अमरीका: भारतीय महिला को 'गुलाम' बनाकर रखा

अमरिका में एनी जॉर्ज नाम की एक अमीर महिला को भारतीय मूल की नौकरानी के उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार किया गया है.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक इस महिला ने भारत के केरल शहर की रहने वाली वलसम्मा मथाई को तनख्वाह देने में धांधली की और उन्हें अपने महलनुमा घर में एक <link type="page"> <caption> कैदी की तरह</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/02/130221_oxford_exploitation_trial_pk.shtml" platform="highweb"/> </link> रखा.
माना जा रहा है कि मथाई वहां अवैध रूप से रह रही थीं.
अदालत में पेश दस्तावेजों के मुताबिक एनी जॉर्ज (39) और उनके पति ने वलसम्मा मथाई को अल्बानी स्थित अपने घर में छह सालों तक <link type="page"> <caption> दयनीय स्थिति में</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130220_international_us_slavery_indian_rj.shtml" platform="highweb"/> </link> रखा.
मथाई को उनकी पति की कैंसर से हुई मौत के बाद अवैध वीज़ा के जरिए अमरीका लाया गया. उनके परिवार में दो बेटे और उनकी बीमार मां हैं.
ये <link type="page"> <caption> मामला</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/03/120305_maids_exploited_sdp.shtml" platform="highweb"/> </link> तब सामने आया जब भारत में मौजूद मथाई के बेटे ने साल 2011 में राष्ट्रीय मानव तस्करी निरोधी केंद्र से संपर्क किया.
'17 घंटे तक काम लिया जाता था'
एनी जॉर्ज का कहना है उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि यह महिला न्यूयॉर्क में अवैध रुप से रह रही थी और उन्होंने उसके साथ कोई <link type="page"> <caption> बदसलूकी</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/02/130207_brothel_job_vr.shtml" platform="highweb"/> </link> नहीं की.
एनी जॉर्ज पर एक अवैध प्रवासी को आर्थिक फायदे के लिए अपने साथ रखने का मामला चलाया जा रहा है जिसके तहत उन्हें दस साल तक कैद और 2,50,000 डॉलर के जुर्माने की सज़ा हो सकती है.
मथाई ने स्थानीय अधिकारियों को बताया है कि उन्हें एक कोठरी में सुलाया जाता था. उनसे प्रतिदिन 17 घंटे तक काम लिया जाता था और उन्होंने लगातार कई दिनों कर बिना किसी छुट्टी के काम किया. उन्हें किसी भी वक्त उस घर को छोड़कर जाने की इजाज़त नहीं थी.
अनुमान लगाया गया है कि मथाई को इतने सालों के काम के बदले सिर्फ 29,000 डॉलर मिले, जबकि उन्हें कम से कम 2,06,000 डॉलर मिलने चाहिए थे.












