मौत की सज़ा के मामले में चीन 'अव्वल'

मुंबई हमलों के दोषी अजमल कसाब और फिर उसके बाद अफ़ज़ल गुरू की फांसी के बाद से भारत में मौत की सज़ा पर बहस तेज़ हुई है.
लेकिन मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की मानें, तो दुनियाभर में मौत की सज़ा दिए जाने की संख्या में गिरावट आई है.
रिपोर्ट के मुताबिक एक और जहां इराक़ में 2012 में उसके पिछले साल के मुक़ाबले तकरीबन दोगुना लोगों को मौत की सज़ा दी गई.
वहीं दूसरी और भारत और पाकिस्तान में सालों तक किसी को फांसी की सजा नहीं दी गई, लेकिन पिछले साल यहाँ लोगों को मौत की सज़ा हुई.
सज़ा ए मौत के मामलों में कमी
दुनिया भर में मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में कहा है कि चीन मौत की सज़ा देने के मामले में दुनिया में अव्वल नंबर पर है जबकि ईरान, इराक़, सउदी अरब और अमरीका इसके बाद आते हैं.
कुछ देशों के उदाहरणों को छोड़ दें तो एमनेस्टी का कहना है कि पूरी दुनिया में मौत की सज़ा दिए जाने के मामलों में कमी आई है. अमरीका में ही 2012 में नौ राज्यों में मौत की सज़ा दी गई जबकि उसके पिछले साल 13 लोगों यह सज़ा दी गई थी.
समाचार एजेंसी एपी ने एमनेस्टी की रिपोर्ट के हवाले से कहा है, “साल 2012 के आंकड़े साफ बताते हैं कि दुनिया भर में मौत की सज़ा को दिए जाने के मामलों में कमी आई है. विश्व भर में केवल दस ही देश ऐसे हैं जहां मौत की सज़ा दिए जाने का प्रावधान है.”
समाचार एजेंसी एएफपी के मुताबिक इराक़ में साल 2013 में अभी तक 29 लोगों को फांसी की सज़ा दे दी गई है जबकि पिछले साल वहां 129 लोगों को यह सज़ा दी गई थी.
चीन में सबसे ज्यादा
इराक़ में मार्च में यह घोषणा की गई थी कि 14 और 17 तारीख को कुल 18 लोगों को मौत की सजा दी गई थी.
फांसी देने के मामले में भारत और पाकिस्तान देश दुनिया के पांच शीर्ष देशों की कतार में नहीं हैं.
ईरान में 2012 में 314 लोगों को मौत की सज़ा दी गई जबकि सऊदी अरब में कम से कम 79 लोगों को. अमरीका में 43 लोगों को ये सज़ा दी गई. वहां 2011 में भी संख्या इतनी ही थी.
लेकिन चीन के बारे में कोई ठोस आँकड़े नहीं मिल पाए हैं. वहाँ इस संख्या को गुप्त रखा जाता है. लेकिन एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि वहाँ हज़ारों की संख्या में लोगों को मौत की सज़ा दी गई. यानी दुनिया के बाकी देशों को मिलाकर भी सबसे ज़्यादा.
रिपोर्ट में पाया गया है कि दुनिया में इस सज़ा को खत्म करने की दिशा में अहम काम हुआ है. हालांकि कई देशों ने फिर से ये सज़ा शुरु की है. मौत की सज़ा को खत्म करने वाला लातविया 97वां देश बन गया है.












