ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में नग्न पुरुषों की तस्वीरों वाली एक अनोखी प्रदर्शनी लगी है जिसमें विभिन्न आकार-प्रकार के नग्न पुरुषों को देखा जा सकता है.
ये प्रदर्शनी वहां के एक प्रतिष्ठित संग्रहालय में लगी है.
लेकिन प्रदर्शनी के बाहर लगे पोस्टरों के खिलाफ बड़ी संख्या में आ रही शिकायतों की वजह से इसके आयोजकों को उन पोस्टरों को कुछ हद तक ढकने के लिए मजबूर होना पड़ा है.
प्रदर्शनी का शीर्षक रखा गया है नग्न पुरुष: 1800 से अब तक.
लियोपोल्ड संग्रहालय में इस शीर्षक से लगी प्रदर्शनी में ये जानने की कोशिश की गई है कि पुरुष नग्नता को विभिन्न शताब्दियों में कलाकारों ने किस तरह से निरूपित किया है.
प्रदर्शनी के प्रवेश द्वार पर ही मि. बेग नाम से प्लाईवुड की चार मीटर ऊंची तस्वीर में एक नग्न युवा पुरुष को दर्शाया गया है, जिसे देखने के बाद दर्शक को इस बारे में कोई संदेह नहीं रह जाता कि वो अंदर जाकर क्या देखने वाला है.
गुस्सा
प्रदर्शनी के भीतर इसी तरह की करीब 300 कलाकृतियां प्रदर्शित की गई हैं जिनकी वजह से वियना के लोगों का गुस्सा भड़क उठा है.
यहां फ्रांस के दो कलाकारों पिअरे और गिल्स की बनाई हुई वाइव ला फ्रांस नामक तस्वीर भी लगी हुई है जिसमें विभिन्न नस्लों के तीन युवा एथलीटों को नग्नावस्था में दिखाया गया है.
इन तीनों एथलीटों ने तस्वीर में मोजे और फुटबॉल खेलने वाले जूतों के अलावा कुछ भी नहीं पहन रखा है. यही तस्वीर पोस्ट की शक्ल में शहर में लगी थी जिसे देखकर लोगों ने आपत्ति दर्ज की थी.
"मुझे नग्न पुरुषों को देखकर बड़ा अच्छा लगा. हम लोग हर समय नंगी महिलाओं को ही देखते हैं, लेकिन यहां कुछ अलग तरह का दृश्य देखने को मिला जो कि बहुत अच्छा है"
वेरोनिका क्रेन, एक दर्शक
मगर प्रदर्शनी की शुरुआत वाले दिन इसके खिलाफ किसी भी दर्शक ने शिकायत नहीं दर्ज कराई क्योंकि तस्वीरों और ग्राफिक्स में पुरुष नग्नता के इससे भी ज्यादा उदाहरण उनके सामने थे. लोगों ने ऐसी तस्वीरें भी देखी थीं जिनमें सेक्स करते हुए दिखाया गया था.
प्रदर्शनी देखकर बाहर आए 27 वर्षीय एक दर्शक फ्रांज़ स्टीनर का कहना था, देर रात प्रसारित होने वाले टीवी कार्यक्रमों में मैंने इससे भी खराब दृश्य देखे हैं.
लेकिन शहर में ऐसा नहीं होना चाहिए. इसे देखते हुए पोस्टरों में युवाओं के निजी अंगों को तत्काल लाल पट्टी से ढक दिया गया.
हालांकि वियना के इतिहास में आखिरी दिनों में इगोन शील और गुस्ताव क्लिम्ट जैसे कई कलाकारों ने बेहद उत्तेजक कलाकृतियां बनाई हैं और आजकल भी ऐसी कलाकृतियां पतनकाल की कला के तौर पर स्वीकार की जाती हैं.
अंत:वस्त्रों की एक कंपनी के विज्ञापनों में ये चीजें खास तौर पर देखी जा सकती हैं और यहां का एक लोकप्रिय अखबार तो नियमित तौर पर अर्धनग्न महिलाओं की तस्वीरें प्रकाशित करता है.
पुरुष नग्नता बर्दाश्त नहीं
लेकिन पुरुष नग्नता लोगों को बर्दाश्त नहीं है. संग्रहालय के अधिकारियों का कहना है कि पिछले हफ्ते उन्हें इसके खिलाफ बड़े पैमाने पर शिकायतें मिली थीं और इनमें से ज्यादातर उन बाहरी इलाकों में रहने वाले लोगों की थीं जहां मुस्लिम देशों से आए नए प्रवासी रहते हैं.
"नग्न महिलाओं की तस्वीरों पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि पुरुष की नग्न तस्वीर लगा दी तो जरूर है."
तोबियस नातेर, संग्रहालय के निदेशक
संग्रहालय के निदेशक तोबियस नातेर कहते हैं, नग्न महिलाओं की तस्वीरों पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन यदि पुरुष की नग्न तस्वीर लगा दी तो जरूर है.
नातेर कहते हैं कि कुछ दर्शकों की सोच इससे अलग भी है.
वेरोनिका क्रेन तस्वीरों को देखकर अपनी गाड़ी कुछ क्षण के लिए रोक देती हैं. उनका कहना है, मुझे नग्न पुरुषों को देखकर बड़ा अच्छा लगा. हम लोग हर समय नंगी महिलाओं को ही देखते हैं, लेकिन यहां कुछ अलग तरह का दृश्य देखने को मिला जो कि बहुत अच्छा है..
बहरहाल संग्रहालय ने कई विवाद खड़े कर दिए हैं. नातेर को उम्मीद है कि इन पोस्टरों से गर्मागर्म बहस छिड़ेगी.
उनका कहना है, कुछ लोग कहेंगे कि ये क्या बेशर्मी है. मैं देखना चाहूंगा कि लाल पट्टी के अंदर क्या है. जबकि दूसरे कहेंगे कि चलो संग्रहालय चलकर देखते हैं. वहां असली चीज दिखेगी. जबकि कुछ ये भी कहेंगे कि बहुत अच्छा क्योंकि इसे हम सार्वजनिक जगह पर नहीं देखना चाहेंगे.
उनके मुताबिक ये लोगों को जागरूक करने की कोशिश है.

















