सरबजीत सिंह की लाहौर के अस्पताल में मौत

पाकिस्तान में सरबजीत पिछले 22 साल से जेल में बंद थे.
इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में सरबजीत पिछले 22 साल से जेल में बंद थे.

पाकिस्तान में फांसी की सज़ा का इंतज़ार कर रहे भारतीय कैदी सरबजीत सिंह की लाहौर के जिन्ना अस्पताल में मौत हो गई है.

लाहौर से बीबीसी संवाददाता इबादुल हक़ का कहना है कि उनकी तबीयत देर रात और अधिक बिगड़ गई थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सरबजीत की मौत भारतीय समयानुसार रात डेढ़ बजे हुई.

सरबजीत सिंह का पोस्टमार्टम गुरूवार को होगा जिसके बाद उनका शव भारत सरकार के हवाले किया जा सकता है.

लाहौर की कोट लखपत जेल में कैदियों के हमले में बुरी तरह जख्मी होने के बाद पिछले छह दिन से वो कोमा में थे.

हमला

शुक्रवार 26 अप्रैल को कोट लखपत जेल में छह क़ैदियों ने सरबजीत सिंह के सिर पर ईंट और धारदार हथियार से वार किया था जिससे उनके सिर में गंभीर चोटें आई थीं और वो कोमा में चले गए थे.

सरबजीत सिंह को लाहौर के जिन्ना अस्पताल के आपातकालीन वॉर्ड में आईसीयू में रखा गया था. उनके सिर के भीतर रक्तस्राव हुआ था और डॉक्टरों का कहना था कि जब तक उनकी हालत स्थिर नहीं होती, सर्जरी नहीं की जा सकती.

सरबजीत की खराब होती हालत को देखते हुए पाकिस्तान ने कहा था कि वो उन्हें इलाज के लिए भारत भेजने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है.

इससे पहले भारत ने उनके बेहतर इलाज के लिए उन्हें भारत भेजने की मांग की थी और कहा था कि ये समय कूटनीतिक और कानूनी मसलों पर विचार करने का नहीं है.

परिवार

पाकिस्तान सरकार से वीजा मिलने के बाद सरबजीत का परिवार उनसे मिलने लाहौर गया था. उनके परिवार के लोग बुधवार को ही भारत वापस लौटे हैं.

सरबजीत सिंह पर 1990 में पाकिस्तान में बम धमाकों में हिस्सा लेने का आरोप था. इन हमलों में 14 लोग मारे गए थे.

लेकिन, सरबजीत का परिवार इन आरोपों से इनकार करता रहा था. परिवार के मुताबिक धमाकों में हिस्सा लेने वाले कोई दूसरे लोग थे और ये गलत पहचान का मामला है.

भारत कई स्तर पर सरबजीत के लिए रिहाई का मसला उठा चुका था.