पाक प्रेस में जश्न :'चुनाव मील का पत्थर '

पाकिस्तान में आम चुनाव के बाद वहां के अखबारों ने राष्ट्रीय मूड को दर्शाया है. सभी अखबार एक लोकतांत्रिक सरकार के दूसरी नागरिक सरकार को सत्ता सौंपने को लेकर लोग जोश और उत्साह से भरे हुए हैं.
पाकिस्तान के इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है.
ज़्यादातर अखबारों की संपादकियों और ट्विटर पर प्रसिद्व व्यक्तियों के संदेश ये कह रहे है कि लोगों ने हिंसा और धमकियों के बावजूद वोट डालकर चरमपंथी समूहों जैसे तहरीक ए तालिबान को उपयुक्त जवाब दिया है.
समाचार पत्रों में पिछले दो दिनों से छप रहे संपादकीय, लेख और विश्लेषण चुनाव पर ही लिखे जा रहे हैं, भले ही उनके कहने का लहाजा अलग -अलग हो लेकिन कहने का आशय एक ही है और वो ये कि ' लोकतंत्र की जीत हुई हैं.'
डॉन अखबार की सुर्खी है , 'सबसे बेहतरीन घंटे :चुनाव का दिन '. इस हेडलाइन में राष्ट्रीय भावनाओं को जाहिर किया गया है जिसका इतिहास लगातार हुए सैन्य तख्तापलट, हत्या और आंतकवाद से बिगड़ चुका है.
खुशी का इज़हार
अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा है, ''वो दिन आ गया है, जिस दिन के बारे में लोग सोच रहे थे कि वो कभी नहीं आएगा, वो था चुनावी दिन. एक अहम कदम जहां एक नागरिक सरकार के पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद सत्ता दूसरी नागरिक सरकार को सौंपी जाएगी. ये एक ऐसे देश के लिए उपलब्धि है जो राजनीति में कई बड़े उतार-चढ़ाव देख चुका है.''
डेली टाइम्स भी इन्ही भावनाओं को बंया कर रहा है. अखबार लिखता है, लोकतंत्र, लोगों के बीच अपनी जड़े जमा रहा है जिसका सबूत धमकियों के बावजूद लोगों का इतनी बड़ी तादाद में आकर वोट करना है.
द न्यूज़ अखबार का कहना है कि पाकिस्तान 'एक दूसरी राह' पर बढ़ रहा है और साल 2013 को आने वाले दिनों में याद किया जाएगा.
उम्मीद
पाकिस्तान ऑब्जर्वर ने पाकिस्तान की जनता की प्रशंसा करते हुए कहा है कि ये लोगों के साहस और दृढ़ता का परिचायक है जो देश में बदलाव देखना चाहते हैं.
एक्स्प्रेस ट्रिब्यून का मानना है कि मतदान केंद्रो पर बड़ी संख्या में महिला वोटरों का आना, वो भी बड़े शहरों की, जो भविष्य के लिए एक उत्साहपूर्ण है.
उर्दू के अखबार नवा ए वक्त का कहना है पिछले दिनों में जिस तरह की हिंसा हुई और चरमपंथियों ने जिस तरह की चुनावों को लेकर धमकी दी है, सेना, चुनाव आयोग , न्यायप्रणाली और लोगों के साझे प्रयास की ही नतीजा है कि चुनाव संपन्न हो पाए हैं.
इन चुनाव को लेकर अखबार खुश नजर आ रहे हैं लेकिन इस बीच ये भी कहा जा रहा है कि ये केवल एक शुरुवात है और नई सरकार को भविष्य में कई चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा.
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