'पाकिस्तान में रिकॉर्ड मतदान चरमपंथ की हार'

पाकिस्तान में चुनाव
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चरमपंथियों और लोकतंत्र विरोधी गुटों के हमलों के बावजूद <link type="page"><caption> रिकॉर्ड तोड़</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/05/130511_pakistan_election_voting_aa.shtml" platform="highweb"/></link> वोटिंग और एक नई सरकार के गठन की तैयारियों के साथ पाकिस्तान में एक ऐतिहासिक दौर की शुरुआत हो गई है.

<link type="page"><caption> पाकिस्तान चुनाव पर विशेष</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/pakistan_election_2013.shtml" platform="highweb"/></link>

चरमपंथी संगठन पिछले कई वर्षों से पाकिस्तान में पहले से ही कमजोर लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंचा रहे थे.

दरअसल चरमपंथियों को सबसे बड़ा भय <link type="page"><caption> चुनाव</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/pakistan_election_2013.shtml" platform="highweb"/></link> और लोकतांत्रिक व्यवस्था से ही होता है.

पिछले कुछ वर्षों में चरमपंथियों ने पाकिस्तान में 35 हजार से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया. पाकिस्तान अमरीका की जंग लड़ते लड़ते अपनी जंग हारता हुआ महसूस करने लगा था.

पाकिस्तान के आम चुनावों में नवाज शरीफ की पार्टी की जीत का मतलब है कि जनता ने देश में राजनीतिक स्थिरता और सुशासन के लिए वोट दिया है.

अहम मोड़ पर पाकिस्तान

माओवादी हों, तमिल टाइगर्स हों या फिर लश्कर-ए-तैयबा, हर चरमपंथी गुट का एक दिन अंत जरूर आता है. पाकिस्तान में चरमपंथी गुट अब अपने अंत की ओर अग्रसर हैं.

उनके सामने कोई राजनीतिक लक्ष्य नहीं है और उनका अस्तित्व रानजीतिक स्थिरता के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है.

उनका समर्थन ढांचा भी टूट रहा है. दुनिया के साथ पाकिस्तान भी समय के साथ बदल रहा है. वहां के रानजीतिक दल भी बदल रहे हैं. पाकिस्तान अपने वजूद के अहम मोड़ पर है.

पाकिस्तान चुनाव
इमेज कैप्शन, दुनिया भर में पाकिस्तानी चुनावों की चर्चा है

पिछले दस वर्षों में लोकतंत्र को कभी सेना तो कभी न्यायपालिका तो कभी चरमपंथियों ने नुकसान पहुंचाने की कोशिश की लेकिन पाकिस्तान के विचारों में लोकतंत्र मजबूत होता गया.

यही कारण रहा कि सैन्य शासन होने के बावजूद जनरल मुशर्रफ की नाजायज सरकार पाकिस्तान के इतिहास की सबसे उदारवादी और सहिष्णु सरकार रही.

चरमपंथियों की हार

अमरीका पाकिस्तान से लगभग जा चुका है और अफगानिस्तान से जाने की तैयारी कर रहा है.

ऐसे में नवाज शरीफ का ध्यान अब देश के पुनर्निमाण पर केंद्रित होगा. मुस्लिम लीग (एन) का घोषणापत्र उन्नति और शांति का एक सकारात्मक दस्तावेज है. इनके अलावा नवाज शरीफ के सामने कोई और विकल्प भी नहीं है.

पाकिस्तान अपनी कमियों के बावजूद पूरी इस्लामी दुनिया का इकलौता बहुदलीय लोकतंत्र है. इस समय वो अपने ऐतिसाहिक प्रजातांत्रिक संक्रमण के दौर से गुजर रहा है.

चरमपंथियों ने अपना बचा हुआ बारूद चुनाव को विफल करने के लिए झोंक दिया था. लेकिन चुनावों का सफलतापूर्वक आयोजन चरमपंथियों की हार का प्रतीक है.