'पिता से नाराज़ नहीं बिलावल भुट्टो'

पाकिस्तान में सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी(पीपीपी) ने उन ख़बरों को अफ़वाह क़रार दिया है जिनमें कहा गया था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति और अपने पिता आसिफ़ अली ज़रदारी से कथित मतभेदों के कारण पीपीपी के पैटरन-इन-चीफ़ बिलावल भुट्टो पाकिस्तान छोड़कर चले गए हैं.
बिलावल की बहन ने भी उनके भाई और उनके पिता के बीच कथित मतभेदों की ख़बरों को ख़ारिज कर दिया है.
ग़ौरतलब है कि भारतीय समाचार एजेंसी पीटीआई ने सोमवार को ख़बर दी थी कि अपने पिता से गहरे मतभेदों के कारण बिलावल भुट्टो पाकिस्तान छोड़कर दुबई चले गए हैं.
पीटीआई के अनुसार आगामी चुनावों में उम्मीदवारों के अलावा मलाला युसूफ़जई और हज़ारा शियाओं पर हो रहे हमलों के मुद्दे पर बिलावल और उनके पिता के बीच मतभेद पैदा हो गए थे.
पीटीआई के मुताबिक़ आसिफ़ अली ज़रदारी की बहन फ़रयाल तालपूर के कारण भी बिलावल को अपने पिता से नाराज़गी थी.
मतभेद की ख़बर
दूसरे दिन पाकिस्तानी अख़बार 'डॉन' ने भी पिता-पुत्र के बीच मतभेदों की बात छापी.
लेकिन पीपीपी और ख़ुद बिलावल भुट्टो की तरफ़ से इनका खंडन हो गया है.
पीपीपी की नेता शर्मिला फ़ारूक़ी ने डॉन अख़बार से बातचीत के दौरान कहा कि बिलावल दुबई चले गए हैं और वो चुनावी प्रचार में पाकिस्तान आकर हिस्सा नहीं लेंगे लेकिन इसकी वजह उन्होंने उनकी सुरक्षा बताई न कि उनके पिता से किसी तरह का मतभेद.
बिलावल भुट्टो के निजी स्टाफ़ हाशम रियाज़ ने भी उनके और उनके पिता के बीच कथित मतभेद को 'अफ़वाह' क़रार दिया.
कारण चाहे जो भी हो लेकिन इतना तो ज़रूर है कि ऐसे समय में जबकि पाकिस्तान में आम चुनाव होने वालें हैं तब सत्ताधारी पार्टी के प्रमुख और उनके सबसे बड़े प्रचारक का देश छोड़कर चले जाने पर सवाल उठने लाज़मी हैं.

जानकारों का कहना है कि दरअसल इस चुनाव में पीपीपी की स्थिति बेहतर नहीं है और इस कारण पीपीपी के वरिष्ठ नेताओं ने ये फ़ैसला किया है कि चुनाव प्रचार में बिलावल को शामिल करने से पार्टी का कोई ज़्यादा फ़ायदा नहीं होगा और ये उनके राजनीतिक करियर के लिए अच्छा नहीं होगा.
ग़ौरतलब है कि पीपीपी चार अप्रैल से पार्टी के गढ़ माने जाने वाले गढ़ी ख़ुदा बख़्श से चुनाव प्रचार की शुरूआत करेगी. हो सकता है कि बिलावल इस रैली को फ़ोन या वीडियो कॉंफ़्रेंसिंग के ज़रिए संबोधित करेंगे, लेकिन इस बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं है.
सोशल मीडिया
बीबीसी मॉनिटरिंग के अनुसार पाकिस्तानी मीडिया में बिलावल भुट्टो के पाकिस्तान छोड़कर चले जाने के बारे में ज़्यादा ख़बरें नहीं हैं. बहुत कम ही अख़बार या टीवी चैनलों में उनसे जुड़ी ख़बरें हैं.
लेकिन सोशल मीडिया में इस बारे में ख़ूब चर्चा हो रही है और लोगों की राय बंटी हुई है.
मेहर तरार ट्विटर पर लिखती हैं, ''पाकिस्तान में चुनाव की घोषणा हो गई है और हमेशा की तरह बिलावल पर हमले किए जा रहे हैं.''
सलमा जाफ़र ने ट्विट किया है, ''डॉन अख़बार को बंद कर देना चाहिए और उन्हें टीवी धारावाहिकों की स्क्रिप्ट लिखना शुरू कर देना चाहिए.''
बिलावल की बहन आसिफ़ा भुट्टो ने लिखा है, ''बिलावल और राष्ट्रपति ज़रदारी के बीच मतभेद की ख़बर में कोई सच्चाई नहीं हैं. ये सब ग़लत प्रचार की कोशिश है.''
लेकिन कुछ लोगों ने बिलावल भुट्टो के चले जाने पर उनकी आलोचना करते हुए भी ख़ूब लिखा है.
सैयद शहज़ाद शाहिद ने ट्विट किया है, ''अमीरज़ादे बिलावल भाग गए. शायद वो अपने पिता की राजनीति को समझ ही नहीं सके.''
सरूर एजाज़ ने लिखा है, ''बिलावल भुट्टो इतना अच्छा दौड़ते हैं कि उन्हें अबसे बिलावल बोल्ट ज़रदारी कहा जाना चाहिए.''
युसरा अस्करी ने ट्विट किया है, ''अगर ये कहानी मनगढ़ंत है तो फिर बिलावल ख़ुद सामने आकर जनता से सीधी बात क्यों नहीं करते.''
साक़िब नाम के एक व्यक्ति ने पीटीआई के हवाले से ट्विटर पर लिखा है, ''बात इतनी बढ़ गई थी कि बिलावल ने कहा कि अगर मुझे भी वोट देना होता तो मैं पीपीपी को वोट नही देता.''
ज़ैनब हुसैन ने ट्विट किया है, ''आप लोग आराम से रहें. बिलावल बहुत दबाव में हैं और अपनी चिंता दूर करने के लिए मसाज कराने के लिए गए हैं.''
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