हैं.
हम यहां इक्वाडोर से निर्यात होने वाले तेल की नहीं बल्कि कोको के बीजों की बात कर रहे हैं.
इन बीजों से निकला मुलायम और कड़वे स्वाद वाला पदार्थ ही <link type="page"><caption> चॉकलेट का मुख्य घटक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/11/121118_chocolate_nobel_prize_aa.shtml" platform="highweb"/></link> है.
यह इस देश के उन उत्पादों में से एक है जो इसे प्रसिद्धि दिलाते हैं.
यह इस देश के इतिहास से भी जुड़ा हुआ है.
20वीं सदी की शुरुआत तक इक्वाडोर दुनिया का <link type="page"><caption> सबसे बड़ा कोको</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/04/130401_world_chocolate_pimple_spot_sp.shtml" platform="highweb"/></link> निर्यातक था.
पौधों में लगने वाली बीमारियों और अफ़्रीका व एशिया में ब्रिटिश और फ्रांसीसी उपनिवेशों में जुताई की नई तकनीकी के विकास के बाद सन 1900 की शुरुआत में इक्वाडोर ने अपनी यह स्थिति खो दी.
फ़ायदे की खेती

इससे किसान कोको छोड़कर केला और कॉफ़ी उगाने लगे जो कि उनके लिए अधिक फ़ायदेमंद था.
इसके बाद पश्चिम अफ़्रीका कोको उत्पादन और निर्यात में दुनिया में सबसे आगे हो गया.
वहां बड़े पैमाने पर सामान्य कोको का उत्पादन होने लगा. इसका इस्तेमाल चॉकलेट के स्वाद वाली मिठाइयां और टॉफ़ी बनाने में होता था.
कोको के अच्छे बीजों का इस्तेमाल उनके बेहतरीन स्वाद की वजह से स्वादिष्ट उत्पाद बनाने में किया जाता है.
यहां के दुनिया के कुल कोको उत्पादन का केवल पाँच फ़ीसदी ही पैदा होता है. लेकिन इसकी मांग बढ़ रही है.
वाइन की ही तरह चॉकलेट का स्वाद यह बताता है कि उसमें उपयोग किया गया कोको के बीज कहाँ के हैं और उन्हें सुखाया और उबाला कैसे गया है.
पिछले दशक में स्वादिष्ट कोको की मांग बढ़ने से इक्वाडोर अच्छे कोको बीजों के निर्यातक देश के रूप में उभरा है.
दुनिया भर में कोको के बेहतरीन बीजों की तलाश में घूमने आए चॉकलेट निर्माताओं के लिए इक्वाडोर पसंदीदा जगह है.
इससे कोको का उत्पादन यहाँ के किसानों की कमाई का टिकाऊ स्रोत बन गया है.
अच्छा व्यापार

इस इलाक़े में डॉन नाचो के नाम से मशहूर 66 साल के किसान इगनाकियो इस्टूपिनन कहते हैं, ''किसान कोको पर बहुत ज़्यादा ध्यान नहीं देते थे. लेकिन अब उसकी क़ीमत सबको पता चल गई है. यह हमारा सबसे अच्छा व्यापार है.''
विद्वानों का मानना है कि कोको के पौधे सबसे पहले अमेज़न नदी घाटी में उगे थे, शायद वेनेज़ुएला में जो कि कोको का बड़ा निर्यातक है.
हालांकि हाल में हुए कुछ अध्ययनों के मुताबिक़ इक्वाडोर कोको के बीजों को मूल घर हो सकता है.
पुरातत्वविद फ्रांसिस्कों वाल्डेज ने ईसा पूर्व 3300 के चीनी मिट्टी के कुछ बर्तन खोजे हैं, जिनमें कोको के अवशेष मिले हैं.
ये बर्तन इक्वाडोर के दक्षिण में अमेज़न नदी के किनारे बसे ज़ामोरा चिनचिपे में मिले हैं.
इनसे पता चलता है कि कोको के बीज पाँच हज़ार साल पहले भी उगाए और खाए जाते थे.
चॉकलेट का परिचय

पश्चिमी देशों में लोगों को 16वीं शताब्दी में चॉकलेट के बारे में उस वक्त पता चला जबकि मैक्सिको के शासक मोंटेजुमा ने स्पेनिश विजेता हेरनन कोर्टेस को 'जोकोल्टल' नाम का एक मसालेदार चॉकलेटी पेय पेश किया.
इस में जब चीनी मिलाई गई तो यह पूरे यूरोप में छा गया. पश्चिम को चॉकलेट से परिचय कराने में इक्वाडोर का महत्वपूर्ण योगदान है.
दक्षिण अमरीका के अन्य उपनिवेशों में सोना-चादी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध था, वहीं इक्वाडोर का कोको के लिए शोषण किया गया.
इक्वाडोर के मूल कोको के बीजों को 'नैसियोनल' या 'अरीबा' के नाम से जाना जाता है. माना जाता है कि यह नाम इसे इसकी खोज वाली जगह की वजह से दिया गया है.
अरीबा का अर्थ होता है, 'नदी के ऊपर'. इसके बहुत से पौधे गुयास नदी के किनारे हैं. यह नदी इक्वाडोर के सबसे बड़े शहर गुआयाकील की ओर बहती है.
चॉकलेट के स्वाद की पहचान करने वाले कहते हैं कि इक्वाडोर के कोको की सुगंध बहुत जटिल है.
क्योंकि जहाँ वे उगाए जाते हैं उसके मुताबिक़ अरीबा बीज के आकार और स्वाद में बहुत बड़े हैं.
इक्वाडोर में चॉकलेट

इक्वाडोर के मशहूर जैविक चॉकलेट ब्रांड ‘पैकरी’ के संस्थापक सैंटियागो पेराल्टा कहते हैं, ''हर बीज का अपना अलग स्वाद है.''
वे कहते हैं कि इक्वाडोर के चॉकलेट के इस स्वाद की वजह इसकी विविधता और भूमध्य रेखा पर बसा होना है.
पेराल्टा कहते हैं, ''हम कोको के बीजों के मुताबिक़ ही चॉकलेट बनाते हैं.'' वे कोको बीजों के हर नए लाट के बीजों को पहले चखते हैं.
लेकिन ढाई सौ साल तक कोको का निर्यात करने के बाद भी इस देश के लोग अभी तक यह नहीं जान पाए हैं कि आख़िर चॉकलेट बनता कैसे है.
पेराल्ट की कंपनी को उनके बेहतरीन चॉकलेट और व्यवसाय के वैकल्पिक मॉडल के लिए 2012 में अंतरराष्ट्रीय चॉकलेट आवार्ड से सम्मानित किया गया.
आज इक्वाडोर में कई और देसी कंपनियां चॉकलेट बना रही हैं. इक्वाडोर में विदेशी कंपनियां केवल कोको के बीजों के लिए ही नहीं बल्कि चॉकलेट बनाने भी आती हैं.
डॉन नाचो अपनी 60 एकड़ ज़मीन पर वे कोको के साथ-साथ 30 तरह के फल उगाते हैं. वह कहते हैं कि दुनिया में इक्वाडोर की छवि चमकाने के लिए हमे मिलकर काम करना होगा.
इक्वाडोर का यह काला सोना यहाँ के किसानों का भविष्य सुनहरा बनाएगा, इसी समय इक्वाडोर दुनिया में चॉकलेट बनाने वाले देशों के नक्शे पर भी आ जाएगा.
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