ऑस्ट्रेलिया में बाल यौन अपराधों की व्यापक जांच

ऑस्ट्रेलिया के कैथोलिक चर्चो में पिछले साल बच्चों के यौन शोषण के सनसनीखेज़ मामले सामने आए थे और यह आरोप पादरियों पर लगे थे.
देश की प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने इन यौन अपराधों की जांच करने के लिए एक कमीशन का गठन किया है.
सवाल है क्या यौन शोषण से पीड़ित बच्चों को न्याय मिल पाएगा?
कहा जा रहा है कि 5,000 लोग इन घटनाओं के बारे में कमीशन के सामने गवाही देंगे.
ये कमीशन 1930 के बाद से कैथोलिक चर्चों में बच्चों के यौन शोषण की घटनाओं की जांच करेगा.
आंकडे
पिछले 82 साल की अवधि में बच्चों के यौन शोषण के 600 मामले सामने आए हैं.
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य ने भी माना है कि कैथोलिक पादरियों ने बच्चों का यौन शोषण किया है.
पिछले कुछ सालों में ऑस्ट्रेलिया में बच्चों को यौन शोषण की कई घटनाएं सामने आई हैं.
जुलाई 2008 में ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर गए पोप बेनेडिक्ट ने इन घटनाओं के लिए लोगों से माफी भी मांगी थी. उन्होंने कुछ पीडि़तों से मुलाकात भी की थी.
ऑस्ट्रेलिया की प्रधांनमंत्री जूलिया गिलार्ड ने कहा है कि कमीशन 'असहज बना देने वाले सच' को समाने लाएगा.
कमीशन के गठन को गिलार्ड ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 'अहम नैतिक क्षण' माना है.
पूछताछ के दायरे में धार्मिक संगठनों के साथ साथ गैर सरकारी संगठन और सरकारी एजेंसिया भी शामिल हैं.
कमीशन की जांच कब तक पूरी होगी इस बारे में पूछे जाने पर अधिकरियों ने बताया कि 2015 तक जांच पूरा होने में संदेह है.
इससे पहले मांग की गई थी कि जांच 2015 तक पूरी हो जानी चाहिए.
कमीशन बच्चों के यौन शोषण की घटनाओं के संस्थागत पहलू पर खास ध्यान देगा.
दर्द पर मरहम?

चर्च में बच्चों के यौन शोषण की घटनाओं की जांच करने के लिए कमीशन के गठन का ऐलान पिछले साल नवंबर में प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने किया था.
पुलिस का आरोप है कि कैथोलिक चर्च ने बच्चों का यौन शोषण करने वाले पादरियों के खिलाफ सबूतों को छिपाया है.
गिलार्ड ने ऑस्ट्रेलिया की सरकारी मीडिया से बात करते हुए कहा, “यौन शोषण के पीड़ितों ने खुद को बंद कर लिया है. कमीशन का गठन उनके लिए एक तरह का उपचार है. हम चाहेंगे कि कमीशन इस बारे में हमें भविष्य के लिए सलाह भी उपलब्ध कराए.”
कमीशन के अध्यक्ष पीटर मैकक्लान ने कहा कि कमीशन ने कैथोलिक चर्च को सबूत पेश करने के लिए नोटिस भेज दिया है.
इस कमीशन में कुल छह सदस्य हैं जिनमें से एक या दो लोगों को पीड़ितों से अकेले में बात करने का अधिकार दिया है.
अनुमान लगाया गया है कि एक पीड़ित को अपनी आपबीती सुनाने में औसतन एक घंटे लगेगा.
मैक्कलान का यह भी कहना है कि कमीशन को जांच पूरी करने में समय लगेगा और उसमें समय भी लगेगा.












