शरारती ‘येलो चिक’ के दीवाने हुए चीनी!

चीन में आजकल ‘लिटिल येलो चिक’ की धूम मची है. इसकी लोकप्रियता का आलम ये है कि तीन महीने से भी कम वक्त में 22 लाख लोग इससे जुड़ चुके हैं.
दरअसल ‘लिटिल येलो चिक’ एक सोशल नेटवर्किंग <link type="page"> <caption> ऐप्लिकेशन</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/10/121002_pink_dollar_app_gay_va.shtml" platform="highweb"/> </link> है. 22 लाख उपभोक्ताओं वाले इस ऐप की ख़ास बात ये है कि ये समाचार, म्यूज़िक, फिल्मों से जुड़ी सूचनाएं तो देता ही है, साथ ही साथ 'गंदे' चुटकुले भी समझता है.
ख़ासतौर पर छात्रों में बेहद लोकप्रिय हो चुका ये ऐप <link type="page"> <caption> फ़ेसबुक</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/business/2012/04/120403_facebook_instagram_buy_ns.shtml" platform="highweb"/> </link> जैसे सोशल नेटवर्किंग प्लेटफ़ॉर्म 'रेनरेन' पर उपलब्ध है.
चीन में सोशल नेटवर्किंग ऐप यूं भी काफी लोकप्रिय हैं लेकिन ‘येलो चिक’ की बढ़ने की रफ़्तार सबसे तेज़ रही है.
'शरारती जवाब'

इसका इस्तेमाल करने वाले इस <link type="page"> <caption> ऐप </caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/04/120403_mobile_app_girls_around_me_ms.shtml" platform="highweb"/> </link>पर प्यार, संगीत, फ़िल्म, प्रदूषण और चुटकुले जैसे कई विषयों पर टिप्पणी और सवाल पोस्ट कर सकते हैं और ये ऐप तुरंत इनका जवाब देता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है जवाब देने का इसका तरीक़ा.
चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, “कोई भी व्यक्ति मैसेज पोस्ट कर सकता है जिसका ‘चिक’ अच्छा और शरारती जवाब देता है. ये जवाब किसी इंसान के निर्देश पर नहीं दिए जाते बल्कि इन्हें एक परिष्कृत सॉफ्टवेयर तैयार करता हैं. फिर भी ‘नेटिज़न्स’ (इंटरनेट की आभासी दुनिया के निवासी) इसके मज़ेदार और अनोखे जवाबों को पाकर खुश हो जाते हैं.“
ज़्यादातर यूज़र्स को इस बात से फ़र्क भी नहीं पड़ता कि उनकी समस्याओं और भावनाओं पर बात करने वाला कोई इंसान नहीं बल्कि एक कंप्यूटर प्रोग्राम है. उनके लिए महत्वपूर्ण ये है कि कोई तो है जिससे वो अपनी बात कह सकते हैं.
यूनिवर्सिटी के एक नए छात्र चैंग यूई कहते है, “बाहर से आए हम जैसे छात्रों के लिए ‘चिक’ बड़ी राहत की चीज़ है क्योंकि इससे हमें ये चिंता नहीं करनी पड़ती कि कोई परेशान होगा."
काम कैसे करता है ?
ये ऐप जवाब देने के लिए इंसानी आवाज़ का इस्तेमाल करता है और व्यक्तिगत सलाह की तरह ही जवाब देता है.
‘चिक’ अक्सर यूज़र्स को दुनिया के सबसे सुंदर लड़के या लड़की कहकर बात करता है और ऐसा लगता है कि चीन के <link type="page"> <caption> ‘नेटिज़न्स’</caption> <url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2013/01/130128_twitter_vine_pp.shtml" platform="highweb"/> </link> उसकी इसी अदा पर फिदा हो रहे हैं.
जवाब देने के लिए अपने शब्द ये ऐप वेब से ही चुनता है. इसके साथ ही यूज़र्स के सवालों और टिप्पणियों से भी सीखता है.
शिन्हुआ के मुताबिक, “चिक में खुद सीखने की क्षमता है. ये ताजा़ ख़बरों, घटनाओं, प्रचलित शब्दों और गंदे चुटकुलों तक को समझता है. सभी चीज़ें ये ऑनलाइन फॉलोअर्स से ही सीखता है.“
लेकिन ‘चिक’ की सफलता चीनी समाज की एक बड़ी समस्या को भी रेखांकित करती है.
सामाजिक ढांचे की कमी
चीन की 'एक-शिशु नीति' की वजह से बहुत से युवा वास्तविक जीवन में सामाजिक ज़िंदगी की कमी महसूस करते हैं.
चीन के रेनमिन विश्वविद्यालय में समाज विज्ञान के प्रोफ़ेसर जो ज़ियाओझेंग का कहना है,"ये ऐप युवाओं की लोगों से बात करने और भावनात्मक रूप से जुड़े होने की सामाजिक ज़रूरत को पूरा कर रहा है."
जो का ये भी मानना है कि इस ऐप की सफ़लता की एक बहुत बड़ी वजह सराकार की एक-शिशु नीति है.
वो कहते हैं, "बड़ा होते हुआ इकलौता बच्चा भावनात्मक रूप से अकेला महसूस करता है और इस वजह से आभासी दुनिया पर उसके निर्भर होने की काफ़ी संभावना होती है."












