'ब्लैक ब्यूटी' करेंगी ओबामा के साथ डिनर

पिछले तीन हफ्ते यातिश आयनाव के लिए चौंका देने वाले रहे हैं. कभी वे इथियोपिया से आई अनाथ थी, पर पिछले महीने मिस इसराइल के तौर पर चुनी गईं और अब उन्हें <link type="page"><caption> अमरीकी राष्ट्रपति</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/03/130320_international_us_obama_israel_vd.shtml" platform="highweb"/></link> बराक ओबामा की इसराइल यात्रा के दौरान उनके साथ रात के भोजन पर मिलने का न्यौता मिला है.
यातिश आयनाव जब इसराइल पहुंची थी वे महज 12 साल की थी. उनका ब्यूटी कंटेस्ट जीतना और बराक ओबामा के साथ डिनर, यह सब उनके ख्यालों से उतना ही दूर था जितना कि इथियोपिया से इसराइल की दूरी है.
मां के गुज़रने के बाद यातिश एक अनाथायलय के आसरे रह गईं थी. तब यातिश के ननिहाल के रिश्तेदार उसे इसराइल के आदिस अबाबा ले आए.
इथोपिया से इसराइल तक
यातिश के ये रिश्तेदार इथियोपियाई मूल के यहूदी थे और इसराइल में ही रहते थे. नए घर में यातिश को सबसे पहले हिब्रू सीखनी पड़ी.
अब 21 वर्ष की हो चुकीं यातिश ने बीबीसी को अपने अनुभवों के बारे में बताया, “यह बहुत आसान नहीं था. मैं हिब्रू नहीं बोल पाती थी. मुझे बिना किसी मदद के एक नियमित स्कूल भेज दिया गया.”
वह कहती हैं, “हिब्रू एक नई भाषा थी. एक नई संस्कृति से सामना हुआ. कई बार दूसरे बच्चे मुझ पर हंसते थे.”
लेकिन यातिश ने इरादा कर लिया था कि उसे अपने नए मुल्क में कामयाबी हासिल करनी है.
उन्होंने कहा,“हर मोर्चे पर खुद को साबित करने की जिम्मेदारी मैंने महसूस की. मैंने यह किया और इससे मुझमें कई सुधार भी हुए.”
सेना से जूते की दुकान तक

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद इसराइल के दूसरे नागरिकों की तरह यातिश को भी अनिवार्य सैन्य सेवा से गुजरना पड़ा.
तीन साल की सेवा के बाद उन्होंने पिछले साल सितंबर में सेना छोड़ दी.
27 फरवरी को मिस इसराइल चुने जाने के पहले यातिश ने नेतान्या में एक जूते की दुकान पर भी काम किया.
सौंदर्य खिताब जीतने के बाद उन्होंने कहा, “इथियोपियाई मूल के लोगों के लिए यह गर्व की बात है.”
प्रतिस्पर्द्धा के दौरान यातिश ने काले अमरीकियों के अधिकारों की आवाज बुलंद करने वाले नेता मार्टिन लूथर किंग को अपना प्रेरणा स्रोत बताया.
यातिश के दूसरे प्रेरणास्रोत अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा हैं.
उन्होंने बीबीसी से कहा, “मैं ओबामा से प्रभावित रही हूं. उनकी तरह मुझे भी मेरे नाना ने पाला पोसा. जिंदगी ने मुझे कुछ भी थाली में सजाकर नहीं दिया. मुझे इसके लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी. आज की तारीख में वह मुझे प्ररित करते हैं. ठीक उसी तरह जैसे वह सारी दुनिया को प्रभावित करते हैं.”












