उत्तरी ध्रुव बना जासूसी का अड्डा

डेनमार्क की ख़ुफ़िया संस्था के प्रमुख ने कहा है कि उत्तरी ध्रुव दुनियां की मुख्य गुप्तचर एजेंसियों का गढ़ बनता जा रहा है.
राजधानी कोपेनहैगेन से बीबीसी संवाददाता मैलकोम ब्राबैंट का कहना है कि कि कई मुल्कों की ख़ुफ़िया संस्थाएं बर्फ़ के नीचे मौजूद खनिज संपदा को लेकर ज्य़ादा से ज़्यादा जानकारियां इकट्ठा करने की कोशिश कर रही हैं ताकि वो वहां की जमीन के अधिक से अधिक हिस्से पर अपने हक़ का दावा कर सकें.
संवाददाता के मुताबिक़ उत्तरी ध्रुव, देशों के बीच शक्ति के प्रतिस्पर्धा का नया ठिकाना बनता जा रहा है.
इक्कीसवीं सदी में ये स्थिति कुछ उसी तरह की है जिस तरह 100 साल पहले कभी मध्य एशिया क्षेत्र को लेकर ब्रिटेन और रूस के बीच हुआ करती थी.
पांच मुल्क
विश्व के पांच मुल्क- अमरीका, कनाडा, रूस, नार्वे और डेनमार्क इस इलाक़े पर अपना-अपना दावा करते हैं.
क्षेत्र में मौजूद ग्रीनलैंड पर फिलहाल डेनमार्क का क़ब्ज़ा है.
एक समाचार पत्र बर्लिन्सक को दिए गए साक्षात्कार में डेनमार्क की ख़ुफ़िया एजेंसी के प्रमुख जैकब शाफ़ ने कहा है कि उत्तरी ध्रुव में विदेशी गुप्तचर एंजेसियों की गतिविधियों में इज़ाफ़ा हुआ है.
उन्होंने कहा कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड को साइबर-स्पेस में हो रही जासूसी को लेकर ख़ासतौर पर सचेत रहने की ज़रूरत है.
चीन और दक्षिण कोरिया
उत्तरी ध्रुव को लेकर चीन और दक्षिण कोरिया की दिलचस्पी भी बढ़ती जा रही है.
चीन, ग्रीनलैंड में विनिवेश को बढ़ाना चाहता है.
ग्रीनलैंड में कोल्टान धात्विक अयस्क मौजूद है जिसका इस्तेमाल मोबाइल फ़ोन और लैपटॉप में किया जाता है.












