मंडेला पर हो रहा है 'इलाज का असर'

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जैकब जूमा ने कहा है कि अस्पताल में भर्ती पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला पर इलाज का असर हो रहा है और लोगों को उन्हें लेकर कोई अफरा तफरी नहीं मचानी चाहिए.
मंडेला को फिर से फेंफड़ों का संक्रमण हो जाने के बाद बुधवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
दक्षिणी अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय से दी गई जानकारी के अनुसार 94 वर्षीय मंडेला का अस्पताल में अब भी इलाज चल रहा है और उन्हें निगरानी में रखा जा रहा है.
राष्ट्रपति जूमा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “उन पर इलाज का अच्छा असर हो रहा है जो अच्छी खबर है. बेशक मैं लोगों से कहता रहा हूं कि अब मडीबा उतने जवान नहीं रह गए हैं. और उन्हें फिर से चेक-अप के लिए जाना पड़े है तो लोगों को चिंता नहीं करनी चाहिए. चिंता को कम कीजिए. उन पर इलाज का अच्छा असर हो रहा है. वो अच्छे डॉक्टरों के हाथों में हैं.”
सेहत चिंता का विषय
मंडेला को बहुत से दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपिता मानते हैं और लोग उन्हें प्यार माडिबा कह कर पुकारते हैं. मंडेला ने रंगभेद के खिलाफ मुहिम चला काले दक्षिण अफ्रीकी लोगों को बराबरी का अधिकार दिलाया था.
वो 1994 से 1999 तक दक्षिण अफ्रीका के पहले काले राष्ट्रपति रहे हैं. हालांकि उनकी तबीयत कुछ समय से चिंता का विषय रही है.
पिछले दो साल के दौरान चौथी बार मंडेला को अस्पताल में भर्ती होना पड़ा है. उन्हें बुधवार को मध्यरात्रि से पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
मंडेला इससे पहले दिसंबर में भी 18 दिनों तक अस्पताल में रहे थे और उनका फेंकड़ों के संक्रमण और पित्त की पथरी का इलाज हुआ था.
राष्ट्रपति जैकब जूमा के कार्यालय की ओर से ये नहीं बताया गया है कि किस अस्पताल में मंडेला का इलाज चल रहा है.
जेल में हुई थी टीबी

उन्हें पहली बार 1980 में तपेदिक यानी टीबी का पता चला था और तब उन्हें हवादार रॉबैन द्वीप पर रखा गया था. वहां उन्होंने सरकार के खिलाफ़ षड्यंत्र के मामले में 27 साल की सज़ा में से 18 साल काटे थे.
कहा जाता है कि उनके फेफड़ों को नुकसान तब पहुंचा था जब वो जेल की खदान में काम कर रहे थे.
साल 1990 में जेल से बाहर आने के बाद दिसबंर 2012 में वो सबसे लंबे समय के लिए अस्पताल में भर्ती हुए थे.
इसी महीने की शुरुआत में राजधानी प्रिटोरिया के अस्पताल में चेकअप के लिए वो एक रात भर्ती रहे थे.
मंडेला 2004 में सार्वजनिक जीवन से रिटायर हो गए थे और तब से मुश्किल से ही उन्हें बाहर देखा गया है.
वो अब कुनु में रहते हैं जो पूर्वी केप प्रांत का एक छोटा सा गांव है. उनका कहना है कि उन्होंने अपने बाल जीवन के सबसे बेहतर दिन वहीं बिताए थे.












